शमशान भूमि के लिए ग्रामीणों ने छोड़ा गांव, बीडीपीओ कार्यालय में डाला डेरा
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श्मशान भूमि के लिए पीर बड़ौली के ग्रामीणों ने गांव छोड़कर बीडीपीओ कार्यालय पर डेरा डाल दिया। पूर्व घोषित ऐलान पर अमल करते हुए ग्रामीणों ने अपनी जरूरत का सामान ट्रैक्टर-ट्रालियों में लाद लिया और अपने घरों पर ताला जड़ कर शहर की ओर कूच किया। गांव छोड़ते समय ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार व प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। दोपहर एक बजे गांव से निकले ग्रामीण पैदल मार्च करते हुए करीब तीन बजे बीडीपीओ कार्यालय पहुंचे और वहीं डेरा जमा लिया। शाम चार बजे से आठ बजे तक प्रशासन ग्रामीणों से वापस गांव जाने की अपील करता रहा, लेकिन ग्रामीण समाधान पर अड़े रहे। आखिरकार एसडीएम योगेश कुमार ने लिखित में 15 दिन में समस्या के समाधान के बाद ग्रामीण रात साढ़े आठ बजे धरने से उठकर अपने गांव के लिए चल पड़े।
बीते शनिवार को गांव में श्मशान भूमि के मुद्दे पर बुलाई गई महापंचायत में ग्रामीणों ने सामूहिक रूप गांव छोड़ने का ऐलान किया था। ग्रामीणों के ऐलान के बावजूद प्रशासन की ओर से पलायन को रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। पूर्व सरपंच मेहर सिंह, पूर्व सरपंच गोबिंद, बलजीत सिंह, राजकुमार, विनोद, बदलू, रामप्रसाद व अन्य ने आरोप लगाया कि सरकार उनकी मांग के प्रति गंभीर नहीं है, इसलिए उनके पास गांव छोड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।
सरकार की निकाली शव यात्रा
शमशान भूमि की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने सरकार की शव यात्रा निकाली। प्रदर्शनकारियों ने करीब 30 फुट लंबी अर्थी तैयार की और हाइवे से शव यात्रा निकालते हुए बीडीपीओ कार्यालय में दाखिल हुए। बीडीपीओ दफ्तर पहुंचे ग्रामीण महिला पुरुषों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीण सतबीर, बलवान, प्रेम सिंह, बदलू, रामकुमार, सुनीता, पिंकी, बबली, भगीरथी, परमेश्वरी, मीना, सीमा, अंजू , माया व अन्य ने आरोप लगाया कि वे बीते 28 वर्षों से शमशान के लिए भूमि दिए जाने की मांग कर रहे हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जाती। बीडीपीओ राजेश शर्मा व थाना प्रभारी राजबीर सिंह ने ग्रामीणों का समझाने का प्रयास किया लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे।
आप भी हुई प्रदर्शन में शामिल
ग्रामीणों की मांग का समर्थन कर रहे आप सदस्य गांव पहुंचे और ग्रामीणों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुए। आप कार्यकर्ताओं ने बीडीपीओ कार्यालय का घेराव कर प्रशासन व सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। आप जिला अध्यक्ष अनूप संधू, लोकसभा प्रभारी अमित प्रोचा , हलका प्रभारी जेपी शेखपुरा, रामपाल, राजेश, जिले सिंह, बलबीर, शोयब आलम, प्रेम सिंह, श्याम लाल, रोहित, संदीप, रजनीश, पिंकी, प्रिया शर्मा व अन्य ने आरोप लगाया कि वर्षों से पीर बड़ौली के ग्रामीण श्मशान भूमि की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रदेश सरकार ग्रामीणों की मांग के प्रति गंभीर नहीं है।
बीडीपीओ कार्यालय के बाहर ही बनाया खाना
ग्रामीण बीडीपीओ कार्यालय में लगभग तीन बजे अपना डेरा डाल चुके थे, लेकिन बात न बनती देख महिलाओं ने बीडीपीओ कार्यालय के बाहर ही चूल्हा जलाया और खाना पकाना शुरू कर दिया। कोई सब्जी बनाने में व्यस्त था तो कोई रोटियां सेकने में। एक तरफ महिलाएं खाना बनाने में व्यस्त थी तो दूसरी ओर अधिकारी ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे।
क्या है मामला
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे पूर्व सरपंच गोविंद व मेहर सिंह ने बताया कि पूर्व उपप्रधानमंत्री स्वर्गीय देवी लाल ने उनके गांव पीर बड़ौली को 28 वर्ष पूर्व बसाया था। इससे पूर्व उनका गांव बड़ौली जिले के अंदर आता था और गांव के ही कुछ लोग पानीपत से पीर बाबा की मजार को लेकर यहां लेकर आए थे। जिसके नाम पर इसका गांव का पीर बड़ौली पड़ गया। ग्रामीणों को बसाने के लिए गांव में कोई जगह नहीं थी। जिसको लेकर गांव सदरपूर से करीब 18 एकड़ जमीन लेकर ग्रामीणों को दी थी। इस जमीन पर गांव तो बस गया, लेकिन शमशान घाट के लिए जमीन नहीं मिली।
अगर गांव में किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो करीब छह किलोमीटर के सफर को तय करने के यमुना किनारे दाह संस्कार के नाम से ही ग्रामीणों की सांसे फूल जाती है। गांव में श्मशान घाट के लिए कोई जगह नहीं है और यह समस्या पिछले 28 वर्षों से चली आ रही है। इतना ही नही, जब सायं काल के दौरान किसी की मौत हो जाती है तो शव को घर में ही रखना पड़ता है।
प्रशासन ने मांगा समय, ग्रामीण अड़े
एसडीएम योगेश कुमार ने ग्रामीणों की समस्या का समाधान करने के लिए पहले दस दिन का समय मांगा, लेकिन ग्रामीण मौके पर ही समाधान की मांग पर अड़े थे। कई घंटों तक समझाने के बाद एसडीएम ने ग्रामीणों से सोमवार सुबह 11 बजे तक का समय मांगा, लेकिन ग्रामीण तुरंत ही समस्या के समाधान पर अड़े थे। रात सवा आठ बजे एसडीएम ने लिखित में ग्रामीणों को दिया कि वे इस दौरान उन्हें 15 दिन में शमशान के लिए भूमि दिलाएंगे। इसके ही ग्रामीण धरने से उठे। एसडीएम ने बताया कि 15 दिन में समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।