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नहीं चलेगी धांधली, फसलों का होगा मौके पर सत्यापन
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पर हो रहे फसल पंजीकरण पर उठो सवालों के बाद हरियाणा सरकार ने जमीन के सत्यापन कराने का फैसला कर लिया है। जिसके तहत अब खेतों पर जाकर किस भूमि पर कौन सी फसल, कितने रकबे में लगाई गई है, इसका स्थलीय सत्यापन (क्राप मैपिंग) शुरू करा दिया है। इसके लिए कृषि विभाग की ओर से कर्मचारियों की ड्यूटियां लगाई गई है। जिले के सभी 435 गांवों की जमीन का सत्यापन कराया जाएगा।
हरियाणा सरकार के मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर धान आदि एमएसपी पर खरीदी जाने वाली फसलों का पंजीकरण कराया जा रहा है। पिछले कुछ दिन पहले सीमांत राज्यों के किसानों के लिए भी पोर्टल पर पंजीकरण खोल दिया गया है। लेकिन पंजीकरण प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। करनाल के भी भाजपा नेता व कुंजपुरा मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन ईलम सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि पोर्टल में कहीं भी प्रजाति लिखने का कालम नहीं है इस कारण किसानों की ओर से बासमती व अन्य नॉन एमएसपी प्रजातियों के धान के रकबे का भी पंजीकरण करा दिया है। यहां तक कहा गया कि जमीन के उस रकबे का भी पंजीकरण धान के रूप में कराया गया गया, जिनमें गन्ना या फिर अन्य फसलें हैं। इसके बहाने एमएसपी पर बाहर से सस्ता धान खरीदकर बेचे जाने का बड़ा खेल हो सकता है। सरकार ने इसका संज्ञान ले लिया है और अब पोर्टल पर पंजीकृत जमीन का स्थलीय सत्यापन कराने के आदेश जारी कर दिए हैं। कृषि विभाग के एसओ राम निवास ने बताया कि पोर्टल पर फर्जी पंजीकरण रोकने के लिए सरकार ने जमीन का स्थलीय सत्यापन करने का आदेश दिया है। जिसके तहत भूमि का प्रत्येक एकड़ का सत्यापन होगा। इसमें यह भी देखा जाएगा कि कितनी जमीन पर कृषि कार्य हो रहा है, कितने हिस्से में कौन सी फसल लगाई गई है। कितनी जमीन पर व्यावसायिक कार्य हो रहा है, कितनी जमीन आवासीय कार्य में उपयोग की गई है। क्राप मैपिंग शुरू होते ही, उन लोगों में खलबली मच गई हैं, जिन्होंने फर्जी तरीके से फसल का पंजीकरण करा रखा है।
कृषि का वास्तविक रकबा देखना मुख्य उद्देश्य
अक्सर किसी किसान के नाम जमीन तो पूरी दर्ज होती है, लेकिन कई ने उसमें पोल्ट्री फार्म या फिर दुकान आदि बना ली है। कई ने आवास या फार्म हाउस बना लिए हैं। ट्यूबवेल कोठरी बना ली है लेकिन पूरे रकबे का पंजीकरण करा दिया जाता है। क्राप मैपिंग का मुख्य उद्देश्य यह देखना है कि आखिर वास्तव में कितने रकबे पर कृषि कार्य हो रहा है।
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पंचायत सचिवों का सत्यापन से इनकार, अब 260 कर्मी कर रहे क्राप मैपिंग
क्राप मैपिंग के कार्य को पहले ग्राम पंचायत सचिवों को ही दिया गया था लेकिन सचिवों ने कार्य की अधिकता बताकर क्राप मैपिंग करने से इनकार कर दिया है। इसके बाद इस कार्य में कृषि विभाग के 140, बागवानी के 22, सिंचाई विभाग के 25, मार्केटिंग बोर्ड के 40 सहित कुल 260 कर्मचारियों की ड्यूटियां लगाई गई है। इधर, क्राप मैपिंग में ड्यूटी लगते ही कई कर्मचारियों ने अपनी ड्यूटी कटवाने या फिर बदलवाने के लिए उपनिदेशक (कृषि) के कार्यालय के चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैं।
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करनाल। मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पर हो रहे फसल पंजीकरण पर उठो सवालों के बाद हरियाणा सरकार ने जमीन के सत्यापन कराने का फैसला कर लिया है। जिसके तहत अब खेतों पर जाकर किस भूमि पर कौन सी फसल, कितने रकबे में लगाई गई है, इसका स्थलीय सत्यापन (क्राप मैपिंग) शुरू करा दिया है। इसके लिए कृषि विभाग की ओर से कर्मचारियों की ड्यूटियां लगाई गई है। जिले के सभी 435 गांवों की जमीन का सत्यापन कराया जाएगा।
हरियाणा सरकार के मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर धान आदि एमएसपी पर खरीदी जाने वाली फसलों का पंजीकरण कराया जा रहा है। पिछले कुछ दिन पहले सीमांत राज्यों के किसानों के लिए भी पोर्टल पर पंजीकरण खोल दिया गया है। लेकिन पंजीकरण प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। करनाल के भी भाजपा नेता व कुंजपुरा मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन ईलम सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि पोर्टल में कहीं भी प्रजाति लिखने का कालम नहीं है इस कारण किसानों की ओर से बासमती व अन्य नॉन एमएसपी प्रजातियों के धान के रकबे का भी पंजीकरण करा दिया है। यहां तक कहा गया कि जमीन के उस रकबे का भी पंजीकरण धान के रूप में कराया गया गया, जिनमें गन्ना या फिर अन्य फसलें हैं। इसके बहाने एमएसपी पर बाहर से सस्ता धान खरीदकर बेचे जाने का बड़ा खेल हो सकता है। सरकार ने इसका संज्ञान ले लिया है और अब पोर्टल पर पंजीकृत जमीन का स्थलीय सत्यापन कराने के आदेश जारी कर दिए हैं। कृषि विभाग के एसओ राम निवास ने बताया कि पोर्टल पर फर्जी पंजीकरण रोकने के लिए सरकार ने जमीन का स्थलीय सत्यापन करने का आदेश दिया है। जिसके तहत भूमि का प्रत्येक एकड़ का सत्यापन होगा। इसमें यह भी देखा जाएगा कि कितनी जमीन पर कृषि कार्य हो रहा है, कितने हिस्से में कौन सी फसल लगाई गई है। कितनी जमीन पर व्यावसायिक कार्य हो रहा है, कितनी जमीन आवासीय कार्य में उपयोग की गई है। क्राप मैपिंग शुरू होते ही, उन लोगों में खलबली मच गई हैं, जिन्होंने फर्जी तरीके से फसल का पंजीकरण करा रखा है।
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कृषि का वास्तविक रकबा देखना मुख्य उद्देश्य
अक्सर किसी किसान के नाम जमीन तो पूरी दर्ज होती है, लेकिन कई ने उसमें पोल्ट्री फार्म या फिर दुकान आदि बना ली है। कई ने आवास या फार्म हाउस बना लिए हैं। ट्यूबवेल कोठरी बना ली है लेकिन पूरे रकबे का पंजीकरण करा दिया जाता है। क्राप मैपिंग का मुख्य उद्देश्य यह देखना है कि आखिर वास्तव में कितने रकबे पर कृषि कार्य हो रहा है।
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पंचायत सचिवों का सत्यापन से इनकार, अब 260 कर्मी कर रहे क्राप मैपिंग
क्राप मैपिंग के कार्य को पहले ग्राम पंचायत सचिवों को ही दिया गया था लेकिन सचिवों ने कार्य की अधिकता बताकर क्राप मैपिंग करने से इनकार कर दिया है। इसके बाद इस कार्य में कृषि विभाग के 140, बागवानी के 22, सिंचाई विभाग के 25, मार्केटिंग बोर्ड के 40 सहित कुल 260 कर्मचारियों की ड्यूटियां लगाई गई है। इधर, क्राप मैपिंग में ड्यूटी लगते ही कई कर्मचारियों ने अपनी ड्यूटी कटवाने या फिर बदलवाने के लिए उपनिदेशक (कृषि) के कार्यालय के चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैं।