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थानेदार समेत सात पुलिस अधिकारी डेंगू की गिरफ्त में
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल
Updated Thu, 03 Sep 2015 12:54 AM IST
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जिले में डेंगू का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को खुद स्वास्थ्य विभाग ने अगस्त महीने में 9 लोगों को डेंगू की चपेट में आने की पुष्टि की। इसके बाद सिटी थाने के थानेदार समेत सात पुलिस अधिकारियों को डेंगू ने गिरफ्त में ले लिया है। पहले शिव कॉलोनी और अब सिटी थाना पूरी तरह से डेंगू की गिरफ्त में आ चुके हैं। हालात यह हैं कि सिटी थाने में इस समय दहशत का माहौल है। बावजूद इसके जिले में डेंगू से बचाव के लिए किए जा रहे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।
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सिटी थाना के एसएचओ मोहन लाल, एडिशनल एसएचओ ओमप्रकाश, एसएसआई जयपाल, छोटा मुंशी विजय, बड़ा मुंशी विजय व हैड कांस्टेबल कमल को डेंगू की पुष्टि निजी अस्पतालों ने कर दी है। हालांकि, विभाग अभी भी निजी अस्पतालों की इस रिपोर्ट का खंडन कर रहा है। ध्यान रहे कि महाबीर दल अस्पताल में डेंगू से पीड़ित महिला की मौत के बाद परिजनों ने मंगलवार देर रात हंगामा करते हुए तोड़फोड़ की थी। विभाग ने अंजली को भी अभी तक डेंगू की पुष्टि नहीं की है। अब एक ही थाने के सात पुलिस कर्मियों को डेंगू की पुष्टि होने के बाद भी विभाग अभी खुद का पल्ला झाड़ने में लगा है।
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गौरतलब है कि सिटी थाने के दोनों मुंशी महाबीर दल के आईसीयू में ही भर्ती हैं। हेड कांस्टेबल कमल यमुनानगर के निजी अस्पताल में भर्ती है तो एसएचओ मोहन लाल भी करनाल के एक निजी अस्पताल से उपचार ले रहे हैं। बता दें कि इंद्री थाना प्रभारी महेंद्र कुमार को भी डेंगू हो गया था और वह गुड़गांव के मेदांता अस्पताल से इलाज ले रहे हैं। बता दें कि जिले में राजबीर नामक व्यक्ति को जिला स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू पीड़ित घोषित किया था, जोकि पुलिस कर्मी ही है।
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चिड़ाव के ग्रामीण भी दहशत में
चिड़ाव गांव में भी इस समय डेंगू का प्रकोप है। ग्रामीण डेंगू से डरे हुए हैं। इस बारे में स्वास्थ्य विभाग को भी ग्रामीणों ने आगाह किया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम का कहना है कि वह गांव में पिछले 15 दिनों से एंटी लार्वा का स्प्रे कर रहा है। टीम का दावा है कि अभी तक गांव में एक भी केस डेंगू पॉजीटिव नहीं है। ग्रामीण पेपर कार्ड से किए हुए टेस्ट को दिखा रहे हैं जोकि सही नहीं है।
नहीं थम रही निजी अस्पतालों की लूट
जिले में निजी अस्पताल रोगियों को डेंगू पॉजीटिव घोषित कर रहा है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग उसे सिरे से नकार रहा है। दरअसल निजी अस्पताल पेपर कार्ड से टेस्ट करते हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग इसे नहीं मानता। स्वास्थ्य विभाग के आदेश के बावजूद यह अस्पताल मरीजों को डेंगू पीड़ित घोषित कर उनसे पैसे वसूलने से बाज नहीं आ रहे हैं। ध्यान रहे कि निजी अस्पताल में डेंगू का टेस्ट 600-700 रुपये में होता है, जबकि सरकारी अस्पताल में यह निशुल्क किया जाता है।
नहीं होती थानों में सफाई
पुलिस महकमे में डेंगू के मामले सामने आने का मुख्य कारण थानों में सफाई नहीं होना है। बता दें कि थानों में कूलर लगे हुए हैं लेकिन इनकी समय पर सफाई नहीं हो पाती है और यहां डेंगू का लार्वा पनप सकता है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि थानों में जाकर जांच की जाएगी, आखिर डेंगू कहां से फैल रहा है। सिटी के बाद अब दूसरे थानों के कर्मचारी भी डरे हुए हैं।
वर्जन
टीम डेंगू से लोगों को बचाने के लिए दिन रात प्रयासरत है। लोगों में जागरूकता की कमी के कारण इस तरह की भ्रामक स्थिति बनाई जा रही है, जबकि जिले में डेंगू नियंत्रण में है। सिटी थाने में पुलिस कर्मियों के बारे में हमें जानकारी नहीं है। हां पहला डेंगू का पॉजीटिव मरीज राजबीर जरूर पुलिस कर्मी था। गांव चिड़ाव में एक भी मरीज डेंगू से पॉजीटिव नहीं पाया गया है। अभी तक केवल 9 ही केस पॉजीटिव पाए गए हैं।
सरोज बाला, डिप्टी सीएमओ, करनाल।