{"_id":"5eea80208ebc3e433e4cb627","slug":"raging-against-china-karnal-news-knl34434826","type":"story","status":"publish","title_hn":"चीन के िखलाफ भड़के ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चीन के िखलाफ भड़के
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देश की सीमा पर भारतीय जवानों के शहीद होने पर चीन के खिलाफ पूर्व सैनिकों में उबाल आ गया है। उन्हाेंने चेतावनी दी है कि वह 1962 के भारत को भूल जाए। क्योंकि अब उसे धूल चटा देेंगे।
पूर्व सैनिक संगठन राष्ट्रीय सैनिक संघ (मोदी सैन्य संगठन) के अध्यक्ष आरएस चौहान ने कहा कि वर्तमान संदर्भ में 1947 से 2020 तक अब भारतीय सेनाएं दुनिया की किसी भी सेना को टक्कर देने में सक्षम हैं। हमारे सुप्रीम कमांडर देशभक्त हैं। प्रधानमंत्री ने चीएफ ऑफ डिफेंस सर्विस बनाने का सबसे सूझबूझ वाला काम किया। इससे सेनाओं का किसी भी युद्ध के लिए तालमेल मजबूत हुआ है। आज हमारे पास आधुनिक हथियार हैं। हमारी सेनाएं आज जितनी सशक्त हैं पहले नहीं थी। यदि चीन व पाकिस्तान एक साथ भी युद्ध कर लें तो भी दोनों सीमाओं पर भारत इन्हें धूल चटा देगा। पाकिस्तान हमारे सामने 24 घंटे भी नहीं टिक सकता।
1962 में करनाल के 11 जवानों ने दी थी कुर्बानी
भारत-चीन के बीच युद्ध में 21 नवंबर 1962 को करनाल जनपद के खेड़ी सर्फअली गांव के 11 जवान एक ही दिन में शहीद हो गए थे। भारत माता की रक्षा करते हुए उन्होंने चीनी सैनिकों से लोहा लिया और वतन की खातिर कुर्बानी दी। पूर्व सैनिक कहते हैं कि 1962 में भी हिंदी-चीनी भाई-भाई का राग अलापा गया था लेकिन चीन ने पीठ में छुरा घोंपने का काम किया। चौहान ने कहा कि 1962 में भारतीय सेना पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाई थी। सेना के पास हथियार नहीं थे लेकिन अब हालात बदल गए हैं।
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पूर्व सैनिक संगठन राष्ट्रीय सैनिक संघ (मोदी सैन्य संगठन) के अध्यक्ष आरएस चौहान ने कहा कि वर्तमान संदर्भ में 1947 से 2020 तक अब भारतीय सेनाएं दुनिया की किसी भी सेना को टक्कर देने में सक्षम हैं। हमारे सुप्रीम कमांडर देशभक्त हैं। प्रधानमंत्री ने चीएफ ऑफ डिफेंस सर्विस बनाने का सबसे सूझबूझ वाला काम किया। इससे सेनाओं का किसी भी युद्ध के लिए तालमेल मजबूत हुआ है। आज हमारे पास आधुनिक हथियार हैं। हमारी सेनाएं आज जितनी सशक्त हैं पहले नहीं थी। यदि चीन व पाकिस्तान एक साथ भी युद्ध कर लें तो भी दोनों सीमाओं पर भारत इन्हें धूल चटा देगा। पाकिस्तान हमारे सामने 24 घंटे भी नहीं टिक सकता।
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1962 में करनाल के 11 जवानों ने दी थी कुर्बानी
भारत-चीन के बीच युद्ध में 21 नवंबर 1962 को करनाल जनपद के खेड़ी सर्फअली गांव के 11 जवान एक ही दिन में शहीद हो गए थे। भारत माता की रक्षा करते हुए उन्होंने चीनी सैनिकों से लोहा लिया और वतन की खातिर कुर्बानी दी। पूर्व सैनिक कहते हैं कि 1962 में भी हिंदी-चीनी भाई-भाई का राग अलापा गया था लेकिन चीन ने पीठ में छुरा घोंपने का काम किया। चौहान ने कहा कि 1962 में भारतीय सेना पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाई थी। सेना के पास हथियार नहीं थे लेकिन अब हालात बदल गए हैं।
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