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स्कूलों को भेजा नोटिस, एडीसी जांच अधिकारी नियुक्त
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
Updated Tue, 04 Apr 2017 12:02 AM IST
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स्कूलों को भेजा नोटिस, एडीसी जांच अधिकारी नियुक्त
- फोटो : Amar Ujala
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शहर के तीन प्रमुख प्राइवेट स्कूलों की ओर से जबरन फीस वसूलने का मामला गरमाता जा रहा है। अभिभावकों ने रविवार को मुख्यमंत्री से शिकायत के बाद सोमवार को यह मामला डीईओ ऑफिस होते हुए डीसी और एडीसी के पास पहुंचा। अभिभावक एकता संघ ने अधिकारियों को अपना जांच पत्र और फाइल सौंप कर इन तीनों स्कूलों पर चार साल के अंदर अवैध रूप से करोड़ों रुपये वसूली का आरोप लगाया है।
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डीईओ ने पूरे मामले की जांच के लिए जहां विभाग को पत्र लिखकर कमिश्नर के अंडर में कमेटी गठित कर पूरे मामले की जांच की अनुशंसा की, वहीं डीसी मंदीप बराड़ ने एडीसी डॉं. प्रियंका सोनी को इंक्वायरी अफसर नियुक्त किया है। एडीसी तीनों स्कूलों प्रताप सिंह पब्लिक स्कूल सेक्टर 6, प्रताप सिंह पब्लिक स्कूल मेन ब्रांच और दयाल सिंह पब्लिक स्कूल मेन ब्रांच को नोटिस जारी कर 7 अप्रैल तक जवाब देने को कहा है। विदित हो कि प्राइवेट स्कूलों की ओर से हर साल बढ़ाए जाने वाले फीस की मार से अभिभावकों को बचाने के लिए राज्य सरकार ने 2014 में नियम 158 बनाया था। यह नियम बनें चार साल हो गए, लेकिन इसे न तो प्राइवेट स्कूल मानने को तैयार हैं और न ही सरकार इस नियमों को मनमाने के लिए अपने स्तर पर कोई कार्रवाई कर रही है। जिसके कारण हर साल एडमिशन के दौरान प्राइवेट स्कूल और अभिभावक एकता संघ आमने-सामने आ जाते हैं।
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इस नियम को पूरी तरह लागू कराने को लेकर रविवार को अभिभावक एकता संघ के बैनर तले अभिभावकों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। शिक्षा विभाग ने सोमवार को अभिभावकों और तीनों स्कूलों की बैठक बुलाई थी, डीईओ सुरेश गौरेया की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में अभिभावक एकता संघ के पदाधिकारियों के साथ प्रताप सिंह पब्लिक स्कूल सेक्टर- 6 की प्रिंसिपल पूजा वालिया और दयाल सिंह मेन ब्रांच की प्रिंसिपल रमेश लाठर पहुंची। करीब एक घंटे तक हुई इस बैठक में स्कूल यह मानने को तैयार नहीं थे, कि उन्होंने कोई नियम तोड़े हैं। लेकिन जब अभिभावकों ने पूरे सबूत रखें तो दोनों प्रिंसिपलों नें चुप्पी साध ली और बैठक को बीच में छोड़ कर चली गई।। वहीं डीईओ सुरेश गौरेया ने स्कूलों को निर्देश दिया कि जिन बच्चों के नाम काटे गए हैं, उन्हें फिर से दाखिला दिया जाए। साथ ही पूरे मामले की कमिश्नर की कमेटी से जांच कराने के लिए विभाग को अनुशंसा पत्र भी भेज दिया।
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डीसी ने नियुक्त किया एडीसी को जांच अधिकारी
डीईओ से मिलने के बाद अभिभावक डीसी से मिलने पहुंचे। अभिभावकों की शिकायत सुनने के बाद डीसी ने एडीसी को जांच अधिकारी नियुक्त कर अभिभावकों को एडीसी डॉं. प्रियंका सोनी के पास भेज दिया। बैठक के बाद अभिभावकों की ओर से दिए गए साक्ष्य को देखने के बाद एडीसी ने भी माना की स्कूलों ने नियमों का उल्लंघन कर फीस ले रहे हैं। इसलिए उन्होंने तीनों स्कूलों को नोटिस भेजकर 7 अप्रैल तक पूरे मामले में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
स्कूलों पर अवैध तरीके से करोड़ों रुपये का फीस लेने का आरोप
अभिभावक एकता संघ ने एडीसी के सामने साक्ष्य प्रस्तुत कर आरोप लगाया कि तीनों स्कूल हर साल प्रति बच्चा 20 हजार रुपये फीस अवैध रूप से जबरन फीस वसूल रहे हैं। संघ के सचिव नवीन ने कहा कि, यह खेल चार साल से चल रहा है, लेकिन इन स्कूलों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। तीनों स्कूलों में करीब 9000 बच्चे पढ़ रहे हैं। अगर चार साल का रिकार्ड देखें तो अब तक ये स्कूल प्रति बच्चा 80 हजार रुपये अवैध रूप से फीस लिया है। जो 9000 बच्चों के हिसाब से करोड़ों रुपये में बनता है। नवीन ने कहा कि इन स्कूलों में कई अधिकारियों के भी बच्चे पढ़ रहे हैं, जिस कारण इनकी जांच नहीं हो पाती, अगर सरकार तीनों स्कूलों की जांच कराए तो करोड़ों रुपए का घोटाला सामने आएगा।
यह नियम 158, जिसपर फंसा है पेंच
निजी स्कूलों के फीस संबंधी नियम निर्धारित करने के लिए ही सरकार ने 158 के तहत नोटिफिकेशन जारी किया है। 19 जून 2013 को सरकार ने नियम 158बी का भी प्रावधान कर दिया। इस नियम के तहत प्रत्येक प्राइवेट स्कूल को वर्ष की शुरूआत में फॉर्म नंबर छह भरना होता है। फॉर्म नंबर छह में प्राइवेट स्कूलों को यह जानकारी शिक्षा विभाग को उपलब्ध करानी होती हैं कि वह क्या सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। एडमिशन फीस, वार्षिक चार्ज केवल नए दाखिले पर ही मान्य होंगे। जिनमें कक्षा पहली, कक्षा छठी, नौंवी और 11वीं को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त किसी अन्य कक्षा में ये फीस नहीं वसूली जाएंगी। इसके अलावा स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर फीस, एक्टीविटी फीस के नाम पर बच्चों से कोई फीस नहीं ली जाएगी। जबकि ये स्कूल बच्चों से सभी तरह के फीस ले रहे हैं और अभिभावक उसी का विरोध कर रहे।