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साढ़े 6 घंटे मांगों के लिए गरजे शिक्षक
ब्यूरो/अमरउजाला, करनाल
Updated Mon, 24 Aug 2015 12:42 AM IST
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मांगों को लेकर सीएम सिटी में प्रदेशभर के शिक्षक करीब साढ़े 6 घंटे गरजे।
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शिक्षक आक्रोश रैली में शिक्षकों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास
निकाली। रविवार को हजारों की संख्या में पहुंचे शिक्षकों के रोष को देखते
हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। शिक्षकों ने सेक्टर-12 के हुडा
ग्राउंड में हुंकार भरते हुए प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष प्रकट
किया।
इससे पहले सुबह करीब 10 बजे प्रदेशभर के सभी जिलों से जनशिक्षा को बचाने के लिए शिक्षक सेक्टर-12 ग्राउंड में पहुंचने शुरू हुए। सबसे पहले शिक्षकों ने 23 अगस्त की रविवार की छुट्टी को रद करने की कड़े शब्दों में निंदा की। संघ के प्रदेशाध्यक्ष मास्टर वजीर सिंह ने राज्य सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ नई शिक्षा नीति पर खुली बहस करने के लिए तैयार है। सरकार ने न तो पुरानी शिक्षा नीति की समीक्षा की न ही यह जाना कि इसमें क्या-क्या खामियां हैं व उन्हें कैसे दूर किया जाए।
इतना ही नहीं शिक्षा नीति का कोई ड्राफ्ट भी तैयार नहीं किया। जब ड्राफ्ट ही तैयार नहीं किया तो उस पर सरकार बहस कैसे कर सकती है। छह घंटे की गरजना के बाद शाम करीब चार बजे सीटीएम सतीश कुमार शिक्षकों का ज्ञापन लेने खुद मंच पर आए और मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद 2 सितंबर को चंडीगढ़ में शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत का आश्वासन दिया। इसे शिक्षकों ने सिरे से खारिज कर दिया। चूंकि 2 को राष्ट्रव्यापी हड़ताल है। इसके बाद सीटीएम ने दोबार से मुख्यमंत्री से बात कर 3 सितंबर का समय दिलाया। तब जाकर शिक्षक शांत हुए। इसके बाद शाम करीब पौने 5 बजे शिक्षक करनाल से रवाना हुए और प्रशासन की सांस में सांस आई। शिक्षक आक्रोश रैली का सर्वकर्मचारी संघ, आंगनबाड़ी वर्कर, हेमसा, हरियाणा रोडवेज, एसएफआई व हरियाणा रोडवेज सहित अतिथि अध्यापकों ने समर्थन किया। इस मौके पर सभी 21 जिलों के प्रधान व सचिव सहित राज्य महासचिव सीनए भारती, कुरुक्षेत्र सर्वकर्मचारी के जिला प्रधान संत कुमार, सर्वकर्मचारी संघ के राज्य महासचिव सुभाष लांबा, राज्य प्रधान वजीर सिंह सहित सैकड़ों नेता मौजूद रहे।
सरकार पर लगाया बहकाने का आरोप
राज्य महासचिव सीएन भारती ने सरकार पर आरोप लगाया कि आज एक समय में पंचायतें काम ही नहीं कर रही हैं ऐसे में उनसे सुझाव कैसे लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ और सिर्फ सरकार शिक्षकों का ध्यान भटकाना चाहती थी। इसलिए 23 अगस्त को छुट्टी के दिन न्यू शिक्षा पॉलसी के तहत सुझाव मांगे गए।
राजस्थान में 17000 से अधिक विद्यालय किए बंद
राजस्थान शिक्षक संघ के महासचिव महाबीर सिंह ने कहा कि राजस्थान के 17 हजार से ज्यादा विद्यालय बंद कर दिए गए हैं। इतना ही नहीं 70 हजार से ज्यादा शिक्षकों के पद भी सरकार ने समाप्त कर दिए हैं। 50 हजार से ज्यादा शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा ही सरकार अब हरियाणा में भी करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार पीपीपी के मॉडल के नाम पर शिक्षा का निजीकरण करना चाहती है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार पैसे से कारपोरेट्स का पोषण करती रही तो इसके खिलाफ सभी संगठन मिलकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाएंगे।
यह हैं शिक्षकों की मुख्य मांगें
शिक्षकों की मुख्य मांगों में ठेका प्रथा को रद करना, 9 साल से प्रमोशन की प्रतीक्षा में बैठे शिक्षकों की प्रमोशन करना, कैश लैस मेडिकल सुविधा, कच्चे कर्मचारियों को नियमित, गेस्ट टीचर्स को नियमित करना, जेबीटी इंटर्नशिप को बंद करना, कंप्यूटर टीचर्स व लैब सहायकों को विभाग में समायोजित करना, 9870 नवनिर्वाचित शिक्षकों की ज्वानिंग करना, सभी सरकारी शिक्षकों, अधिकारियों, न्यायविदों के बच्चों का सरकारी स्कूलों में प्रवेश अनिवार्य करना, रेशनेलाइजलेशन नीति को व्यावहारिक बनाना, अध्यापक छात्र अनुपात प्राइमरी में 1:20 मिडल में 1:30, वरिष्ठ माध्यमिक में 1:40 करना, हर विषय का अलग अध्यापक, हटाए गए अध्यापकों को दोबारा रखना, अंतर जिला स्थानांतरण नीति बनाना, शिक्षा का विस्तार व बजट बढ़ाना इत्यादि शामिल हैं।
इससे पहले सुबह करीब 10 बजे प्रदेशभर के सभी जिलों से जनशिक्षा को बचाने के लिए शिक्षक सेक्टर-12 ग्राउंड में पहुंचने शुरू हुए। सबसे पहले शिक्षकों ने 23 अगस्त की रविवार की छुट्टी को रद करने की कड़े शब्दों में निंदा की। संघ के प्रदेशाध्यक्ष मास्टर वजीर सिंह ने राज्य सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ नई शिक्षा नीति पर खुली बहस करने के लिए तैयार है। सरकार ने न तो पुरानी शिक्षा नीति की समीक्षा की न ही यह जाना कि इसमें क्या-क्या खामियां हैं व उन्हें कैसे दूर किया जाए।
इतना ही नहीं शिक्षा नीति का कोई ड्राफ्ट भी तैयार नहीं किया। जब ड्राफ्ट ही तैयार नहीं किया तो उस पर सरकार बहस कैसे कर सकती है। छह घंटे की गरजना के बाद शाम करीब चार बजे सीटीएम सतीश कुमार शिक्षकों का ज्ञापन लेने खुद मंच पर आए और मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद 2 सितंबर को चंडीगढ़ में शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत का आश्वासन दिया। इसे शिक्षकों ने सिरे से खारिज कर दिया। चूंकि 2 को राष्ट्रव्यापी हड़ताल है। इसके बाद सीटीएम ने दोबार से मुख्यमंत्री से बात कर 3 सितंबर का समय दिलाया। तब जाकर शिक्षक शांत हुए। इसके बाद शाम करीब पौने 5 बजे शिक्षक करनाल से रवाना हुए और प्रशासन की सांस में सांस आई। शिक्षक आक्रोश रैली का सर्वकर्मचारी संघ, आंगनबाड़ी वर्कर, हेमसा, हरियाणा रोडवेज, एसएफआई व हरियाणा रोडवेज सहित अतिथि अध्यापकों ने समर्थन किया। इस मौके पर सभी 21 जिलों के प्रधान व सचिव सहित राज्य महासचिव सीनए भारती, कुरुक्षेत्र सर्वकर्मचारी के जिला प्रधान संत कुमार, सर्वकर्मचारी संघ के राज्य महासचिव सुभाष लांबा, राज्य प्रधान वजीर सिंह सहित सैकड़ों नेता मौजूद रहे।
सरकार पर लगाया बहकाने का आरोप
राज्य महासचिव सीएन भारती ने सरकार पर आरोप लगाया कि आज एक समय में पंचायतें काम ही नहीं कर रही हैं ऐसे में उनसे सुझाव कैसे लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ और सिर्फ सरकार शिक्षकों का ध्यान भटकाना चाहती थी। इसलिए 23 अगस्त को छुट्टी के दिन न्यू शिक्षा पॉलसी के तहत सुझाव मांगे गए।
राजस्थान में 17000 से अधिक विद्यालय किए बंद
राजस्थान शिक्षक संघ के महासचिव महाबीर सिंह ने कहा कि राजस्थान के 17 हजार से ज्यादा विद्यालय बंद कर दिए गए हैं। इतना ही नहीं 70 हजार से ज्यादा शिक्षकों के पद भी सरकार ने समाप्त कर दिए हैं। 50 हजार से ज्यादा शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा ही सरकार अब हरियाणा में भी करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार पीपीपी के मॉडल के नाम पर शिक्षा का निजीकरण करना चाहती है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार पैसे से कारपोरेट्स का पोषण करती रही तो इसके खिलाफ सभी संगठन मिलकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाएंगे।
यह हैं शिक्षकों की मुख्य मांगें
शिक्षकों की मुख्य मांगों में ठेका प्रथा को रद करना, 9 साल से प्रमोशन की प्रतीक्षा में बैठे शिक्षकों की प्रमोशन करना, कैश लैस मेडिकल सुविधा, कच्चे कर्मचारियों को नियमित, गेस्ट टीचर्स को नियमित करना, जेबीटी इंटर्नशिप को बंद करना, कंप्यूटर टीचर्स व लैब सहायकों को विभाग में समायोजित करना, 9870 नवनिर्वाचित शिक्षकों की ज्वानिंग करना, सभी सरकारी शिक्षकों, अधिकारियों, न्यायविदों के बच्चों का सरकारी स्कूलों में प्रवेश अनिवार्य करना, रेशनेलाइजलेशन नीति को व्यावहारिक बनाना, अध्यापक छात्र अनुपात प्राइमरी में 1:20 मिडल में 1:30, वरिष्ठ माध्यमिक में 1:40 करना, हर विषय का अलग अध्यापक, हटाए गए अध्यापकों को दोबारा रखना, अंतर जिला स्थानांतरण नीति बनाना, शिक्षा का विस्तार व बजट बढ़ाना इत्यादि शामिल हैं।