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Karnal News: उठान का समाधान नहीं, 15 हजार कट्टों पर फिर बारिश का साया
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करनाल। जिले की अनाज मंडियों में धान के उठान की समस्या दूर नहीं हो रही। मौसम विभाग ने वीरवार को बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में मंडियों में खुले में पड़े करीब 15 हजार कट्टों और धान की ढेरियों के फिर से भीगने का खतरा है। पिछले 20 दिनों में तीन बार बारिश से खुले में पड़ा धान भीग चुका है। शेड में जगह नहीं है। तिरपाल की कमी है। सड़कों पर खुले में कट्टों का अंबार लगा है। किसान और आढ़ती चिंतित हैं।
आढ़ती सोमवीर, जयसिंह और किसान रामरत्न, जयपाल शर्मा आदि ने बताया कि मंडियों में धान की आवक के मुकाबले उठान की रफ्तार धीमी होने से जगह का संकट गहराता जा रहा है। पिछली बार की बारिश में धान के हजारों कट्टे और ढेरियों में पानी जमा हो गया था। उन्हें सुखाने के लिए मंडियों में खाली जगह नहीं थी। करीब 700 कट्टे नीचे पानी घुसने के कारण अभी भी गीले रखे हुए हैं। अब फिर बारिश की संभावना जताई जा रही है। धान को भीगने से बचाने के लिए इंतजाम अधूरे हैं। क्या करें कुछ समझ नहीं आता।
पोर्टल धीमा होने से भी दिक्कत
ई-खरीद पोर्टल की धीमी प्रक्रिया भी खरीदे गए धान के उठान में अड़चन पैदा कर रही है। पोर्टल पर आउटगोइंग पास कटने में देरी हो रही है। इस कारण मंडी में सड़क किनारे वाहन खड़े किए हुए हैं जो वाहनों की आवाजाही को प्रभावित कर रहे हैं।
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मंडी सुपरवाइजर बोले-पर्याप्त हैं तिरपाल
मंडी सुपरवाइजर सुनील ने बताया कि एजेंसियों को उठान के निर्देश दिए गए हैं। तिरपाल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। कुछ शेडों में जगह खाली होनी शुरू हुई है। किसान वहां धान डाल सकते हैं। किसानों और आढ़तियों का धान भीगने नहीं दिया जाएगा।
13 हजार मीट्रिक टन की आवक, 4547 की खरीद
खरीद पोर्टल के अनुसार बुधवार को 13 हजार मीट्रिक टन की आवक और 4547 मीट्रिक टन की खरीद की गई। 12 हजार मीट्रिक टन का उठान हो चुका है। कुल 3.36 लाख मीट्रिक टन का उठान हुआ और 1.52 लाख मीट्रिक टन मंडियों में पड़ा है। मंडियों में कुल 6.24 लाख मीट्रिक टन धान पहुंचा। इसमें से 4.88 लाख मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है। वहीं 45,726 किसानों को 777 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
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आढ़ती सोमवीर, जयसिंह और किसान रामरत्न, जयपाल शर्मा आदि ने बताया कि मंडियों में धान की आवक के मुकाबले उठान की रफ्तार धीमी होने से जगह का संकट गहराता जा रहा है। पिछली बार की बारिश में धान के हजारों कट्टे और ढेरियों में पानी जमा हो गया था। उन्हें सुखाने के लिए मंडियों में खाली जगह नहीं थी। करीब 700 कट्टे नीचे पानी घुसने के कारण अभी भी गीले रखे हुए हैं। अब फिर बारिश की संभावना जताई जा रही है। धान को भीगने से बचाने के लिए इंतजाम अधूरे हैं। क्या करें कुछ समझ नहीं आता।
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पोर्टल धीमा होने से भी दिक्कत
ई-खरीद पोर्टल की धीमी प्रक्रिया भी खरीदे गए धान के उठान में अड़चन पैदा कर रही है। पोर्टल पर आउटगोइंग पास कटने में देरी हो रही है। इस कारण मंडी में सड़क किनारे वाहन खड़े किए हुए हैं जो वाहनों की आवाजाही को प्रभावित कर रहे हैं।
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मंडी सुपरवाइजर बोले-पर्याप्त हैं तिरपाल
मंडी सुपरवाइजर सुनील ने बताया कि एजेंसियों को उठान के निर्देश दिए गए हैं। तिरपाल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। कुछ शेडों में जगह खाली होनी शुरू हुई है। किसान वहां धान डाल सकते हैं। किसानों और आढ़तियों का धान भीगने नहीं दिया जाएगा।
13 हजार मीट्रिक टन की आवक, 4547 की खरीद
खरीद पोर्टल के अनुसार बुधवार को 13 हजार मीट्रिक टन की आवक और 4547 मीट्रिक टन की खरीद की गई। 12 हजार मीट्रिक टन का उठान हो चुका है। कुल 3.36 लाख मीट्रिक टन का उठान हुआ और 1.52 लाख मीट्रिक टन मंडियों में पड़ा है। मंडियों में कुल 6.24 लाख मीट्रिक टन धान पहुंचा। इसमें से 4.88 लाख मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है। वहीं 45,726 किसानों को 777 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।