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प्राइवेट स्कूलों पर शिकंजा कसा
अमर उजाला करनाल
Updated Wed, 30 Apr 2014 12:27 AM IST
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शिक्षा विभाग की सिफारिश पर रोहतक आयुक्त के मंडलायुक्त ने जिले के
प्राइवेट स्कूलों पर शिकंजा कसने की कवायद शुरू कर दी है। मंगलवार को मंडल
कार्यालय से अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल करनाल पहुंचा और शिक्षा विभाग
के अधिकारियों से प्राइवेट स्कूलों की रिपोर्ट मांगी।
लंबी बैठक में हालांकि फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन प्रतिनिधिमंडल के अधिकारियों ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि जल्द ही प्राइवेट स्कूलों तक मंडलायुक्त के आदेश पहुंच जाने चाहिए। इसके चलते डीईओ ने मई के पहले हफ्ते में स्कूल संचालकों की बैठक बुलाई है।
बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुरूप सीबीएसई से संबद्ध के जिला भर के सभी 72 स्कूलों को पत्र लिख कर इस संबध में विस्तार से जानकारी मांगी गई है। मंगलवार को रोहतक मंडल के शिक्षा विभाग के एओ करनाल पहुंचे। निजी स्कूलों द्वारा बढ़ाई गई फीस के मुद्दे पर करीब दो घंटे तक विस्तार से चर्चा हुई।
शिक्षा विभाग भी अब शिक्षा नियमावली के सेक्शन 158 को लागू कराने के लिए गंभीर नजर आ रहा है। बैठक के तुरंत बाद जिलेभर के सीबीएसई के सभी 72 स्कूलों को शिक्षा विभाग की ओर से बनाया गया एक प्रोफार्मा भेजा गया है। इस प्रोफार्मा में फीस और तमाम शुल्कों के संबंध में विस्तार से जानकारी मांगी है। यह सूचना जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को दो मई तक भेजने के लिए लिखा गया है।
उसके बाद मई के पहले हफ्ते में इन स्कूलों के प्रिंसिपलों की बैठक बुलाई गई है। स्कूलों के प्रिंसिपलों को खासतौर पर बैठक में उपस्थित होने के निर्देश हैं। शिक्षा विभाग के हरकत में आते ही साफ हो गया है कि अब निजी स्कूलों में शामिल अनापशनाप फीस बढ़ाने वाले स्कूलों पर फीस कम करने की गाज गिरने की संभावना बढ़ गई है। अधिक फीस वसूलना साबित हो गया तो स्कूल प्रबंधन को यह फीस अभिभावकों को वापस भी करना पड़ सकती है।
नियम तोड़े तो होगी कार्रवाई
जिला शिक्षा अधिकारी आशा मुंजाल ने कहा कि पिछले दिनों निजी स्कूलों द्वारा अधिक फीस वसूलने के मामले ने काफी तूल पकड़ रखा था। सरकार के नॉमर्स हैं। नॉमर्स की अवहेलना कोई नहीं कर सकता है। निजी स्कूलों के संचालकों ने फीस ही नॉमर्स के अनुसार बढ़ानी चाहिए। शिक्षा विभाग स्कूलों से पूरी जानकारी हासिल होने के बाद मुद्दे के समाधान के लिए प्रिंसिपलों से बात करेगा। मामले को किसी तरह कानूनी पहलुओं ं के साथ निपटाया जाएगा।
हो सकती है मान्यता रद्द
अभिभावक एकता संघ की ओर से निजी स्कूल में फीस बढ़ोतरी, स्मार्ट क्लासेज, कंप्यूटर फीस व वार्षिक शुल्क के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किए गए। लगभग एक सप्ताह तक विरोध प्रदर्शन किया गया और शहर में निजी स्कूलों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रोष मार्च भी निकाला था। उसके बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और निजी स्कूलों को लेटर जारी कर दिया था। इसमें साफ साफ लिखा था कि कोई भी स्कूल बिना अनुमति के फीस नहीं बढ़ा सकता, एनुवल चार्जिज केवल पहली, छठी, नौवीं व ग्यारहवीं कक्षा में ही लिए जा सकते हैं। कोई भी स्कूल कंप्यूटर व स्मार्ट क्लास के नाम पर अभिभावकों को नहीं लूट सकता। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए थे कि बच्चों को केवल एनसीईआरटी की ही बुक पढ़ाई जाए।
लंबी बैठक में हालांकि फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन प्रतिनिधिमंडल के अधिकारियों ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि जल्द ही प्राइवेट स्कूलों तक मंडलायुक्त के आदेश पहुंच जाने चाहिए। इसके चलते डीईओ ने मई के पहले हफ्ते में स्कूल संचालकों की बैठक बुलाई है।
बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुरूप सीबीएसई से संबद्ध के जिला भर के सभी 72 स्कूलों को पत्र लिख कर इस संबध में विस्तार से जानकारी मांगी गई है। मंगलवार को रोहतक मंडल के शिक्षा विभाग के एओ करनाल पहुंचे। निजी स्कूलों द्वारा बढ़ाई गई फीस के मुद्दे पर करीब दो घंटे तक विस्तार से चर्चा हुई।
शिक्षा विभाग भी अब शिक्षा नियमावली के सेक्शन 158 को लागू कराने के लिए गंभीर नजर आ रहा है। बैठक के तुरंत बाद जिलेभर के सीबीएसई के सभी 72 स्कूलों को शिक्षा विभाग की ओर से बनाया गया एक प्रोफार्मा भेजा गया है। इस प्रोफार्मा में फीस और तमाम शुल्कों के संबंध में विस्तार से जानकारी मांगी है। यह सूचना जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को दो मई तक भेजने के लिए लिखा गया है।
उसके बाद मई के पहले हफ्ते में इन स्कूलों के प्रिंसिपलों की बैठक बुलाई गई है। स्कूलों के प्रिंसिपलों को खासतौर पर बैठक में उपस्थित होने के निर्देश हैं। शिक्षा विभाग के हरकत में आते ही साफ हो गया है कि अब निजी स्कूलों में शामिल अनापशनाप फीस बढ़ाने वाले स्कूलों पर फीस कम करने की गाज गिरने की संभावना बढ़ गई है। अधिक फीस वसूलना साबित हो गया तो स्कूल प्रबंधन को यह फीस अभिभावकों को वापस भी करना पड़ सकती है।
नियम तोड़े तो होगी कार्रवाई
जिला शिक्षा अधिकारी आशा मुंजाल ने कहा कि पिछले दिनों निजी स्कूलों द्वारा अधिक फीस वसूलने के मामले ने काफी तूल पकड़ रखा था। सरकार के नॉमर्स हैं। नॉमर्स की अवहेलना कोई नहीं कर सकता है। निजी स्कूलों के संचालकों ने फीस ही नॉमर्स के अनुसार बढ़ानी चाहिए। शिक्षा विभाग स्कूलों से पूरी जानकारी हासिल होने के बाद मुद्दे के समाधान के लिए प्रिंसिपलों से बात करेगा। मामले को किसी तरह कानूनी पहलुओं ं के साथ निपटाया जाएगा।
हो सकती है मान्यता रद्द
अभिभावक एकता संघ की ओर से निजी स्कूल में फीस बढ़ोतरी, स्मार्ट क्लासेज, कंप्यूटर फीस व वार्षिक शुल्क के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किए गए। लगभग एक सप्ताह तक विरोध प्रदर्शन किया गया और शहर में निजी स्कूलों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रोष मार्च भी निकाला था। उसके बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और निजी स्कूलों को लेटर जारी कर दिया था। इसमें साफ साफ लिखा था कि कोई भी स्कूल बिना अनुमति के फीस नहीं बढ़ा सकता, एनुवल चार्जिज केवल पहली, छठी, नौवीं व ग्यारहवीं कक्षा में ही लिए जा सकते हैं। कोई भी स्कूल कंप्यूटर व स्मार्ट क्लास के नाम पर अभिभावकों को नहीं लूट सकता। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए थे कि बच्चों को केवल एनसीईआरटी की ही बुक पढ़ाई जाए।