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मक्खियों से परेशान लोगों ने 12 किलोमीटर किया पैदल मार्च

Fri, 17 Jun 2016 11:54 PM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला Updated Fri, 17 Jun 2016 11:54 PM IST
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The 12-km foot march flies annoying people
12 किलोमीटर किया पैदल मार्च - फोटो : अमर उजाला

करनाल जिले के गांव रसूलपुर के लोगों ने आखिरकार मक्खियों से परेशान होकर शुक्रवार को घर छोड़ दिया। ट्रैक्टर-ट्रालियों में सामान लादकर बुजुर्ग, बच्चे और महिलाओं ने 12 किलोमीटर तक पैदल रोष मार्च निकाला। इस दौरान ‘मक्खियां भगाओ, गांव बचाओ’ की हुंकार भरी। इसी दौरान, हलका विधायक हरविंद्र कल्याण ग्रामीणों को समझाने के लिए पहुंचे तो उन्हें भी गुस्से का शिकार होना पड़ा।

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ग्रामीणों ने उनकी बात नहीं मानी और उन पर चुनाव जीतने के बाद नहीं आने की तोहमत लगाई। ग्रामीणों ने दोपहर 12 बजे सीएम कैंप ऑफिस में डेरा जमा लिया। एसडीएम योगेश कुमार के साथ चली बैठक में लिखित में 15 दिन में मक्खियों से छुटकारा दिलाने के आश्वासन पर शाम पांच बजे ग्रामीण मान गए और वापस अपने घरों के लिए रवाना हुए। उधर, इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा। ग्रामीणों ने यह भी चेताया कि अगर 15 दिन में समाधान नहीं हुआ पूरा गांव एसडीएम आवास पर धरने पर बैठेगा।
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इससे पहले, ग्रामीणों ने बताया कि जब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं होता वे सीएम कैंप आवास पर ही रहेंगे, इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे सीएम मनोहर लाल के साथ ही बात करेंगे, अन्य किसी अधिकारी के साथ नहीं। उन्होंने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि ये सरकार को भी गुमराह करते हैं और उनकी समस्या को समझना नहीं चाहते। दोपहर को एसडीएम योगेश कुमार ने गांव के सरपंच व पूर्व सरपंच समेत पांच सदस्यीय कमेटी के साथ बैठक और उन्हें पलायन वापस करने की अपील की। एसडीएम ने गांव को लिखित में 15 दिन में मक्खी मुक्त करने का आशवासन दिया, इस पर ग्रामीण सहमत हो गए।
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कैंप ऑफिस के बाहर बनाया खाना
दोपहर को महिलाओं ने कैंप ऑफिस में ही चूल्हे पर खाना बनाने की कोशिश तो प्रशासन ने इससे इनकार कर दिया। बाद में महिलाओं ने ट्राली में खाना बनाया और सभी प्रदर्शनकारियों को दिया। बता दें कि ग्रामीण अपने साथ पलंग, कुर्सियां और खाने के बर्तन आदि व राशन साथ में ही लेकर आए थे। दोपहर को खाना खाने के बाद शाम पांच बजे ग्रामीणों ने कैंप ऑफिस खाली किया।

मक्खियां जाती नहीं, विधायक आते नहीं
गांव की महिला सुषमा देवी, मामू देवी, कोमल आदि ने बताया कि वे गांव में ब्याह कर आई थीं तो ये गांव अच्छा लगा था, लेकिन अब यहां दम घुटता है। अजीब गांव है हमारा। विधायक हरविंद्र कल्याण वोट लेने के बाद पहली बार गांव अब आए हैं, जब वे गांव छोड़ने लगे। मक्खियां तो यहां से जाती नहीं हैं और विधायक हमारी बात सुनने आते नहीं हैं। महिलाओं ने दावा किया कि ग्रामीण विधायक से चार बार इस समस्या को लेकर मिल चुके हैं, पर उन्होंने कोई बात नहीं सुनी। महिला मामू देवी ने बताया कि उसकी सांस को दिखता नहीं है, ऐसे में उसको कैसे खाना खिलाएं। एक व्यक्ति को उसके साथ बैठना पड़ता है।

घर छोड़ा तो जागा प्रशासन
जैसे ही सुबह ग्रामीणों के घर छोड़ने की खबर अधिकारियों के पास पहुंची तो उनके पसीने छूटने लगे। आनन-फानन में नीली बत्ती लगी गाड़ियों की गांव में लाइन लग गई। बीडीपीओ नरेश शर्मा, सीएमओ डॉ. संतलाल समेत पशु चिकित्सकों की टीम गांव में पहुंची। इसके अलावा तहसीलदार भी सरपंच को मनाने के लिए दलबल के साथ पहुंचे। वहीं, ग्रामीण दलीप राणा का कहना है कि जब वे अपनी समस्याएं बताने के लिए अधिकारियों के पास आते थे तो कोई पटवारी भी स्थिति जांचने के लिए नहीं भेजा गया। अब जब वे गांव छोड़ चुके हैं तो अधिकारियों की लाइनें लगी हुई हैं।

नवीन जयहिंद ने बोला सरकार पर हमला
मक्खियों से परेशान ग्रामीणों को आम आदमी पार्टी ने समर्थन दिया। जेपी शेखपुरा व अनूप संधु अपनी टीम के साथ ग्रामीणों के साथ जुलूस में शामिल हुए। वहीं, दोपहर को पार्टी के संयोजक नवीन जयहिंद ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह समस्या अकेले रसूलपुर गांव की नहीं बल्कि आसपास के दर्जनभर गांवों की है। इसके अलावा, आसपास के गांवों की पंचायतों ने भी रसूलपुर की समस्या के समाधान के लिए उनका समर्थन किया और प्रदर्शन में शामिल रहे। आप नेताओं ने प्रदेश सरकार पर हमला बोला और मांग की कि जल्द ही तीनों पॉल्ट्री फार्मों को बंद किया जाए। मक्खियों के समाप्त होने पर ही ग्रामीण वापस जाएंगे, गांव की इस लड़ाई में आप उनके साथ है। इस मौक पर बलजीत सिंह आदि आप नेता मौजूद थे।

पुलिस के छुड़ाए पसीने
ग्रामीणों ने गांव से शहर पहुंचने तक पुलिस के पसीने छुड़ाए। जैसे ही वे फुसगढ़ रोड से शहर की तरफ आने लगे तो सिविल लाइन थाना प्रभारी उन्हें सीधे सेक्टर 9 से होते हुए आईटीआई चौक से ले जाने के लिए कहने लगे, लेकिन वे नहीं माने। पुलिस ने साईं मंदिर के पास रोकने की कोशिश की, पर ग्रामीण नहीं माने। फिर सेक्टर 6 के पास डीएसपी जितेंद्र गहलावत ने ग्रामीणों को रोका, यहां पर भी वे पीछे नहीं हटे और सब्जी मंडी और बाजारों से होते हुए सीएम कैंप ऑफिस पहुंचे।

शौचालय के लिए परेशानी
सैकड़ों की संख्या में आईं महिलाओं के सामने कैंप ऑफिस में पीने के पानी और शौचालय की समस्या पैदा हो गई। सार्वजनिक शौचालय पर जब महिलाएं जाने लगीं तो उन्हेें पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद महिलाएं शौचालय की तरफ चल पड़ीं। इसके बाद महिला पुलिस कर्मचारी पीछे हटी और शौचालय खोल दिए गए। बाद में प्रदर्शनकारियों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था भी कराई गई।

सुनसान हुई गांव की गलियां
सैकड़ों की संख्या में लोगों के गांव छोड़ने के कारण गलियां सुनसान हो र्गइं। ज्यादातर घरों के बाहर ताले लटके मिले। गांव में दुकानें भी बंद रहीं। गांव में पशुओं की देखभाल के लिए बुजुर्ग व्यक्ति ही रहे। ग्रामीण रघबीर सिंह ने बताया कि वह घर की रखवाली के लिए रुके हैं, बाकी परिवार के सदस्य धरने पर गए हैं।

घटनाक्रम
9 बजे : तहसीलदार व बीडीपीओ गांव पहुंचे मनाने।
10 बजे : ग्रामीण गांव छोड़ने के लिए निकले।
10.15 बजे : विधायक हरविंद्र कल्याण ग्रामीणों को मनाने पहुंचे।
10.30 : नहीं माने ग्रामीण, ट्रैक्टरों में सवार ग्रामीणों ने गांव छोड़ा।
11 बजे : सेक्टर-14 कॉलेज के पास पुलिस ने ग्रामीणों को रोकने की कोशिश की, नहीं माने। 12 : बजे : ठंडी सड़क स्थित सीएम कैंप ऑफिस पहुंचे और डेरा डाला। ग्रामीण व महिलाएं पैदल ही प्रदर्शन करते हुए शहर पहुंचे।
12.30 : एसडीएम योगेश व डीएसपी मौके पर पहुंचे। भारी पुलिस बल रहा मौजूद।
1 बजे : दोपहर को गांव में फॉगिंग कराई गई।
2 बजे : महिलाओं ने खाना बनाया और परोसा।
3 बजे : धरना समाप्त करने पर बनी सहमति।
5 बजे : लिखित में एसडीएम ने दिया आश्वासन, धरना समाप्त, ग्रामीण लौटे।

गांव छोड़ना किसी भी समस्या का हल नहीं है। यह समस्या पुरानी है और मैं मानता हूं कि इससे ग्रामीणों को परेशानी है। लेकिन किसी भी समस्या का समाधान एकदम से नहीं होता है। गांव में स्प्रे कराया गया है और स्वास्थ्य विभाग की टीम भी पहुंची है। ग्रामीणों की समस्या के समाधान के लिए हम कटिबद्ध हैं। कुछ लोग ग्रामीणों को उकसा रहे हैं, यह बहुत घटिया मानसिकता है।
- हरविंद्र कल्याण, विधायक, घरौंडा

जब तक मक्खियों की समस्या से निजात नहीं मिलती, वे गांव नहीं लौटेंगे। पांच सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। सीएम से बात करने के बाद आगामी फैसला लिया जाएगा। पूरा गांव समस्या से निजात पाने के लिए ही घर छोड़कर आया है।

-रामेशवर दास, सरपंच, गांव रसूलपुर कलां
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ग्रामीणों की समस्या का समाधान 15 दिन में किया जाएगा। इस आश्वासन पर ग्रामीण रजामंद हो गए हैं और घरों को लौट गए हैं। इस मामले को लेकर प्रशासन गंभीर है। पॉल्ट्री फार्मों पर डॉक्टरों के दल ने निरीक्षण किया है। नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- योगेश कुमार, एसडीएम

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