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चढ़ूनी को झटका, जिलाध्यक्ष समेत 42 पदाधिकारियों ने छोड़ी यूनियन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 10 Feb 2022 02:02 AM IST
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Shock to Chadhuni, 42 office bearers including district president left the union
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। धरना, प्रदर्शन हो या रैली व जुलूस, किसान आंदोलन के दौरान लगातार सक्रिय भागीदारी निभाने वाले भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के पदाधिकारी व कार्यकर्ता भी अब यूनियन प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी की सियासी पारी से दूर होने लगे हैं। बुधवार को जाट धर्मशाला में बैठक करके जिले में किसान आंदोलन की कमान संभालने वाले जिलाध्यक्ष अजय राणा, प्रदेश कोर कमेटी के सदस्य जगदीप औलख सहित करीब 42 पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने भाकियू (चढू़नी) से त्याग पत्र देते हुए खुद को गुरनाम सिंह चढूनी की राजनीतिक गतिविधियों से अलग करने का एलान कर दिया।
भाकियू चढ़ूनी के प्रदेश कोर कमेटी के सदस्य जगदीप सिंह औलख ने सोमवार को ही विभिन्न मांगों को लेकर लघु सचिवालय के सामने धरना शुरू किया था। मंगलवार को उपायुक्त ने किसान नेताओं से बातचीत के बाद सप्ताह भर में समस्याओं के निदान के लिए चंडीगढ़ में कृषि मंत्री के साथ बैठक कराने का भरोसा दे दिया तो आंदोलन खत्म कर दिया गया था। माना जा रहा है कि किसानों ने चढ़ूनी की सियासी पारी का समर्थन नहीं किया, जिसका असर कहीं न कहीं इस दो दिवसीय आंदोलन में भी देखा गया। इसके अगले ही दिन जाट धर्मशाला में भाकियू चढ़ूनी की जिला कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई।
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हालांकि कुछ ब्लॉकों के प्रधान नहीं पहुंचे, फिर भी जिलाध्यक्ष अजय राणा, प्रदेश कोर कमेटी के सदस्य जगदीप औलख, हैपी औलख, महिला विंग की प्रधान कविता दत्त, जिला उप प्रधान छत्रपाल सिंधड़, असंध शहर प्रधान सुख काहलो, राज्य कमेटी के सुखविंदर जब्बर, अनहद प्रताप सिंह, अमनदीप बब्बर, दिलबाग दरड़, नवजोत संधू, बहादुर मेहला आदि जिला, ब्लॉक व प्रदेश कमेटी के कई पदाधिकारी व सदस्य पहुंचे। बैठक के बाद जिलाध्यक्ष अजय राणा व जगदीप औलख ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि करीब 42 पदाधिकारियों, सदस्यों ने बैठक करके भाकियू चढ़ूनी से त्याग पत्र देकर अपना नाता तोड़ लिया है, क्योंकि किसानों ने यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी की राजनीतिक पारी को स्वीकार नहीं किया है। संगठन पूर्ण अराजनीतिक था, लेकिन यूनियन प्रमुख राजनीतिक पार्टी बनाकर पंजाब में विधान सभा चुनाव में उतर गए हैं। यह उनका अपना निजी फैसला है। त्यागपत्र के बाद फिलहाल तो वे अपने घर रहेंगे, किसानों के लिए हमेशा संघर्ष करने को तैयार रहेंगे।
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यह फैसला मान्य नहीं
भाकियू चढ़ूनी के इंद्री ब्लॉक प्रधान मंजीत लालर ने बताया कि जाट धर्मशाला में आज हुई बैठक जिले की बैठक नहीं थी, कई ब्लॉक प्रधान नहीं पहुंचे थे। यूनियन से अलग होने का फैसला पूरे जिले का फैसला नहीं माना जा सकता। इस पर निर्णय करने के लिए फिर एक बैठक होगी, जिसमें जिले की पूरी कार्यकारिणी मौजूद होगी। इसलिए वह आज की बैठक के फैसले को दरकिनार करते हैं।
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