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पैक्स कर्मियों का जोरदार प्रदर्शन, पुलिस ने संभाली स्थिति
करनाल
Updated Wed, 20 Nov 2013 11:25 PM IST
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करनाल में सहकारिता दिवस के दिन प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां (पैक्स) कर्मचारी महासंघ के बैनर तले पैक्स कर्मियों ने सरकार के खिलाफ जमकर बवाल काटा।
इन लोगों ने सहकारिता दिवस समारोह में हिस्सा नहीं लेकर सहकारिता दिवस का बहिष्कार किया। कड़ी पुलिस सुरक्षा के बावजूद पैक्स कर्मियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विरोध जता रहे पैक्स कर्मियों ने कडे़ लहजे में कहा कि अब बहुत हो चुका, किसी हाल में शोषण बर्दाश्त नहीं होगा।
रिश्वत के बल पर वेतन बढ़ाने वाले अधिकारियों की जेब का अब हर हाल में नुकसान नहीं होगा। सहकारिता मंत्री के आश्वासन के बावजूद अधिकारी आदेश की परवाह नहीं कर रहे हैं। सहकारिता विभाग की वित्तायुक्त शकुंतला जाखू उनके बीच पहुंची और आश्वासन दिया।
कर्मियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि स्केल लागू करने की उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो वे लोग एक दिसंबर से पंचकूला के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। रोजाना होने वाले करोड़ों रुपये वसूली के घाटे के लिए अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
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करनाल डिप्टी रजिस्ट्रार के अधीनस्थ जिला यमुनानगर, करनाल, पानीपत और सोनीपत के छह सौ कर्मी बुधवार को शहर के कर्ण पार्क में एकत्रित हुए। कर्मियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर नाराजगी जाहिर की। कर्मी नारेबाजी करते हुए पंचायत भवन में आयोजित सहकारिता दिवस की ओर बढे़ तो पुलिस प्रशासन ने उन्हें पंचायत भवन में जाने से बेरीकेड लगाकर रोक दिया।
महात्मा गांधी चौक से पंचायत भवन तक मार्ग बेरीकेड लगा दिए गए। कर्मियों की नाराजगी कोे भांपकर पुलिसकर्मियों ने उन्हें डीटीओ कार्यालय में ले जाकर बैठा दिया। कर्मियों ने भी अपने विरोध के तेवर कार्यालय में दिखाए। कर्मियों ने साफ कहा कि उन लोगों की कोई खास मांग नहीं, केवल एक मांग है। पैक्स के कर्मचारी पिछले करीब तीस-तीस साल से लगे हैं।
उन लोगों की उम्र पूरी होने के करीब है। अभी तक उन्हें केवल दिहाड़ी की तरह महीने के दिन पगार थमा दी जाती है। सरकार का पूरा सिस्टम पारदर्शी होने के बावजूद उन लोगों का वेतनमान (पे स्केल) लागू नहीं किया गया। वह लोग पे स्केल लागू कराने की मांग पर अडे़ हैं।
सहकारिता मंत्री पे स्के ल लागू कराने की मांग को स्वीकृति दे चुके हैं। इसके बावजूद अधिकारियों ने मंत्री के आदेश को ठेंगा दिखा दिया। हरियाणा में मंत्रियों की नहीं, बल्कि अधिकारियों की चलती है, जो अपनी जेब गर्म रखने के लिए काम को अटकाकर रखते हैं। वर्तमान में भी अधिकारी अपने चेहतों का वेतन अपने हिसाब से बढ़ा देते हैं। सरकारी संस्थाओं में पूरे हरियाणा में एक जैसा काम होना चाहिए, नहीं होता है तो वहां गोलमाल साफ है।
पैक्स से अधिकारी गलत ढंग से रुपया वसूलते हैं। गोहाना में सीएम की ओर से किसानोें के कर्ज की ब्याज वसूली के लिए की गई घोषणा के बाद भी सरकार ब्याज के पैसे का घाटा पैक्स से वसूलने की तैयारी में है। पैक्स कर्मचारी महासंघ के राज्य अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह राणा, महासचिव सुभाष नांदल, कोषाध्यक्ष नरदेव सिंह और प्रदेश मीडिया प्रभारी रणधीर सिंह, करनाल के जिलाध्यक्ष कुलदीप राणा समेत कई पदाधिकारियों ने कहा कि वे लोग अपनी मांग के लिए रजिस्ट्रार को नोटिस दे चुके हैं।
30 नवंबर तक काम करेंगे। एक दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। हड़ताल के दौरान रिकवरी नहीं की जाएगी। एक जिले की रिकवरी औसत एक दिन की करीब बीस करोड़ आती है। एमडी हरको ने उन्हें स्वयं बोला है कि वे लोग आरपार की लड़ाई लड़ ले, उन्हें कुछ दिया जाने वाला नहीं। सहकारिता दिवस पूरे राज्य में एक ही स्थान पर मनाया जाता था।
इस दिन के लिए आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री आने का इतिहास रहा है। इस बार सरकार कर्मियों के विरोध से घबरा गई है। पैक्स कर्मियों की समस्या को सुनने के लिए राज्य सरकार की अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं सहकारिता विभाग की वित्तायुक्त शकुंतला जाखू उनके बीच पहुंची।
उन्होंने आश्वासन देते कहा कि उनकी पूरी मांग पर सकारात्मक विचार के लिए सरकार से बात की जाएगी। उम्मीद है उन लोगों को एक दिसंबर से हड़ताल पर नहीं जाना पडे़गा।
बी फार्मा के विद्यार्थियों ने काटा बवाल
शहर के दून वैली इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी एंड मेडिसन के विद्यार्थियों ने कॉलेज के गेट पर पूरा बवाल काटा। बी फार्मा के विद्यार्थियों ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रबंधन की वजह से सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में जा रहा है।
कोई सुनने वाला नहीं है। कॉलेज प्रबंधन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। वे लोग पिछले तीन दिन से हड़ताल पर हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं की जा रही। बुधवार को कॉलेज के गेट पर सुबह ही सैकड़ों छात्र एकत्रित हो गए। विद्यार्थियों ने कड़ी नारेबाजी करते कहा कि कॉलेज प्रबंधन को सभी छात्र पिछले चार साल में करोड़ों रुपया दे चुके हैं।
इसके बावजूद उन लोगों का भविष्य अंधकार में है। पिछले चार साल से वे लोग कॉलेज में आ रहे हैं। उन लोगों का अंतिम वर्ष है। उन्हें डिग्री मिलने की उम्मीद नहीं है। ऐसा होने के कारण उनका लाइसेंस नहीं बन पाएगा। इससे साफ है कि वह लोग करोड़ों खर्च करने के बावजूद शून्य हो जाएंगे। यह किसी हाल बर्दाश्त नहीं होगा। वे लोग इसके लिए अदालत तक जाने से गुरेज नहीं करेंगे।
विद्यार्थियों ने कहा कि वे लोग लिखित में आश्वासन दिए बिना हड़ताल खोलने वाले नहीं है। हड़ताल जारी रहेगी। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कॉलेज टीचर उनसे दुर्व्यवहार करने में भी कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं।
अपना नाम मीडिया में कॉलेज प्रबंधन के डर के कारण प्रकाशित नहीं करवा रहे हैं लेकिन अदालत गए तो वे लोग खुलकर प्रबंधन के खिलाफ बोलेंगे।
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इन लोगों ने सहकारिता दिवस समारोह में हिस्सा नहीं लेकर सहकारिता दिवस का बहिष्कार किया। कड़ी पुलिस सुरक्षा के बावजूद पैक्स कर्मियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विरोध जता रहे पैक्स कर्मियों ने कडे़ लहजे में कहा कि अब बहुत हो चुका, किसी हाल में शोषण बर्दाश्त नहीं होगा।
रिश्वत के बल पर वेतन बढ़ाने वाले अधिकारियों की जेब का अब हर हाल में नुकसान नहीं होगा। सहकारिता मंत्री के आश्वासन के बावजूद अधिकारी आदेश की परवाह नहीं कर रहे हैं। सहकारिता विभाग की वित्तायुक्त शकुंतला जाखू उनके बीच पहुंची और आश्वासन दिया।
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कर्मियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि स्केल लागू करने की उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो वे लोग एक दिसंबर से पंचकूला के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। रोजाना होने वाले करोड़ों रुपये वसूली के घाटे के लिए अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
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करनाल डिप्टी रजिस्ट्रार के अधीनस्थ जिला यमुनानगर, करनाल, पानीपत और सोनीपत के छह सौ कर्मी बुधवार को शहर के कर्ण पार्क में एकत्रित हुए। कर्मियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर नाराजगी जाहिर की। कर्मी नारेबाजी करते हुए पंचायत भवन में आयोजित सहकारिता दिवस की ओर बढे़ तो पुलिस प्रशासन ने उन्हें पंचायत भवन में जाने से बेरीकेड लगाकर रोक दिया।
महात्मा गांधी चौक से पंचायत भवन तक मार्ग बेरीकेड लगा दिए गए। कर्मियों की नाराजगी कोे भांपकर पुलिसकर्मियों ने उन्हें डीटीओ कार्यालय में ले जाकर बैठा दिया। कर्मियों ने भी अपने विरोध के तेवर कार्यालय में दिखाए। कर्मियों ने साफ कहा कि उन लोगों की कोई खास मांग नहीं, केवल एक मांग है। पैक्स के कर्मचारी पिछले करीब तीस-तीस साल से लगे हैं।
उन लोगों की उम्र पूरी होने के करीब है। अभी तक उन्हें केवल दिहाड़ी की तरह महीने के दिन पगार थमा दी जाती है। सरकार का पूरा सिस्टम पारदर्शी होने के बावजूद उन लोगों का वेतनमान (पे स्केल) लागू नहीं किया गया। वह लोग पे स्केल लागू कराने की मांग पर अडे़ हैं।
सहकारिता मंत्री पे स्के ल लागू कराने की मांग को स्वीकृति दे चुके हैं। इसके बावजूद अधिकारियों ने मंत्री के आदेश को ठेंगा दिखा दिया। हरियाणा में मंत्रियों की नहीं, बल्कि अधिकारियों की चलती है, जो अपनी जेब गर्म रखने के लिए काम को अटकाकर रखते हैं। वर्तमान में भी अधिकारी अपने चेहतों का वेतन अपने हिसाब से बढ़ा देते हैं। सरकारी संस्थाओं में पूरे हरियाणा में एक जैसा काम होना चाहिए, नहीं होता है तो वहां गोलमाल साफ है।
पैक्स से अधिकारी गलत ढंग से रुपया वसूलते हैं। गोहाना में सीएम की ओर से किसानोें के कर्ज की ब्याज वसूली के लिए की गई घोषणा के बाद भी सरकार ब्याज के पैसे का घाटा पैक्स से वसूलने की तैयारी में है। पैक्स कर्मचारी महासंघ के राज्य अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह राणा, महासचिव सुभाष नांदल, कोषाध्यक्ष नरदेव सिंह और प्रदेश मीडिया प्रभारी रणधीर सिंह, करनाल के जिलाध्यक्ष कुलदीप राणा समेत कई पदाधिकारियों ने कहा कि वे लोग अपनी मांग के लिए रजिस्ट्रार को नोटिस दे चुके हैं।
30 नवंबर तक काम करेंगे। एक दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। हड़ताल के दौरान रिकवरी नहीं की जाएगी। एक जिले की रिकवरी औसत एक दिन की करीब बीस करोड़ आती है। एमडी हरको ने उन्हें स्वयं बोला है कि वे लोग आरपार की लड़ाई लड़ ले, उन्हें कुछ दिया जाने वाला नहीं। सहकारिता दिवस पूरे राज्य में एक ही स्थान पर मनाया जाता था।
इस दिन के लिए आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री आने का इतिहास रहा है। इस बार सरकार कर्मियों के विरोध से घबरा गई है। पैक्स कर्मियों की समस्या को सुनने के लिए राज्य सरकार की अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं सहकारिता विभाग की वित्तायुक्त शकुंतला जाखू उनके बीच पहुंची।
उन्होंने आश्वासन देते कहा कि उनकी पूरी मांग पर सकारात्मक विचार के लिए सरकार से बात की जाएगी। उम्मीद है उन लोगों को एक दिसंबर से हड़ताल पर नहीं जाना पडे़गा।
बी फार्मा के विद्यार्थियों ने काटा बवाल
शहर के दून वैली इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी एंड मेडिसन के विद्यार्थियों ने कॉलेज के गेट पर पूरा बवाल काटा। बी फार्मा के विद्यार्थियों ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रबंधन की वजह से सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में जा रहा है।
कोई सुनने वाला नहीं है। कॉलेज प्रबंधन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। वे लोग पिछले तीन दिन से हड़ताल पर हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं की जा रही। बुधवार को कॉलेज के गेट पर सुबह ही सैकड़ों छात्र एकत्रित हो गए। विद्यार्थियों ने कड़ी नारेबाजी करते कहा कि कॉलेज प्रबंधन को सभी छात्र पिछले चार साल में करोड़ों रुपया दे चुके हैं।
इसके बावजूद उन लोगों का भविष्य अंधकार में है। पिछले चार साल से वे लोग कॉलेज में आ रहे हैं। उन लोगों का अंतिम वर्ष है। उन्हें डिग्री मिलने की उम्मीद नहीं है। ऐसा होने के कारण उनका लाइसेंस नहीं बन पाएगा। इससे साफ है कि वह लोग करोड़ों खर्च करने के बावजूद शून्य हो जाएंगे। यह किसी हाल बर्दाश्त नहीं होगा। वे लोग इसके लिए अदालत तक जाने से गुरेज नहीं करेंगे।
विद्यार्थियों ने कहा कि वे लोग लिखित में आश्वासन दिए बिना हड़ताल खोलने वाले नहीं है। हड़ताल जारी रहेगी। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कॉलेज टीचर उनसे दुर्व्यवहार करने में भी कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं।
अपना नाम मीडिया में कॉलेज प्रबंधन के डर के कारण प्रकाशित नहीं करवा रहे हैं लेकिन अदालत गए तो वे लोग खुलकर प्रबंधन के खिलाफ बोलेंगे।