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गरीबों को खिला रहे सड़े गेहूं का आटा
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पौष्टिक तत्वों से युक्त फोर्टीफाइड आटा कहकर गरीबों को सड़े हुये गेहूं का आटा दिया जा रहा है। कम से कम वायरल हो रही वीडियो तो यही कहानी बयां कर रही है। मामला सामने आने के बाद हैफेड और डीएफएससी की ओर से जांच और कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया है।
सरकार द्वारा पहले राशन कार्ड धारकों को गेहूं दिया जाता था लेकिन अब राशन कार्ड धारकों को फोर्टीफाइड आटा दिया जाता है। अक्सर उपभोक्ता आटे की शिकायत करते हैं, लेकिन विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती। उनकी शिकायत को दबा दिया जाता है। अब वायरल हो रहे एक वीडियो ने इसकी पोल खोल दी है। इसमें दिखाया गया है कि किस तरह से नीलोखेड़ी स्थित गुरु कृपा एग्रो फूड्स मिल में सड़े हुए गेहूं का आटा पीसा जा रहा है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि यह वीडियो कितनी पुरानी है। इस संबंध में हैफेड और डीएफएससी अधिकारी का कहना है कि इस मामले की जांच कराई जायेगी। वहीं दूसरी ओर नीलोखेड़ी स्थित गुरु कृपा एग्रो फूड्स मिल मालिक का कहना है कि उसके मिल में गेहूं डीएफएससी विभाग द्वारा आता है, वह तो आटे की पिसाई करता है। मिल मालिक ने वीडियो के बारे में कहा कि यह वीडियो उसके मिल की नहीं है।
वीडियो देख ली गई है। इस मामले की जांच की जायेगी। गेहूं की पिसाई के दौरान एक सरकारी कर्मचारी मिल में तैनात होता है। आटा मिल को गेहूं देने का कार्य हैफेड का होता है।
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-सुरेश कुमार, हैफेड डीएम करनाल।
आटे की क्वालिटी और क्वांटिटी की जिम्मेदारी हैफेड की होती है। हैफेड ही इस मामले की जांच करेगा।
निशांत राठी, डीएफएससी, करनाल
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सरकार द्वारा पहले राशन कार्ड धारकों को गेहूं दिया जाता था लेकिन अब राशन कार्ड धारकों को फोर्टीफाइड आटा दिया जाता है। अक्सर उपभोक्ता आटे की शिकायत करते हैं, लेकिन विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती। उनकी शिकायत को दबा दिया जाता है। अब वायरल हो रहे एक वीडियो ने इसकी पोल खोल दी है। इसमें दिखाया गया है कि किस तरह से नीलोखेड़ी स्थित गुरु कृपा एग्रो फूड्स मिल में सड़े हुए गेहूं का आटा पीसा जा रहा है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि यह वीडियो कितनी पुरानी है। इस संबंध में हैफेड और डीएफएससी अधिकारी का कहना है कि इस मामले की जांच कराई जायेगी। वहीं दूसरी ओर नीलोखेड़ी स्थित गुरु कृपा एग्रो फूड्स मिल मालिक का कहना है कि उसके मिल में गेहूं डीएफएससी विभाग द्वारा आता है, वह तो आटे की पिसाई करता है। मिल मालिक ने वीडियो के बारे में कहा कि यह वीडियो उसके मिल की नहीं है।
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वीडियो देख ली गई है। इस मामले की जांच की जायेगी। गेहूं की पिसाई के दौरान एक सरकारी कर्मचारी मिल में तैनात होता है। आटा मिल को गेहूं देने का कार्य हैफेड का होता है।
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-सुरेश कुमार, हैफेड डीएम करनाल।
आटे की क्वालिटी और क्वांटिटी की जिम्मेदारी हैफेड की होती है। हैफेड ही इस मामले की जांच करेगा।
निशांत राठी, डीएफएससी, करनाल