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बहन ने जताया था भरोसा, रजत जीत सपना किया पूरा
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90: कुरुक्षेत्र में खेलो हरियाणा के तहत आयोजित साइक्लिंग प्रतियोगिता में रजत पदक जीतने के बाद करन?
करनाल। नीलाक्षी ने बहन के भरोसे को सच साबित कर खेलो हरियाणा के तहत कुरुक्षेत्र में आयोजित एमएस (मॉस स्टार्ट) साइक्लिंग प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया। बस उसे इस बात का मलाल है कि जिस बहन ने उसको साइक्लिंग में आगे बढ़ाया, वह इस क्षण को न देख सकी। प्रतियोगिता शुरू होने से महज 11 दिन पहले उसकी बहन सोनिया, जो खुद भी साइक्लिंग की राष्ट्रीय खिलाड़ी थी, अचानक दुनिया छोड़ गई।
नीलाक्षी करनाल के सगा गांव के एक किसान परिवार की बेटी है। उसने पांच वर्ष पहले बड़ी बहन सोनिया के कहने पर साइक्लिंग की शुरुआत की थी। नीलाक्षी ने बताया कि वह कहती थी कि तुम्हारे में क्षमता है। यदि प्रयास करो तो देश व प्रदेश का नाम रोशन कर सकती हो। बस फिर क्या था मैंने अभ्यास शुरू कर दिया लेकिन क्या पता था कि खेलो हरियाणा प्रतियोगिता शुरू होने से पहले वह नहीं रहेगी।
नीलाक्षी ने रूंधे गले से बताया कि बहन की मौत के बाद प्रतियोगिता में जाने का मन नहीं हो रहा था पर प्रशिक्षक मुकेश शर्मा ने हिम्मत दी। कहा कि तुम्हारी बहन भी चाहती थी तुम खेल में बेहतर प्रदर्शन करो। उसने कहा कि इस रजत पदक को मैं अपनी बहन को समर्पित करती हूं। आगे भी बहन के सपने को पूरा करने के लिए जी-जान से अच्छा प्रयास करूंगी।
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नीलाक्षी करनाल के सगा गांव के एक किसान परिवार की बेटी है। उसने पांच वर्ष पहले बड़ी बहन सोनिया के कहने पर साइक्लिंग की शुरुआत की थी। नीलाक्षी ने बताया कि वह कहती थी कि तुम्हारे में क्षमता है। यदि प्रयास करो तो देश व प्रदेश का नाम रोशन कर सकती हो। बस फिर क्या था मैंने अभ्यास शुरू कर दिया लेकिन क्या पता था कि खेलो हरियाणा प्रतियोगिता शुरू होने से पहले वह नहीं रहेगी।
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नीलाक्षी ने रूंधे गले से बताया कि बहन की मौत के बाद प्रतियोगिता में जाने का मन नहीं हो रहा था पर प्रशिक्षक मुकेश शर्मा ने हिम्मत दी। कहा कि तुम्हारी बहन भी चाहती थी तुम खेल में बेहतर प्रदर्शन करो। उसने कहा कि इस रजत पदक को मैं अपनी बहन को समर्पित करती हूं। आगे भी बहन के सपने को पूरा करने के लिए जी-जान से अच्छा प्रयास करूंगी।
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