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कोरोना मरीजों के लिए नहीं उपकरण, अनुमान से दे रहे ऑक्सीजन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2020 02:15 AM IST
oxygen is now not given by equipment estimats for corona patients
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कल्पना चावला मेडिकल कालेज में कोरोना मरीजों का इलाज अंदाज से किया जा रहा है। कालेज के पास वेंटीलेटर तो पर्याप्त हैं, लेकिन मरीजों की स्थिति जांचने वाले मॉनीटर और प्लस आक्सी मीटर की भारी कमी है। ऐसे में मरीजों को ऑक्सीजन अनुमान से दी जा रही है। अगर मॉनीटर होते तो मरीजों की स्थिति उस पर प्रदर्शित होती रहती। हैरानी की बात है कि कालेज की तरफ से इनकी डिमांड मार्च और मई में की जा चुकी हैं, लेकिन सरकार द्वारा इनकी खरीद को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। सवाल है कि बिना उपकरणों के कैसे मरीजों का इलाज किया जाएगा और ऐसा कब तक चलेगा।

कल्पना चावला मेडिकल कालेज के 150 बेड को कोविड अस्पताल घोषित किया गया है। इनमें 80 के करीब कोरोना के पॉजिटिव मरीज दाखिल हैं, इतने ही संदिग्ध मरीज भी हैं, जिनको बीमारी के लक्षण हैं और अन्य बीमारियां भी हैं। मेडिकल कालेज में 50 के करीब आईसीयू बेड हैं, जबकि 60 वेंटीलेटर हैं। गंभीर बात ये है कि मरीज के स्वास्थ्य की लगातार अपडेट देने वाले मॉनीटर सिर्फ 31 हैं। जो कि संबंधित मरीज की हृदय गति, बीपी और आक्सीजन के लेवल आदि की जानकारी देता है। वहीं प्लस आक्सीमीटर सिर्फ 10 से 15 हैं। इसलिए आक्सीजन की कमी के बारे में मरीज से पूछकर ही दी जा रही है। इस समय मेडिकल कालेज में रोज 50 के करीब मरीज आक्सीजन पर रहते हैं। उनका आक्सीजन लेवल जांचने के लिए ये उपकरण जरूरी हैं।

300 प्लस आक्सीमीटर और 150 मॉनीटर की भेजी है डिमांड
मेडिकल कालेज में 550 बेड हैं। कालेज के सूत्रों के अनुसार मार्च और मई में कालेज की तरफ से 150 मानीटर की डिमांड भेजी गई थी। 300 प्लस आक्सीमीटर की डिमांड भी भेजी थी। लेकिन आज तक कोई उपकरण नहीं खरीदा गया। जून में प्रदेश सरकार की ओर से मेडिकल उपकरण खरीदने के लिए कमेटी बनाई गई थी, जिसमें रोहतक मेडिकल यूनिवर्सिटी के वीसी समेत कई मेडिकल कालेजों के निदेशकों को इसमें शामिल किया गया था। लेकिन यह कमेटी कोई खरीद नहीं कर पाई। ऐसे में सरकार ने बाद में यह कमान खुद अपने हाथ में ले ली, लेकिन हालात अब भी ऐसे ही हैं।
ऐसे काम करता है प्लस आक्सीमीटर
इस डिवाइस से पता लगता है कि आपका दिल कितना सही काम कर रहा है। फेफड़ों के लिए दी गई दवाई किस तरह काम कर रही है या क्या किसी को सांस लेने के लिए मदद की आवश्यकता है तो नहीं है। यानी सांस से जुड़ी अलग-अलग जानकारियों के लिए यह डिवाइस काम आती है। रीडिंग प्राप्त करने के लिए इस क्लिप जैसी डिवाइस में उंगली को रखा जाता है। इसके बाद डिवाइस आपके खून में मौजूद ऑक्सीजन के स्तर को मापती है। आमतौर से आपके खून में 89 प्रतिशत से अधिक ऑक्सीजन होनी चाहिए।
जल्द आने की संभावना : डा. दुरेजा
प्रदेश सरकार के पास मेडिकल के जरूरी उपकरणों की डिमांड भेजी है। हम लगातार आला अधिकारियों के संपर्क में है, उम्मीद है कि जल्द ये उपकरण कालेज को मिल जाएंगे। क्योंकि ये उपकरण केवल करनाल के लिए नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए खरीदे जाने हैं, इसलिए इसमें देरी हुई है। फिलहाल सुचारू रूप से कार्य चल रहा है। हम मरीजों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आने देंगे। -डा. जेसी दुरेजा, निदेशक, केसीजीएमसी।

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