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डेढ़ घंटा एंबुलेंस में तड़पता रहा घायल
कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 15 Oct 2013 12:04 AM IST
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डेढ़ घंटे तक मरीज एंबुलेंस में ही सिर्फ इसलिए पड़ा रहा, क्योंकि कुरुक्षेत्र जिला के सरकारी अस्पताल में पहुंचने पर उसे स्ट्रेचर नहीं मिला। इसी दौरान जीटी रोड पर एक हादसे का शिकार हुआ दूसरा घायल भी आधे घंटे तक स्ट्रेचर न मिलने के कारण एंबुलेंस में रहा।
सोमवार को इन दोनों मरीजों के एंबुलेंस में पड़ रहने के दौरान अमर उजाला ने इनसे बात की तो पीड़ितों और इनके अभिभावकों के चेहरे स्वास्थ्य विभाग के प्रति गुस्से से लाल हो गए। इन्होंने जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर अधिकारियों को जमकर कोसा।
गांव अंटहेड़ी निवासी सुरजीत सिंह ने बताया कि एक माह पहले एक हादसे में उसकी एक टांग में फ्रेक्चर हुआ था। बताया गया है कि सुरजीत का इलाज एलएनजेपी अस्पताल और पीजीआई चंडीगढ़ में चल रहा है। आज चंडीगढ़ पीजीआई में उसका आपरेशन होना था, लेकिन पीजीआई के चिकित्सकों ने उसे आपरेशन की तारीख दो दिन बाद की दे दी। एलएनजेपी अस्पताल कुरुक्षेत्र की एंबुलेंस उसे वापस कुरुक्षेत्र ले आई, यहां उसे अस्पताल में पट्टी करानी थी, लेकिन जब अस्पताल पहुंचा तो यहां उसे डेढ़ घंटे तक स्ट्रेचर नसीब नहीं हुआ।
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वहीं सुरजीत के रिश्तेदार किरमिच निवासी जोगिंद्र सिंह ने बताया कि वह पूरे अस्पताल में स्ट्रेचर के लिए घूम चुके हैं, लेकिन कोई भी स्ट्रेचर खाली नहीं मिला और जो खाली है वह टूटे हुए हैं। सुरजीत के अनुसार जिला अस्पताल में सरकार सुविधाओं के बारे में ढिंढोरा है कि मरीजों को प्रत्येक सुविधा मुहैया करवाई जा रही है, लेकिन उनकी घोषणा कहां तक जायज है यह आज पता लग गया है।
उन्होंने बताया कि अस्पताल के डॉक्टर भी उन्हें सही जानकारी नहीं दे रहे हैं, जिसके कारण आज उन्हें करीब डेढ़ घंटा अपने जीजा को एंबुलेंस में ही बैठाए रखना पड़ा।
वहीं शाहाबाद के रूपनगर निवासी धनीराम पुत्र मंशा राम ने बताया कि सोमवार सुबह कनीपला गांव के निकट वह एक हादसे में जख्मी हुआ था, जिसके बाद उसे एंबुलेंस से एलएनजेपी अस्पताल में लाया गया, लेकिन वह भी करीब आधे घंटे से एंबुलेंस में ही पड़ा है।
उसके परिजनों को एक भी स्ट्रेचर मुहैया नहीं हो सका है, हालांकि अमर उजाला ने जब डॉक्टरों और कर्मचारियों से बातचीत की तो अफरातफरी में एक स्ट्रेचर इन मरीजों को मिल गया परंतु एक मरीज को स्ट्रेचर मिलने के लिए कुछ समय लग गया।
एंट्री गेट होनी चाहिए व्हीलचेयर और स्ट्रेचर
मरीजों का कहना है कि अस्पताल के एंट्री गेट पर ही स्ट्रेचर एवं व्हीलचेयर होना लाजिमी है, लेकिन ये दोनों व्हीलचेयर गेट तो दूर कई बार अस्पताल में ढूंढे भी नहीं मिलती और इसका खामियाजा इमरजेंसी मरीजों को भुगतना पड़ता है।
जल्द हल की जाएगी स्ट्रेचर की समस्या-एमस
एलएनजेपी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मुकेश ने बताया कि सोमवार को मरीजों की संख्या अस्पताल में अधिक होती है। इस कारण स्ट्रेचरों की थोड़ी समस्या हो सकती हैं, लेकिन जो समस्या आज हुई है, वह समस्या आगे न हो इसके पुख्ता प्रबंध किए जाएंगे।
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सोमवार को इन दोनों मरीजों के एंबुलेंस में पड़ रहने के दौरान अमर उजाला ने इनसे बात की तो पीड़ितों और इनके अभिभावकों के चेहरे स्वास्थ्य विभाग के प्रति गुस्से से लाल हो गए। इन्होंने जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर अधिकारियों को जमकर कोसा।
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गांव अंटहेड़ी निवासी सुरजीत सिंह ने बताया कि एक माह पहले एक हादसे में उसकी एक टांग में फ्रेक्चर हुआ था। बताया गया है कि सुरजीत का इलाज एलएनजेपी अस्पताल और पीजीआई चंडीगढ़ में चल रहा है। आज चंडीगढ़ पीजीआई में उसका आपरेशन होना था, लेकिन पीजीआई के चिकित्सकों ने उसे आपरेशन की तारीख दो दिन बाद की दे दी। एलएनजेपी अस्पताल कुरुक्षेत्र की एंबुलेंस उसे वापस कुरुक्षेत्र ले आई, यहां उसे अस्पताल में पट्टी करानी थी, लेकिन जब अस्पताल पहुंचा तो यहां उसे डेढ़ घंटे तक स्ट्रेचर नसीब नहीं हुआ।
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वहीं सुरजीत के रिश्तेदार किरमिच निवासी जोगिंद्र सिंह ने बताया कि वह पूरे अस्पताल में स्ट्रेचर के लिए घूम चुके हैं, लेकिन कोई भी स्ट्रेचर खाली नहीं मिला और जो खाली है वह टूटे हुए हैं। सुरजीत के अनुसार जिला अस्पताल में सरकार सुविधाओं के बारे में ढिंढोरा है कि मरीजों को प्रत्येक सुविधा मुहैया करवाई जा रही है, लेकिन उनकी घोषणा कहां तक जायज है यह आज पता लग गया है।
उन्होंने बताया कि अस्पताल के डॉक्टर भी उन्हें सही जानकारी नहीं दे रहे हैं, जिसके कारण आज उन्हें करीब डेढ़ घंटा अपने जीजा को एंबुलेंस में ही बैठाए रखना पड़ा।
वहीं शाहाबाद के रूपनगर निवासी धनीराम पुत्र मंशा राम ने बताया कि सोमवार सुबह कनीपला गांव के निकट वह एक हादसे में जख्मी हुआ था, जिसके बाद उसे एंबुलेंस से एलएनजेपी अस्पताल में लाया गया, लेकिन वह भी करीब आधे घंटे से एंबुलेंस में ही पड़ा है।
उसके परिजनों को एक भी स्ट्रेचर मुहैया नहीं हो सका है, हालांकि अमर उजाला ने जब डॉक्टरों और कर्मचारियों से बातचीत की तो अफरातफरी में एक स्ट्रेचर इन मरीजों को मिल गया परंतु एक मरीज को स्ट्रेचर मिलने के लिए कुछ समय लग गया।
एंट्री गेट होनी चाहिए व्हीलचेयर और स्ट्रेचर
मरीजों का कहना है कि अस्पताल के एंट्री गेट पर ही स्ट्रेचर एवं व्हीलचेयर होना लाजिमी है, लेकिन ये दोनों व्हीलचेयर गेट तो दूर कई बार अस्पताल में ढूंढे भी नहीं मिलती और इसका खामियाजा इमरजेंसी मरीजों को भुगतना पड़ता है।
जल्द हल की जाएगी स्ट्रेचर की समस्या-एमस
एलएनजेपी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मुकेश ने बताया कि सोमवार को मरीजों की संख्या अस्पताल में अधिक होती है। इस कारण स्ट्रेचरों की थोड़ी समस्या हो सकती हैं, लेकिन जो समस्या आज हुई है, वह समस्या आगे न हो इसके पुख्ता प्रबंध किए जाएंगे।