{"_id":"6ad14b4665c60608ba08d414","slug":"the-audience-became-emotional-after-watching-the-enactment-of-rams-exile-karnal-news-c-18-knl1018-1013560-2026-10-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: राम वनवास का मंचन देख भावुक हुए दर्शक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: राम वनवास का मंचन देख भावुक हुए दर्शक
विज्ञापन
- श्री रामायण पाठक सभा की ओर से हो रहा रामलीला का मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। रामलीला भवन में श्री रामायण पाठक सभा की ओर से आयोजित रामलीला के पांचवें दिन कलाकारों ने राम वनवास का मंचन किया। मंचन में श्रीराम के राज्याभिषेक की घोषणा से लेकर कैकेयी के दो वरदान मांगने, श्रीराम के वन गमन, राजा दशरथ के पुत्र वियोग और केवट के गंगा पार कराने तक के प्रसंगों को प्रस्तुत किया गया। इन दृश्यों को देखकर दर्शक भावुक हो गए।
मंचन में दिखाया गया कि अयोध्या में श्रीराम और माता सीता के विवाह के बाद राजा दशरथ ने श्रीराम को अयोध्या का राजा बनाने की घोषणा की। इससे पूरे नगर में खुशी की लहर दौड़ गई, लेकिन दासी मंथरा के बहकावे में आकर रानी कैकेयी के मन में संदेह पैदा हो गया। कैकेयी ने राजा दशरथ से अपने पुराने दो वरदान मांग लिए। पहले वरदान में उन्होंने भरत के लिए राजसिंहासन और दूसरे में श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा।
राजा दशरथ अपने वचन से बंधे होने के कारण अत्यंत दुखी हो गए, लेकिन श्रीराम ने पिता के वचनों की मर्यादा बनाए रखने के लिए सहर्ष वन जाने का निर्णय लिया। माता सीता और भाई लक्ष्मण भी उनके साथ वन जाने के लिए तैयार हो गए। श्रीराम की विदाई के समय माता कौशल्या का विलाप और पुत्र वियोग में राजा दशरथ के प्राण त्यागने के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। वहीं, केवट के श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को गंगा पार कराने के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भक्ति भाव से भर दिया।
विज्ञापन
रामलीला के दौरान दर्शकों के मनोरंजन के लिए हरियाणवी, पंजाबी और हिंदी गीतों पर नृत्य प्रस्तुत करने वाले कलाकारों की भी व्यवस्था की गई है। इस अवसर पर सभा के चेयरमैन रमेश गुप्ता, प्रधान पंकज गोयल, संरक्षक देशराज गुप्ता, राम किशन गुप्ता, नरेश गुप्ता, विनोद गुप्ता, मोहन लाल सैनी, हरिकिशन सैनी, ज्ञानचंद गोयल, प्रभात गोयल, मनोज गोयल, रविंद्र बंसल, अनिल गुप्ता उपस्थित रहे।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। रामलीला भवन में श्री रामायण पाठक सभा की ओर से आयोजित रामलीला के पांचवें दिन कलाकारों ने राम वनवास का मंचन किया। मंचन में श्रीराम के राज्याभिषेक की घोषणा से लेकर कैकेयी के दो वरदान मांगने, श्रीराम के वन गमन, राजा दशरथ के पुत्र वियोग और केवट के गंगा पार कराने तक के प्रसंगों को प्रस्तुत किया गया। इन दृश्यों को देखकर दर्शक भावुक हो गए।
मंचन में दिखाया गया कि अयोध्या में श्रीराम और माता सीता के विवाह के बाद राजा दशरथ ने श्रीराम को अयोध्या का राजा बनाने की घोषणा की। इससे पूरे नगर में खुशी की लहर दौड़ गई, लेकिन दासी मंथरा के बहकावे में आकर रानी कैकेयी के मन में संदेह पैदा हो गया। कैकेयी ने राजा दशरथ से अपने पुराने दो वरदान मांग लिए। पहले वरदान में उन्होंने भरत के लिए राजसिंहासन और दूसरे में श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा।
विज्ञापन
राजा दशरथ अपने वचन से बंधे होने के कारण अत्यंत दुखी हो गए, लेकिन श्रीराम ने पिता के वचनों की मर्यादा बनाए रखने के लिए सहर्ष वन जाने का निर्णय लिया। माता सीता और भाई लक्ष्मण भी उनके साथ वन जाने के लिए तैयार हो गए। श्रीराम की विदाई के समय माता कौशल्या का विलाप और पुत्र वियोग में राजा दशरथ के प्राण त्यागने के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। वहीं, केवट के श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को गंगा पार कराने के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भक्ति भाव से भर दिया।
विज्ञापन
रामलीला के दौरान दर्शकों के मनोरंजन के लिए हरियाणवी, पंजाबी और हिंदी गीतों पर नृत्य प्रस्तुत करने वाले कलाकारों की भी व्यवस्था की गई है। इस अवसर पर सभा के चेयरमैन रमेश गुप्ता, प्रधान पंकज गोयल, संरक्षक देशराज गुप्ता, राम किशन गुप्ता, नरेश गुप्ता, विनोद गुप्ता, मोहन लाल सैनी, हरिकिशन सैनी, ज्ञानचंद गोयल, प्रभात गोयल, मनोज गोयल, रविंद्र बंसल, अनिल गुप्ता उपस्थित रहे।