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Karnal News: महिला उद्यमियों के उत्पादों को डेयरी मेले में मिलेंगे स्टॉल, बाजार और निर्यात से जुड़ेंगी
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एनडीआरआई में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं के साथ अतिथि।
करनाल। महिला किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) ने पहल की है। संस्थान के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने महिला उद्यमियों को आगामी डेरी मेले में उनके मूल्यवर्धित दुग्ध उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए विशेष स्टॉल उपलब्ध कराने की व्यवस्था का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता, स्वच्छता, वैज्ञानिक प्रसंस्करण, आकर्षक पैकेजिंग और प्रभावी विपणन से महिलाएं अपने उत्पादों की पहचान बढ़ाने के साथ आय और रोजगार के अवसर भी बढ़ा सकती हैं।
एनडीआरआई के कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से बुधवार को महिला किसान दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में करीब 188 महिला किसानों, किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिला उद्यमियों ने भाग लिया।
तकनीकी सत्र में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), चंडीगढ़ के विशेषज्ञ वेदांत परासर ने कृषि और खाद्य उत्पादों के मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता मानकों, स्वच्छता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात की संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्पादों को बाजार के अनुरूप तैयार करना, निर्धारित मानकों का पालन करना और प्रभावी बाजार संपर्क बनाना जरूरी है। इससे महिला किसान और स्वयं सहायता समूह उत्पादन तक सीमित रहने के बजाय प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और विपणन के क्षेत्र में भी आगे बढ़ सकते हैं।
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कृषि विभाग के उपनिदेशक जसविंदर सिंह ने किसानों के लिए संचालित सरकारी योजनाओं और सहायता कार्यक्रमों की जानकारी दी।
हरित अमोनिया की उपयोगिता पर होगा वैज्ञानिक मूल्यांकन
कार्यक्रम में किसानों को हरित अमोनिया की तकनीक और टिकाऊ कृषि में इसकी संभावित भूमिका से भी अवगत कराया गया। कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार सारस्वत ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद विभिन्न मृदाओं और फसल प्रणालियों में इसे वैकल्पिक नाइट्रोजन उर्वरक के रूप में परखने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रायोगिक प्रदर्शन कर रही है। इसका उद्देश्य फसल वृद्धि, उत्पादकता और सुरक्षित उपयोग पर प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना है।
एसीएमई समूह के विशेषज्ञ डॉ. रविंदर ने नवीकरणीय ऊर्जा से बनने वाले हरित अमोनिया की उत्पादन प्रक्रिया और पर्यावरणीय महत्व की जानकारी दी।
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एनडीआरआई के कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से बुधवार को महिला किसान दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में करीब 188 महिला किसानों, किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिला उद्यमियों ने भाग लिया।
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तकनीकी सत्र में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), चंडीगढ़ के विशेषज्ञ वेदांत परासर ने कृषि और खाद्य उत्पादों के मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता मानकों, स्वच्छता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात की संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्पादों को बाजार के अनुरूप तैयार करना, निर्धारित मानकों का पालन करना और प्रभावी बाजार संपर्क बनाना जरूरी है। इससे महिला किसान और स्वयं सहायता समूह उत्पादन तक सीमित रहने के बजाय प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और विपणन के क्षेत्र में भी आगे बढ़ सकते हैं।
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कृषि विभाग के उपनिदेशक जसविंदर सिंह ने किसानों के लिए संचालित सरकारी योजनाओं और सहायता कार्यक्रमों की जानकारी दी।
हरित अमोनिया की उपयोगिता पर होगा वैज्ञानिक मूल्यांकन
कार्यक्रम में किसानों को हरित अमोनिया की तकनीक और टिकाऊ कृषि में इसकी संभावित भूमिका से भी अवगत कराया गया। कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार सारस्वत ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद विभिन्न मृदाओं और फसल प्रणालियों में इसे वैकल्पिक नाइट्रोजन उर्वरक के रूप में परखने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रायोगिक प्रदर्शन कर रही है। इसका उद्देश्य फसल वृद्धि, उत्पादकता और सुरक्षित उपयोग पर प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना है।
एसीएमई समूह के विशेषज्ञ डॉ. रविंदर ने नवीकरणीय ऊर्जा से बनने वाले हरित अमोनिया की उत्पादन प्रक्रिया और पर्यावरणीय महत्व की जानकारी दी।