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बसों की कमी पर छात्राओं का हंगामा
करनाल
Updated Tue, 18 Feb 2014 11:39 PM IST
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करनाल बस अड्डा परिसर में मंगलवार को बसों की कमी के कारण शहर के कई कालेजों की छात्राओं ने जमकर बवाल काटा। करीब एक घंटे से अधिक समय तक ग्रामीण रूटों पर चलने वाली लड़कियों की दो सरकारी बसों को रोक कर रखा और परिवहन विभाग के अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
छात्राओं ने कहा कि अधिकारी वादाखिलाफी कर रहे हैं। करीब एक महीना पूर्व करनाल से मूनक रूट पर तीन सरकारी बसें चलाने के आश्वासन के बावजूद अधिकारियों ने मात्र दो बसें चलाईं।
उन्होंने कहा कि छात्राओं की संख्या अधिक होने के कारण मात्र दो बसें पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर रूट पर एक और बस नहीं चलाई गई तो वे फिर से जोरदार प्रदर्शन करेंगी। करीब एक घंटे के विरोध के बाद अधिकारियों और पुलिस के हस्तक्षेप करने के बाद किसी तरह बसें चलीं।
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‘घाटे का रूट कहकर हटाई बसें’
करनाल से घोघडीपुर मोड़, बडौता, गगसीना, स्टौंडी और मूनक समेत करीब दर्जन भर गांवों में जाने वाले रूटों की छात्राएं मंगलवार को बस अड्डे पर जमा हो गई। उन्होंने इन रूटों पर चलने वाली छात्राओं से भरी दो बसों को बस अड्डे पर ही रोक दिया। छात्राओं के साथ काफी युवा भी मौके पर जमा हो गए।
गांव गगसीना निवासी चरणसिंह उर्फ बिट्टू सरपंच ने भी छात्राओं का पूरा समर्थन किया। विरोध जता रही नेहा, शिखा, मेघा, ऋतु, प्रीति, काजल, नीलम, सीमा, कमल, संगीता, दीपा, भारती, रेनू, अनीता, सुनीता, सपना, समेत अन्य छात्राओं ने कहा कि इस रूट को परिवहन विभाग ने सहकारी समिति की बसों को दे रखा है। करनाल से बल्ला सहकारी समिति की बसों को रूट बना हुआ है। दोनों बसें घाटे का रूट होेने की बात कर अपने मूल रूट को छोड़ कर करनाल से बड़ौली कमाई वाले रूट पर चलती हैं।
इस कारण छात्राओं का शहर के स्कूल और कालेज में पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है। करीब एक महीना पहले 25 जनवरी को छात्राओं ने विरोध कर गांव स्टौंडी में बसों का जाम लगा दिया था। रोडवेज करनाल डिपो के महाप्रबंधक जयपाल राणा ने इस रूट पर तीन सरकारी बस चलाने का आश्वासन दिया था। जिसके बाद अधिकारियों ने दो बसें इस रूट पर चलाई थी। लेकिन करीब दो सौ से अधिक छात्राएं इस रूट पर करनाल आती हैं। जिससे छात्राओं को दिक्कत झेलनी पड़ती है।
बसों में नहीं मिलती जगह: छात्राएं
परिवहन बसाें में छात्राओं की संख्या अधिक होने के कारण उन्हें जगह नहीं मिलती। ऐसे में काफी छात्राएं निजी वाहनों में देरी से घर जाने को मजबूर हैं। सुबह भी यही हाल है। सुबह कालेज में लेट तो शाम को घर में लेट पहुंचने पर दोनों से फटकार मिलती है। बसों में फ्री सुविधा देने की मुख्यमंत्री की घोषणा को लागू करना दूर छात्राओं को किराया देकर भी सुविधा नहीं मिल रही है, जो बेहद गलत है।
एक सप्ताह का समय मांगा
मामला बेहद गंभीर है। ग्रामीण रूटों पर बसों की किसी भी लड़की की जान जोखिम में डाल सकती है। दो बार लड़कियां विरोध जता चुकी हैं। मंगलवार को इस मामले को निपटाने के लिए डीटीओ डॉ. सुशील कुमार और सहकारी समिति की बसों के संचालकों ने एक सप्ताह के भीतर इस समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया है। उन लोगों ने कहा सहकारी समिति की बसों के परमिट इन रूटों से रद्द किए जाएंगे और सरकारी बसें चला दी जाएंगी।
-चरण सिंह, सरपंच गगसीना।
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छात्राओं ने कहा कि अधिकारी वादाखिलाफी कर रहे हैं। करीब एक महीना पूर्व करनाल से मूनक रूट पर तीन सरकारी बसें चलाने के आश्वासन के बावजूद अधिकारियों ने मात्र दो बसें चलाईं।
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उन्होंने कहा कि छात्राओं की संख्या अधिक होने के कारण मात्र दो बसें पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर रूट पर एक और बस नहीं चलाई गई तो वे फिर से जोरदार प्रदर्शन करेंगी। करीब एक घंटे के विरोध के बाद अधिकारियों और पुलिस के हस्तक्षेप करने के बाद किसी तरह बसें चलीं।
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‘घाटे का रूट कहकर हटाई बसें’
करनाल से घोघडीपुर मोड़, बडौता, गगसीना, स्टौंडी और मूनक समेत करीब दर्जन भर गांवों में जाने वाले रूटों की छात्राएं मंगलवार को बस अड्डे पर जमा हो गई। उन्होंने इन रूटों पर चलने वाली छात्राओं से भरी दो बसों को बस अड्डे पर ही रोक दिया। छात्राओं के साथ काफी युवा भी मौके पर जमा हो गए।
गांव गगसीना निवासी चरणसिंह उर्फ बिट्टू सरपंच ने भी छात्राओं का पूरा समर्थन किया। विरोध जता रही नेहा, शिखा, मेघा, ऋतु, प्रीति, काजल, नीलम, सीमा, कमल, संगीता, दीपा, भारती, रेनू, अनीता, सुनीता, सपना, समेत अन्य छात्राओं ने कहा कि इस रूट को परिवहन विभाग ने सहकारी समिति की बसों को दे रखा है। करनाल से बल्ला सहकारी समिति की बसों को रूट बना हुआ है। दोनों बसें घाटे का रूट होेने की बात कर अपने मूल रूट को छोड़ कर करनाल से बड़ौली कमाई वाले रूट पर चलती हैं।
इस कारण छात्राओं का शहर के स्कूल और कालेज में पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है। करीब एक महीना पहले 25 जनवरी को छात्राओं ने विरोध कर गांव स्टौंडी में बसों का जाम लगा दिया था। रोडवेज करनाल डिपो के महाप्रबंधक जयपाल राणा ने इस रूट पर तीन सरकारी बस चलाने का आश्वासन दिया था। जिसके बाद अधिकारियों ने दो बसें इस रूट पर चलाई थी। लेकिन करीब दो सौ से अधिक छात्राएं इस रूट पर करनाल आती हैं। जिससे छात्राओं को दिक्कत झेलनी पड़ती है।
बसों में नहीं मिलती जगह: छात्राएं
परिवहन बसाें में छात्राओं की संख्या अधिक होने के कारण उन्हें जगह नहीं मिलती। ऐसे में काफी छात्राएं निजी वाहनों में देरी से घर जाने को मजबूर हैं। सुबह भी यही हाल है। सुबह कालेज में लेट तो शाम को घर में लेट पहुंचने पर दोनों से फटकार मिलती है। बसों में फ्री सुविधा देने की मुख्यमंत्री की घोषणा को लागू करना दूर छात्राओं को किराया देकर भी सुविधा नहीं मिल रही है, जो बेहद गलत है।
एक सप्ताह का समय मांगा
मामला बेहद गंभीर है। ग्रामीण रूटों पर बसों की किसी भी लड़की की जान जोखिम में डाल सकती है। दो बार लड़कियां विरोध जता चुकी हैं। मंगलवार को इस मामले को निपटाने के लिए डीटीओ डॉ. सुशील कुमार और सहकारी समिति की बसों के संचालकों ने एक सप्ताह के भीतर इस समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया है। उन लोगों ने कहा सहकारी समिति की बसों के परमिट इन रूटों से रद्द किए जाएंगे और सरकारी बसें चला दी जाएंगी।
-चरण सिंह, सरपंच गगसीना।