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अचानक तापमान में बढ़ोतरी पैदावार को पहुंचा सकता है नुकसान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 13 Dec 2021 02:27 AM IST
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Sudden rise in temperature can harm the yield
कर्मबीर लाठर
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करनाल। गेहूं की फसल की किसी भी अवस्था में तापमान में अप्रत्याशित परिवर्तन पैदावार को काफी नुकसान पहुंचा सकता है। पिछले एक दशक में टर्मिनल हीट स्ट्रेस (अंतस्थ ताप तनाव) का प्रभाव कई बार सामने आ चुका है। बालियों में दूधिया अवस्था शुरू होने के दौरान अचानक तापमान बढ़ने से दाने सिकुड़ जाते हैं। अनुसंधान वैज्ञानिकों ने इस प्रभाव से फसल को बचाने के प्रभावी तरीके खोजे हैं।
भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अनुज कुमार ने कहा कि जब गेहूं का जमाव हो तब दिन का औसत तापमान 20 से 25 डिग्री, फुटाव के समय न्यूनतम तापमान 6 से 9 डिग्री, बालियां निकलने लगें तब औसत तापमान 18 से 24 डिग्री सेंटीग्रेड को अनुकूल माना जाता है। दाना भरने के समय तक 20 से 25 डिग्री सेंटीग्रेड व फसल पकने के समय 28 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड होना चाहिए।
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उन्होंने बताया कि धान कटाई के बाद फसल अवशेष को खेत में सहेजकर बिना जुताई गेहूं की बिजाई करने से भी कई समस्याओं का समाधान हो जाता है। संस्थान में पिछले 12 साल से अनुसंधान प्रक्षेत्र में ऐसा अनुभव हासिल किया है। इससे जमीन में कार्बन की मात्रा के साथ जल धारण की क्षमता बढ़ेगी। पौधे का जड़ क्षेत्र ठंडा रहता है और नमी व तापमान सही बना रहता है। गेहूं में बालियां आने की स्थिति में तापमान बढ़ने पर ऐसे खेत में दाने नहीं सिकुड़ते। इस विधि से फसल लेने पर दानों में प्रोटीन की मात्रा भी बढ़ जाती है। संवाद
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टर्मिनल हीट स्ट्रेस को ऐसे करें नियंत्रित
संस्थान के निदेशक डॉ. जीपी सिंह ने कहा कि गेहूं की फसल को टर्मिनल हीट स्ट्रेस से बचाव के लिए संस्थान ने अनुभव हासिल किए हैं। मार्च में जब भी दिन का औसत तापमान बढ़ रहा हो तो हवा की गति को ध्यान में रखते हुए हल्की सिंचाई करनी चाहिए। दक्षिण हरियाणा, राजस्थान व गुजरात क्षेत्र में फव्वारा सिंचाई विधि से शाम को पानी का छिड़काव पौधों को ठंडा रखेगा। इसके अलावा पोटेशियम क्लोराइड (केसीएल .2 प्रतिशत) प्रति एकड़ के लिए 150 लीटर पानी में 300 ग्राम केसीएल का घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। यह छिड़काव तापमान के प्रभाव को कम करने में कारगर है या फिर म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) 200 ग्राम को 100 लीटर पानी में घोलकर 15 दिन के अंतराल पर दो बार फसल पर छिड़काव करें।
करनाल जिले में दस वर्षों में आठ दिसंबर का तापमान
वर्ष अधिकतम न्यूनतम
2011 26.2 13.3
2012 23.2 6.0
2013 24.2 9.2
2014 24.5 7.5
2015 23.0 9.0
2016 19.0 8.2
2017 23.0 8.5
2018 23.0 6.0
2019 24.6 6.2
2020 25.0 9.8
2021 23.6 8.6
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