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म्हारे बूढ़े भी शिक्षा में नहीं युवाओं से कम
करनाल
Updated Sun, 11 May 2014 11:43 PM IST
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जिले के बुजुर्ग व किसान कृषि के क्षेत्र में तोेे झंडे गाढ़ ही रहे हैं,
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वहीं शिक्षा के क्षेत्र में भी परचम लहरा रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से
लगाया जा सकता है कि साक्षर भारत मिशन (प्रौढ़ शिक्षा) के तहत मार्च में
पांच हजार के टारगेट को पूरा करते हुए 5830 बुजुर्गों ने परीक्षा दी है।
इसमें 4354 महिलाएं व 1476 पुरुष शामिल हैं। जिले में घरौंडा तहसील से सबसे ज्यादा 1231 लोगों ने परीक्षा दी। पूरे प्रदेश में करनाल नंबर वन पर रहा है जो जिले के लिए गौरव की बात है।
साक्षर भारत मिशन के तहत मार्च में हरियाणा में 56 हजार लोगों ने परीक्षा दी है, जिसमें 5830 करनाल जिले के हैं। जो बचपन में शिक्षा से वंचित रह गए थे उन्हें प्रौढ़ शिक्षा के माध्यम से शिक्षित किया जा रहा है। शिक्षा प्राप्त करने की कोई उम्र नहीं होती। जिला मिशन कोआर्र्डिनेटर प्रवीन मोर ने बताया कि आठ सितंबर 2009 में प्रौढ़ शिक्षा का नाम बदलकर साक्षर भारत मिशन रख दिया गया था।
साक्षर भारत मिशन का राष्ट्रीय साक्षरता मिशन प्राधिकरण के साथ गठबंधन है। हरियाणा में सबसे पहले करनाल में जिले में जुलाई 2010 को इसका शुभारंभ किया गया था। बुजुर्गों को शिक्षित करने के लिए 300 घंटे तय किए गए हैं। विद्यार्थी इसे दो महीनेे से लेकर एक साल तक पास कर सकता है। गांव में सांझी पहल नामक पुस्तक पढ़ाई जाती है। जो लोग इस परीक्षा को पास कर लेते हैं वो तीसरी पास विद्यार्थी के समान होते हैं।
चार साल में 26 हजार हो चुके हैं शिक्षित
साक्षर भारत मिशन के अंतर्गत 2010 से लेकर अब तक 26 हजार लोगों को शिक्षित कर चुके हैं। इस समय केवल बुजुर्गों को शिक्षित किया जा रहा है, लेकिन आने वाले समय में शिक्षा के साथ-साथ प्रोफेशनल ज्ञान केंद्र बनाना उनका लक्ष्य है।
जल्द होगी प्रेरकों की भर्ती
जिला मिशन कोआर्डिनेटर प्रवीन मोर ने बताया कि जिले में 295 एडल्ट एजूकेशन सेंटर हैं तथा 373 ग्राम पंचायत हैं। हर गांव में दो दो प्रेरक होने चाहिए। इस समय 483 प्रेरक बुजुर्गों को शिक्षित करने में जुटे हैं। 263 पद अभी खाली हैं। आचार संहिता के बाद इन पदों को भरने के लिए गांवों में मुनादी करवाई जाएगी। उसके बाद इंटरव्यू लिया जाएगा।
इसमें 4354 महिलाएं व 1476 पुरुष शामिल हैं। जिले में घरौंडा तहसील से सबसे ज्यादा 1231 लोगों ने परीक्षा दी। पूरे प्रदेश में करनाल नंबर वन पर रहा है जो जिले के लिए गौरव की बात है।
साक्षर भारत मिशन के तहत मार्च में हरियाणा में 56 हजार लोगों ने परीक्षा दी है, जिसमें 5830 करनाल जिले के हैं। जो बचपन में शिक्षा से वंचित रह गए थे उन्हें प्रौढ़ शिक्षा के माध्यम से शिक्षित किया जा रहा है। शिक्षा प्राप्त करने की कोई उम्र नहीं होती। जिला मिशन कोआर्र्डिनेटर प्रवीन मोर ने बताया कि आठ सितंबर 2009 में प्रौढ़ शिक्षा का नाम बदलकर साक्षर भारत मिशन रख दिया गया था।
साक्षर भारत मिशन का राष्ट्रीय साक्षरता मिशन प्राधिकरण के साथ गठबंधन है। हरियाणा में सबसे पहले करनाल में जिले में जुलाई 2010 को इसका शुभारंभ किया गया था। बुजुर्गों को शिक्षित करने के लिए 300 घंटे तय किए गए हैं। विद्यार्थी इसे दो महीनेे से लेकर एक साल तक पास कर सकता है। गांव में सांझी पहल नामक पुस्तक पढ़ाई जाती है। जो लोग इस परीक्षा को पास कर लेते हैं वो तीसरी पास विद्यार्थी के समान होते हैं।
चार साल में 26 हजार हो चुके हैं शिक्षित
साक्षर भारत मिशन के अंतर्गत 2010 से लेकर अब तक 26 हजार लोगों को शिक्षित कर चुके हैं। इस समय केवल बुजुर्गों को शिक्षित किया जा रहा है, लेकिन आने वाले समय में शिक्षा के साथ-साथ प्रोफेशनल ज्ञान केंद्र बनाना उनका लक्ष्य है।
जल्द होगी प्रेरकों की भर्ती
जिला मिशन कोआर्डिनेटर प्रवीन मोर ने बताया कि जिले में 295 एडल्ट एजूकेशन सेंटर हैं तथा 373 ग्राम पंचायत हैं। हर गांव में दो दो प्रेरक होने चाहिए। इस समय 483 प्रेरक बुजुर्गों को शिक्षित करने में जुटे हैं। 263 पद अभी खाली हैं। आचार संहिता के बाद इन पदों को भरने के लिए गांवों में मुनादी करवाई जाएगी। उसके बाद इंटरव्यू लिया जाएगा।