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पिता ने छोड़ा मामा ने संभाला, योगा में जीता नेशनल स्तर पर गोल्ड
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पिता ने छोड़ा मामा ने संभाला, नेशनल स्तर पर जीता योगा में गोल्ड
पढ़ाई लिखाई में ही होशियार, बीए फस्ट ईयर में लिए एडमिशन
जीलास्तर, स्कूली स्तर पर नेशनल स्तर पर अब तक जीत चुके हैं 12 मेडल
फोटो-78, 79
मुकेश राणा
करनाल। हिम्मत... साढे़ चार घंटे अभ्यास करने की, जिद्द... कुछ बनने की? इन्हीं दो पहलुओं के बीच संघर्ष करते गौरव पाल के सपने। माता के गुजरने पर पिता ने साथ छोड़ा तो मामा ने संभाला। बकौल गौरव बताते हैं कि वह जब 9 महीने का था तो उनकी माता भगवान को प्यारी हो गई पिता ने क्यों छोड़ा यह आज तक नहीं पता, मुसीबतों का टूटा, होश आया तो मामा कृष्ण साया पाया। यहीं दास्तां है करनाल निवासी गौरवपाल की। पढ़ाई लिखाई के साथ साथ मन में कुछ अलग करने की ठानी तो 2013 में कर्ण स्टेडियम का रुख किया और योगा का प्रशिक्षण लेने लगा। इस बीच जीवन में कई उचार चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और 2017 में पलवल में आयोजित ऑल इंडिया ओपन योगा फेडरेशन में गोल्ड मेडल जीता। अभी तक के सफर में गौरव पाल नेशनल, जिलास्तर, स्कूली स्तर पर करीब 12 मेडल जीत चुके हैं। 18 साल के गौरव पाल ने अभी हाल ही में बीए कदम रखा है और वह योगा में अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं। यही नहीं गौर पढ़ाई लिखाई में भी काफी होशियार है। उन्होंने 10वीं में 70 प्रतिशत व 12वीं में 80 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं।
घर और स्टेडियम में करते है कड़ा अभ्यास
उनका कहना है कि केवल योगा में ही अपना करियार बनाना चाहते हैं और इसके लिए वह स्टेडियम और घर पर योगा का कड़ा अभ्यास करते हैं। वह अगले महीने होने वाली यूथ अफेयर्स और योगा फेडरेशन ऑफ इंडिया की होने वाली प्रतियोगिताओं के लिए कड़ी तैयारी कर रहे हैं। इन प्रतियोगिताओं में गोल्ड पर उनका निशाना साधना है और इसकी के लिए वह दिन रात मेहनत भी कर रहे है। उनका कहना है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने स्वस्थ भारत मिशन में अपना योगदान देना चाहता है और युवाओं को भी स्वस्थ रहने की सलाह देना चाहता है।
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पढ़ाई लिखाई में ही होशियार, बीए फस्ट ईयर में लिए एडमिशन
जीलास्तर, स्कूली स्तर पर नेशनल स्तर पर अब तक जीत चुके हैं 12 मेडल
फोटो-78, 79
मुकेश राणा
करनाल। हिम्मत... साढे़ चार घंटे अभ्यास करने की, जिद्द... कुछ बनने की? इन्हीं दो पहलुओं के बीच संघर्ष करते गौरव पाल के सपने। माता के गुजरने पर पिता ने साथ छोड़ा तो मामा ने संभाला। बकौल गौरव बताते हैं कि वह जब 9 महीने का था तो उनकी माता भगवान को प्यारी हो गई पिता ने क्यों छोड़ा यह आज तक नहीं पता, मुसीबतों का टूटा, होश आया तो मामा कृष्ण साया पाया। यहीं दास्तां है करनाल निवासी गौरवपाल की। पढ़ाई लिखाई के साथ साथ मन में कुछ अलग करने की ठानी तो 2013 में कर्ण स्टेडियम का रुख किया और योगा का प्रशिक्षण लेने लगा। इस बीच जीवन में कई उचार चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और 2017 में पलवल में आयोजित ऑल इंडिया ओपन योगा फेडरेशन में गोल्ड मेडल जीता। अभी तक के सफर में गौरव पाल नेशनल, जिलास्तर, स्कूली स्तर पर करीब 12 मेडल जीत चुके हैं। 18 साल के गौरव पाल ने अभी हाल ही में बीए कदम रखा है और वह योगा में अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं। यही नहीं गौर पढ़ाई लिखाई में भी काफी होशियार है। उन्होंने 10वीं में 70 प्रतिशत व 12वीं में 80 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं।
घर और स्टेडियम में करते है कड़ा अभ्यास
उनका कहना है कि केवल योगा में ही अपना करियार बनाना चाहते हैं और इसके लिए वह स्टेडियम और घर पर योगा का कड़ा अभ्यास करते हैं। वह अगले महीने होने वाली यूथ अफेयर्स और योगा फेडरेशन ऑफ इंडिया की होने वाली प्रतियोगिताओं के लिए कड़ी तैयारी कर रहे हैं। इन प्रतियोगिताओं में गोल्ड पर उनका निशाना साधना है और इसकी के लिए वह दिन रात मेहनत भी कर रहे है। उनका कहना है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने स्वस्थ भारत मिशन में अपना योगदान देना चाहता है और युवाओं को भी स्वस्थ रहने की सलाह देना चाहता है।
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