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दो साल में सेक्टर 37 होगा विकसित, लगेंगे बड़े उद्योग
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट कारपोरेशन (एचएसआईआईडीसी) कोरोना के बाद अब उद्यमियों तक पहुंचकर राज्य के औद्योगिक विकास को नई दिशा देने की तैयारी में है। एचएसआईआईडीसी के एचओडी (ई) एवं मुख्य समन्वयक (उद्योग) सुनील शर्मा ने बताया कि सोनीपत के खरखोंदा में मारुति ने अप्लीकेशन दे दी है, उसे 900 एकड़ जमीन के दो प्लॉट दिए जाएंगे। ये 2664 करोड़ रुपये की प्लॉट बिक्री हरियाणा की अब तक की सबसे बड़ी बिक्री है। इसमें दस प्रतिशत जमा कर दिया है। शेष कार्यवाही 45 दिन में पूरी करेंगे।
उन्होंने बताया कि पानीपत में भी आदित्य विक्रम बिरला समूह को पेंट प्लांट के लिए भूमि दे दी गई है। इसी तरह करनाल के सेक्टर 37 में भी इंडस्ट्रियल एरिया विकसित की जा रही है, यह क्षेत्र दो साल के अंदर तैयार हो जाएगा, जिससे लोग यहां उद्योग लगा सकेंगे। इसमें जनरल इंडस्ट्री लगाई जाएंगी जो प्रदूषण मुक्त होंगी।
शहर के एक निजी होटल में आयोजित सेमिनार में एचएसआईआईडीसी के प्रधान मनोज अरोड़ा, वरिष्ठ उप प्रधान कृष्ण लाल सिंगला, कायमा के प्रधान रविंद्र ढल, महासचिव भावुक मेहता आदि ने एचओडी का स्वागत किया। अन्य उद्यमियों ने सेमिनार संयोजक एचएसआईआईडीसी के अतिरिक्त महाप्रबंधक वनीत भाटिया, प्रबंधक (उद्योग) राजेश कुमार का स्वागत किया। मनोज अरोड़ा ने उद्यमियों की समस्याएं रखीं। जिसमें सीएम घोषणानुसार मेंटीनेंस चार्ज खत्म करने, चार दशक पुराने सीवरेज को बदलने, एसएसआईआईडीसी व फायर में मैप को लेकर समानता हो, पीसीसी भवन बनने पर ही मिले, चहारदीवारी बनाने, ऑग्मेंटेशन चार्ज सरकार द्वारा तय रेट पर लिए जाने आदि शामिल रहे। मौके पर आरएल शर्मा, सोम सचदेवा, रमेश अनेजा, योगेश भूगड़ा, सुशील जैन, रवि बेरी, मुरारी बत्रा, अनिरुद्ध कालड़ा, राज बजाज, प्रवीन गुलाटी, संजीव मेहता आदि कई उद्योगपति मौजूद रहे।
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एक हजार करोड़ होेेंगे खर्च
करनाल के औद्योगिक विकास पर एक हजार करोड़ खर्च करने की बात कहते हुए एचओडी सुनील शर्मा ने कहा कि नई उद्योग नीति आने वाली है, जिसमें नए तरीके से मानक तय होंगे, समस्याओं का समाधान हो जाएगा। एक जिला-एक उत्पाद पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। करनाल में शीघ्र बड़ी इंडस्ट्री लाने का प्रयास किया जा रहा है। वह उद्योगपतियों और सरकार के बीच सेतु का काम कर रहे हैं। सात साल में आवंटन को पूरी तरह बंद करके पारदर्शी ऑनलाइन नीलामी को अपनाते हुए करीब 1500 करोड़ के प्लॉट बेच चुके हैं। फार्मा व कपड़ा इंडस्ट्रीज को भी बढ़ाया जाएगा।
रक्षा उपकरण बनाने की दिशा में करें काम
एचएसआईआईडीसी के सेमिनार में पहुंचे लघु उद्योग भारती के करनाल, पानीपत, कुरुक्षेत्र व कैथल के विभागाध्यक्ष प्रवीन गुलाटी ने उद्यमियों का आह्वान किया कि वे अपने राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए ऐसे रक्षा उपकरणों के निर्माण की ओर कदम बढ़ाएं, जिनका देश को विदेशों से आयात करना पड़ता है। प्रवीन गुलाटी ने उद्यमियों को देश की चिंता से अवगत कराते हुए कोरोना काल का उदाहरण दिया कि चीन से आने वाली सेमी कंडक्टर चिप न मिलने से वाहनों की बिक्री रुकी रही। देश कई रक्षा उपकरण आयात करता है, यदि कभी ऐसा होता है कि जिस देश से रक्षा उपकरण आयात होते हैं, उसी देश से बात बिगड़ती है तो रक्षा उपकरणों के पार्ट्स कहां से आएंगे। सरकार अपने उद्यमियों से ये अपेक्षा करती है कि वह रक्षा उपकरणों की आत्मनिर्भरता के लिए काम करें।
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करनाल। हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट कारपोरेशन (एचएसआईआईडीसी) कोरोना के बाद अब उद्यमियों तक पहुंचकर राज्य के औद्योगिक विकास को नई दिशा देने की तैयारी में है। एचएसआईआईडीसी के एचओडी (ई) एवं मुख्य समन्वयक (उद्योग) सुनील शर्मा ने बताया कि सोनीपत के खरखोंदा में मारुति ने अप्लीकेशन दे दी है, उसे 900 एकड़ जमीन के दो प्लॉट दिए जाएंगे। ये 2664 करोड़ रुपये की प्लॉट बिक्री हरियाणा की अब तक की सबसे बड़ी बिक्री है। इसमें दस प्रतिशत जमा कर दिया है। शेष कार्यवाही 45 दिन में पूरी करेंगे।
उन्होंने बताया कि पानीपत में भी आदित्य विक्रम बिरला समूह को पेंट प्लांट के लिए भूमि दे दी गई है। इसी तरह करनाल के सेक्टर 37 में भी इंडस्ट्रियल एरिया विकसित की जा रही है, यह क्षेत्र दो साल के अंदर तैयार हो जाएगा, जिससे लोग यहां उद्योग लगा सकेंगे। इसमें जनरल इंडस्ट्री लगाई जाएंगी जो प्रदूषण मुक्त होंगी।
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शहर के एक निजी होटल में आयोजित सेमिनार में एचएसआईआईडीसी के प्रधान मनोज अरोड़ा, वरिष्ठ उप प्रधान कृष्ण लाल सिंगला, कायमा के प्रधान रविंद्र ढल, महासचिव भावुक मेहता आदि ने एचओडी का स्वागत किया। अन्य उद्यमियों ने सेमिनार संयोजक एचएसआईआईडीसी के अतिरिक्त महाप्रबंधक वनीत भाटिया, प्रबंधक (उद्योग) राजेश कुमार का स्वागत किया। मनोज अरोड़ा ने उद्यमियों की समस्याएं रखीं। जिसमें सीएम घोषणानुसार मेंटीनेंस चार्ज खत्म करने, चार दशक पुराने सीवरेज को बदलने, एसएसआईआईडीसी व फायर में मैप को लेकर समानता हो, पीसीसी भवन बनने पर ही मिले, चहारदीवारी बनाने, ऑग्मेंटेशन चार्ज सरकार द्वारा तय रेट पर लिए जाने आदि शामिल रहे। मौके पर आरएल शर्मा, सोम सचदेवा, रमेश अनेजा, योगेश भूगड़ा, सुशील जैन, रवि बेरी, मुरारी बत्रा, अनिरुद्ध कालड़ा, राज बजाज, प्रवीन गुलाटी, संजीव मेहता आदि कई उद्योगपति मौजूद रहे।
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एक हजार करोड़ होेेंगे खर्च
करनाल के औद्योगिक विकास पर एक हजार करोड़ खर्च करने की बात कहते हुए एचओडी सुनील शर्मा ने कहा कि नई उद्योग नीति आने वाली है, जिसमें नए तरीके से मानक तय होंगे, समस्याओं का समाधान हो जाएगा। एक जिला-एक उत्पाद पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। करनाल में शीघ्र बड़ी इंडस्ट्री लाने का प्रयास किया जा रहा है। वह उद्योगपतियों और सरकार के बीच सेतु का काम कर रहे हैं। सात साल में आवंटन को पूरी तरह बंद करके पारदर्शी ऑनलाइन नीलामी को अपनाते हुए करीब 1500 करोड़ के प्लॉट बेच चुके हैं। फार्मा व कपड़ा इंडस्ट्रीज को भी बढ़ाया जाएगा।
रक्षा उपकरण बनाने की दिशा में करें काम
एचएसआईआईडीसी के सेमिनार में पहुंचे लघु उद्योग भारती के करनाल, पानीपत, कुरुक्षेत्र व कैथल के विभागाध्यक्ष प्रवीन गुलाटी ने उद्यमियों का आह्वान किया कि वे अपने राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए ऐसे रक्षा उपकरणों के निर्माण की ओर कदम बढ़ाएं, जिनका देश को विदेशों से आयात करना पड़ता है। प्रवीन गुलाटी ने उद्यमियों को देश की चिंता से अवगत कराते हुए कोरोना काल का उदाहरण दिया कि चीन से आने वाली सेमी कंडक्टर चिप न मिलने से वाहनों की बिक्री रुकी रही। देश कई रक्षा उपकरण आयात करता है, यदि कभी ऐसा होता है कि जिस देश से रक्षा उपकरण आयात होते हैं, उसी देश से बात बिगड़ती है तो रक्षा उपकरणों के पार्ट्स कहां से आएंगे। सरकार अपने उद्यमियों से ये अपेक्षा करती है कि वह रक्षा उपकरणों की आत्मनिर्भरता के लिए काम करें।