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समस्याओं का निदान करने में सक्षम होंगे विद्यार्थी
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। सीबीएसई स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी अब अपने आसपास की समस्याओं को समझना सीखेंगे। इसके साथ ही वे इन समस्याओं का हल निकालने में भी सक्षम बनेंगे। सीबीएसई ने विद्यार्थियों को डिजाइन थिंकिंग और इनोवेशन स्किल मॉड्यूल सिखाने का फैसला लिया है।
इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को न सिर्फ किसी समस्या की पहचान करना, बल्कि उसका हल करने लायक बनाना है। इस स्किल को सिखाने का मकसद सिर्फ राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर की बड़ी समस्याओं का हल करना नहीं, बल्कि बच्चों को अपने आसपास की समस्या को समझना, जानना और उनका हल निकालने में सक्षम बनाना है। बोर्ड ने इस मॉड्यूल को छठी से 12वीं तक लागू करने के लिए कहा है, लेकिन शुरुआती स्तर पर इसे आठवीं तक लागू किया जाएगा।
सीबीएसई ने शिक्षा मंत्रालय के इनोवेशन सेल और आईआईटी की फैकल्टी से मिलकर डिजाइन थिंकिंग और इनोवेशन स्किल का मॉड्यूल तैयार किया है। इसके लिए स्कूलों को अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी, उन्हें बस अपने ओएसएसआईएस फॉर्म की जानकारी को अपडेट करना होगा। बोर्ड स्कूलों से अध्यापकों की जानकारी लेगा और उन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी। इस मॉड्यूल के लिए अध्ययन सामग्री, शिक्षक संसाधन सामग्री, अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न सीबीएसई एकेडमिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं।
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कॅरियर के तौर पर भी अपनाने को करेंगे प्रेरित
सहोदय स्कूल कांप्लेक्स के अध्यक्ष डॉ. राजन लांबा के अनुसार, क्लासरूम को स्टूडियो बनाया जाएगा, जहां बिना किसी बंदिश के किसी भी समस्या का हल निकालने के लिए इकट्ठे मिलकर काम करें। विद्यार्थियों को इस विषय से रूबरू करवाने के बाद उन्हें टास्क बुक्स दी जाएंगी। एक्सपोजर स्लाइड और वीडियो इत्यादि भी दिखाई जाएगी। विद्यार्थियों को न सिर्फ ये स्किल मॉड्यूल सिखाया जाएगा।
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करनाल। सीबीएसई स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी अब अपने आसपास की समस्याओं को समझना सीखेंगे। इसके साथ ही वे इन समस्याओं का हल निकालने में भी सक्षम बनेंगे। सीबीएसई ने विद्यार्थियों को डिजाइन थिंकिंग और इनोवेशन स्किल मॉड्यूल सिखाने का फैसला लिया है।
इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को न सिर्फ किसी समस्या की पहचान करना, बल्कि उसका हल करने लायक बनाना है। इस स्किल को सिखाने का मकसद सिर्फ राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर की बड़ी समस्याओं का हल करना नहीं, बल्कि बच्चों को अपने आसपास की समस्या को समझना, जानना और उनका हल निकालने में सक्षम बनाना है। बोर्ड ने इस मॉड्यूल को छठी से 12वीं तक लागू करने के लिए कहा है, लेकिन शुरुआती स्तर पर इसे आठवीं तक लागू किया जाएगा।
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सहोदय स्कूल कांप्लेक्स के अध्यक्ष डॉ. राजन लांबा के अनुसार, क्लासरूम को स्टूडियो बनाया जाएगा, जहां बिना किसी बंदिश के किसी भी समस्या का हल निकालने के लिए इकट्ठे मिलकर काम करें। विद्यार्थियों को इस विषय से रूबरू करवाने के बाद उन्हें टास्क बुक्स दी जाएंगी। एक्सपोजर स्लाइड और वीडियो इत्यादि भी दिखाई जाएगी। विद्यार्थियों को न सिर्फ ये स्किल मॉड्यूल सिखाया जाएगा।