{"_id":"67e46cd016938c3e760d11de","slug":"now-municipal-corporations-and-panchayats-will-manage-drinking-water-and-sewerage-system-karnal-news-c-18-knl1008-610625-2025-03-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: अब नगर निगम, पंचायतें संभालेंगी पेयजल, सीवरेज व्यवस्था","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: अब नगर निगम, पंचायतें संभालेंगी पेयजल, सीवरेज व्यवस्था
विज्ञापन
- जनस्वास्थ्य विभाग करेगा जल की गुणवत्ता की जांच, पेयजल आपूर्ति बाधित होने पर नगर निगम व पंचायतों की होगी जिम्मेदारी
सुखदेव चौहान
करनाल। शहर व गांव की पेयजल आपूर्ति को और बेहतर करने के लिए सरकार, शहर की पेयजल व सीवरेज व्यवस्था नगर निगम, नगर पालिकाओं और गांव की जिम्मेदारी पंचायतों को सौंपने जा रही है। शहरी क्षेत्र में अब सीवर का कोई भी नया काम या वाटर स्टॉर्म सिस्टम से जुड़ी परियोजनाओं को नगर निगम की ओर से कराया जाएगा। हालांकि शुरुआत में मरम्मत और लाइन की सफाई से जुड़े कार्य जनस्वास्थ्य विभाग की ही देखरेख में होंगे। यह जिम्मेदारी सौंपने के बाद जनस्वास्थ्य विभाग जल की गुणवत्ता की जांच करेगा। पेयजल आपूर्ति बाधित होने पर निगम व पंचायत की जिम्मेदारी होगी।
ऐसे में नगर निगम, नगर पालिका व पंचायतों में मैन पावर की कमी के चलते पेयजल व सीवरेज व्यवस्था को संभाल पाना चुनौती रहेगा। वर्तमान में जलापूर्ति में तकनीकी खराबी व लाइन में लीकेज की समस्या का समाधान जनस्वास्थ्य विभाग की टीम की ओर से किया जाता है। विभाग के कर्मचारियों के पास वर्षों के कार्य का अनुभव होने पर भी है समस्या का समाधान तुरंत नहीं हो पाता। ऐसे में पूरे शहर में करीब 87 किलोमीटर के क्षेत्र में बिछाई गई सीवर लाइनों व पानी की आपूर्ति के लिए बिछाई गई पाइप लाइन के रखरखाव के लिए बड़े पैमाने पर मैन पावर और सिस्टम की जरूरत होगी।
जनस्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों का कहना है कि सरकार की नीतियां भविष्य व लोगों के फायदों को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है। विभाग के मुख्य कार्यों की जिम्मेदारी शहर में निगम व नगर पालिका को और ग्रामीण क्षेत्र में पंचायतों को सौंपने से लोग समस्या आने पर अपने जनप्रतिनिधि से सीधे तौर पर इसकी शिकायत कर सकेंगे। पहले अक्सर देखने में आता था कि छोटी सी समस्या होने पर भी जनस्वास्थ्य विभाग का हवाला देकर लोगों को टाल दिया जाता था। अब नगर पार्षद व सरपंच अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकेंगे।
विज्ञापन
यदि लाइन में कोई तकनीकी खराबी या फिर बड़ा फाल्ट आता है तो उनकी टीम हमेशा सपोर्ट के लिए तैयार रहेगी। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस संदर्भ में मुख्यालय से वीडियो कांफ्रेंस भी हो चुकी है, ग्राम पंचायत के सरपंचों को पेयजल आपूर्ति को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिले के सभी आठ खंडों की 382 ग्राम पंचायतों के सरपंचों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। फरवरी माह में हुई इस बैठक में प्रदेशभर के उच्च अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए थे कि ग्रामीण जलापूर्ति से संबंधित सभी कार्यों के बारे में सरपंचों को जागरूक करते हुए ग्राम जल व सीवरेज समिति का गठन करवाकर जिम्मेदारी सौंपी जाए। इस बैठक में विभाग के अधीक्षक अभियंताओं, सभी कार्यकारी अभियंताओं, सभी उपमंडल व कनिष्ठ अभियंताओं, जिला सलाहकार व सभी खंड संसाधन समन्वयकों से विस्तार से जानकारी ली है कि किस तरह से ग्रामीण जलापूर्ति में पंचायतों को सौंपी जाए।
ग्राम जल व सीवरेज समिति बनाकर सौंपी जाएगी जिम्मेदारी
जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रदेशभर में ग्रामीण पेयजल व्यवस्था पंचायतों को हस्तांतरित कर इसमें पंचायत की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। इसके बाद पेयजल आपूर्ति, उसके रखरखाव और प्रबंधन का कार्य ग्राम पंचायत अपने स्तर पर करेगी। इस कार्य के लिए गांवों में ग्राम जल व सीवरेज समिति (वीडब्ल्यूएससी) बनाकर जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस समिति में स्वयं सहायता समूह से भी महिलाओं को शामिल किया जाएगा। ग्राम पंचायतों में यह नीति एक अप्रैल से लागू की जाएगी। इस नीति के तहत ग्राम जल एवं सीवरेज समिति को और अधिक पावर प्रदान की गई हैं। इसमें 50 प्रतिशत महिलाओं की भूमिका हैं। ग्राम पंचायत सरपंच, ग्राम सचिव के नाम से एक बैंक खाता होगा। इसमें पेयजल संबंधित विभागीय अनुदान समेत, पीने के पानी के कनेक्शन फीस की राशि व मासिक बिल की राशि भी ग्राम पंचायत के खाते में आएगी।
विभाग के कर्मचारियों को समायोजित होने का डर
जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग की पेयजल व सीवरेज व्यवस्था जब से नगर निगमों, नगर पालिका व ग्राम पंचायतों को सौंपने की बात चली है। तभी से विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को निगम व पंचायती राज विभाग में समायोजित होने का डर सताने लगा है। करनाल में विभाग की डिवीजन एक व दो में सैकड़ों कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे में दिनभर कर्मचारियों में यह भी सुगबुगाहट रहती है कि विभाग के मर्ज होने से नई भर्ती भी बंद हो जाएगी और उनकी जिम्मेदारी अधिक बढ़ जाएगी। हालांकि जिले में विभाग की राज्य स्तरीय लैब भी बनाई गई है जिसमें विभिन्न राज्यों से पानी के नमूने जांच के लिए आते हैं।
विज्ञापन
सुखदेव चौहान
करनाल। शहर व गांव की पेयजल आपूर्ति को और बेहतर करने के लिए सरकार, शहर की पेयजल व सीवरेज व्यवस्था नगर निगम, नगर पालिकाओं और गांव की जिम्मेदारी पंचायतों को सौंपने जा रही है। शहरी क्षेत्र में अब सीवर का कोई भी नया काम या वाटर स्टॉर्म सिस्टम से जुड़ी परियोजनाओं को नगर निगम की ओर से कराया जाएगा। हालांकि शुरुआत में मरम्मत और लाइन की सफाई से जुड़े कार्य जनस्वास्थ्य विभाग की ही देखरेख में होंगे। यह जिम्मेदारी सौंपने के बाद जनस्वास्थ्य विभाग जल की गुणवत्ता की जांच करेगा। पेयजल आपूर्ति बाधित होने पर निगम व पंचायत की जिम्मेदारी होगी।
ऐसे में नगर निगम, नगर पालिका व पंचायतों में मैन पावर की कमी के चलते पेयजल व सीवरेज व्यवस्था को संभाल पाना चुनौती रहेगा। वर्तमान में जलापूर्ति में तकनीकी खराबी व लाइन में लीकेज की समस्या का समाधान जनस्वास्थ्य विभाग की टीम की ओर से किया जाता है। विभाग के कर्मचारियों के पास वर्षों के कार्य का अनुभव होने पर भी है समस्या का समाधान तुरंत नहीं हो पाता। ऐसे में पूरे शहर में करीब 87 किलोमीटर के क्षेत्र में बिछाई गई सीवर लाइनों व पानी की आपूर्ति के लिए बिछाई गई पाइप लाइन के रखरखाव के लिए बड़े पैमाने पर मैन पावर और सिस्टम की जरूरत होगी।
विज्ञापन
जनस्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों का कहना है कि सरकार की नीतियां भविष्य व लोगों के फायदों को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है। विभाग के मुख्य कार्यों की जिम्मेदारी शहर में निगम व नगर पालिका को और ग्रामीण क्षेत्र में पंचायतों को सौंपने से लोग समस्या आने पर अपने जनप्रतिनिधि से सीधे तौर पर इसकी शिकायत कर सकेंगे। पहले अक्सर देखने में आता था कि छोटी सी समस्या होने पर भी जनस्वास्थ्य विभाग का हवाला देकर लोगों को टाल दिया जाता था। अब नगर पार्षद व सरपंच अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकेंगे।
विज्ञापन
यदि लाइन में कोई तकनीकी खराबी या फिर बड़ा फाल्ट आता है तो उनकी टीम हमेशा सपोर्ट के लिए तैयार रहेगी। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस संदर्भ में मुख्यालय से वीडियो कांफ्रेंस भी हो चुकी है, ग्राम पंचायत के सरपंचों को पेयजल आपूर्ति को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिले के सभी आठ खंडों की 382 ग्राम पंचायतों के सरपंचों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। फरवरी माह में हुई इस बैठक में प्रदेशभर के उच्च अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए थे कि ग्रामीण जलापूर्ति से संबंधित सभी कार्यों के बारे में सरपंचों को जागरूक करते हुए ग्राम जल व सीवरेज समिति का गठन करवाकर जिम्मेदारी सौंपी जाए। इस बैठक में विभाग के अधीक्षक अभियंताओं, सभी कार्यकारी अभियंताओं, सभी उपमंडल व कनिष्ठ अभियंताओं, जिला सलाहकार व सभी खंड संसाधन समन्वयकों से विस्तार से जानकारी ली है कि किस तरह से ग्रामीण जलापूर्ति में पंचायतों को सौंपी जाए।
ग्राम जल व सीवरेज समिति बनाकर सौंपी जाएगी जिम्मेदारी
जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रदेशभर में ग्रामीण पेयजल व्यवस्था पंचायतों को हस्तांतरित कर इसमें पंचायत की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। इसके बाद पेयजल आपूर्ति, उसके रखरखाव और प्रबंधन का कार्य ग्राम पंचायत अपने स्तर पर करेगी। इस कार्य के लिए गांवों में ग्राम जल व सीवरेज समिति (वीडब्ल्यूएससी) बनाकर जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस समिति में स्वयं सहायता समूह से भी महिलाओं को शामिल किया जाएगा। ग्राम पंचायतों में यह नीति एक अप्रैल से लागू की जाएगी। इस नीति के तहत ग्राम जल एवं सीवरेज समिति को और अधिक पावर प्रदान की गई हैं। इसमें 50 प्रतिशत महिलाओं की भूमिका हैं। ग्राम पंचायत सरपंच, ग्राम सचिव के नाम से एक बैंक खाता होगा। इसमें पेयजल संबंधित विभागीय अनुदान समेत, पीने के पानी के कनेक्शन फीस की राशि व मासिक बिल की राशि भी ग्राम पंचायत के खाते में आएगी।
विभाग के कर्मचारियों को समायोजित होने का डर
जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग की पेयजल व सीवरेज व्यवस्था जब से नगर निगमों, नगर पालिका व ग्राम पंचायतों को सौंपने की बात चली है। तभी से विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को निगम व पंचायती राज विभाग में समायोजित होने का डर सताने लगा है। करनाल में विभाग की डिवीजन एक व दो में सैकड़ों कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे में दिनभर कर्मचारियों में यह भी सुगबुगाहट रहती है कि विभाग के मर्ज होने से नई भर्ती भी बंद हो जाएगी और उनकी जिम्मेदारी अधिक बढ़ जाएगी। हालांकि जिले में विभाग की राज्य स्तरीय लैब भी बनाई गई है जिसमें विभिन्न राज्यों से पानी के नमूने जांच के लिए आते हैं।