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Karnal News: फैक्ट्री के कमरे की छत गिरी, चार किशोर घायल
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संवाद न्यूज एजेंसीघरौंडा। कोहंड गांव में खाली पड़ी फैक्ट्री में बने कमरे की छत गिर गई। जिससे वह
संवाद न्यूज एजेंसी
घरौंडा। कोहंड गांव में खाली पड़ी फैक्ट्री में बने कमरे की छत गिर गई। जिससे वहां सो रहे चार किशोर मलबे में दबकर घायल हो गए। तीन किशोरों की हालत गंभीर होने पर कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
हादसा मंगलवार रात करीब 11 बजे हुआ। बताया जाता है कि जिस समय छत गिरी उस समय इन कमरे के नीचे सुधीर, काजल, मोहिनी व आदित्य थे, चारों मलबे में दब गए। मजदूरों ने दौड़कर अपने बच्चों को बचाने का प्रयास किया और छत के ऊपर से मलवा हटाकर चारों किशोरों को बाहर निकाल लिया और तुरंत मामले की सूचना डायल 112 पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और चारों बच्चों को घायल अवस्था में घरौंडा के सरकारी अस्पताल में लाया गया। जहां सुधीर को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे गई और तीन किशोरों को कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
कमरों में रह रहे प्रवासी मजदूरों ने बताया कि कमरे काफी पुराने और जर्जर अवस्था में हैं। छत जगह-जगह से टूटी पड़ी है। छत के नीचे सरिये बाहर निकले हैं, लेकिन गरीबी के चलते उन्हें इन्हीं कमरों में गुजर बसर करनी पड़ रही है। कमरे के एक हिस्से की छत अचानक नीचे गिर जाने के बाद सभी डर के मारे बाहर आ गए और पूरी रात बाहर बैठकर गुजारनी पड़ी।
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घरौंडा। कोहंड गांव में खाली पड़ी फैक्ट्री में बने कमरे की छत गिर गई। जिससे वहां सो रहे चार किशोर मलबे में दबकर घायल हो गए। तीन किशोरों की हालत गंभीर होने पर कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
हादसा मंगलवार रात करीब 11 बजे हुआ। बताया जाता है कि जिस समय छत गिरी उस समय इन कमरे के नीचे सुधीर, काजल, मोहिनी व आदित्य थे, चारों मलबे में दब गए। मजदूरों ने दौड़कर अपने बच्चों को बचाने का प्रयास किया और छत के ऊपर से मलवा हटाकर चारों किशोरों को बाहर निकाल लिया और तुरंत मामले की सूचना डायल 112 पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और चारों बच्चों को घायल अवस्था में घरौंडा के सरकारी अस्पताल में लाया गया। जहां सुधीर को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे गई और तीन किशोरों को कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
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कमरों में रह रहे प्रवासी मजदूरों ने बताया कि कमरे काफी पुराने और जर्जर अवस्था में हैं। छत जगह-जगह से टूटी पड़ी है। छत के नीचे सरिये बाहर निकले हैं, लेकिन गरीबी के चलते उन्हें इन्हीं कमरों में गुजर बसर करनी पड़ रही है। कमरे के एक हिस्से की छत अचानक नीचे गिर जाने के बाद सभी डर के मारे बाहर आ गए और पूरी रात बाहर बैठकर गुजारनी पड़ी।
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