फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Nising status of the sub-division, seeking Karnal

निसिंग को उपमंडल का दर्जा दिलाने की मांग

Mon, 24 Oct 2016 12:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल Updated Mon, 24 Oct 2016 12:11 AM IST
विज्ञापन
Nising status of the sub-division, seeking Karnal
निसिंग को उपमंडल का दर्जा दिलाने की मांग - फोटो : Amar Ujala
शहर के वार्ड नंबर-9 में उपमंडल व पूर्णरूप से तहसील का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर रविवार को क्षेत्र वासियों के साथ एक बैठक का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता समाजसेवी नरेश राणा बरास की। बैठक में मुख्य रूप से पहुंच जिला परिषद सदस्य भीम सिंह जलाला ने भाजपा सरकार के हलका निलोखेड़ी विधायक भगवानदास कबीर पंथी व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने क्षेत्र के लोगों की वर्षों पुरानी मांग की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1981 से बनी उपतहसील निसिंग को उपमंडल व पूर्ण रूप से तहसील का दर्जा न दिए जाने के कारण क्षेत्र के लोगों में भारी रोष बना हुआ है।
विज्ञापन


इसी बात को लेकर क्षेत्रवासियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से असंध, इंद्री व घराैंडा को उपमंडल का दर्जा दिया गया है, लेकिन कस्बे के लोग आजतक इस सुविधा से वंचित है। क्षेत्रीय लोगों को एसडीएम से संबधित कार्यों के लिए करनाल जाना पड़ता है। कस्बे को उपमंडल का दर्जा दिए जाने पर लोगों को क्षेत्र में ही सुविधा मिल सकेगी। इस दौरान बलबीर सिंह कुचपुरा, नाथूराम बरास, सुखविंद्र गुनियाणा, नीरज कुमार, नंदलाल जांगड़ा, अनिल गोयल, कृष्ण चंद, राजू, देवेंद्र जांगड़ा, महिंद्र बस्तली, विनोद राणा बरास, कर्मचंद, रामनिवास गोयल निसिंग सहित अन्य क्षेत्र वासी मौजूद रहे।  
विज्ञापन


बैठक में आए लोगों ने कहा कि क्षेत्र में राजकीय कन्या महाविद्यालय नहीं है। क्षेत्र की बेटियों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए बसों में धक्के खाते हुए 25 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। करनाल से पुंडरी तक बीच में कोई महिला कालेज नहीं है। इसका असर बेटियों की शिक्षा पर पड़ता है। दूर दराज के कालेजों व स्कूलों में कुछ अभिभावक अपनी बिटिया को पढ़ने के लिए भेजने से कतराते है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कालेज से वापिस आने तक अभिभावकों को अपनी बेटी की चिंता सताती रहती है। भीड़ भाड़ युक्त बसों में छेड़छाड़ के मद्देनजर कुछ लड़कियां भी कालेज शिक्षा में रूचि नही दिखाती। जिस कारण पढने की चाह रखने कुछ लड़कियां की शिक्षा का सपना अधूरा रह जाता है। भाजपा सरकार बनने के बाद यह नारा दिया गया था कि बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ जब शहर में बेटियों के लिए कालेज नही होगा, तो बेटियां कैसे पढ़ सकेगी। उन्होंने सरकार से मांग की है कि लोगों को क्षेत्र में ही सभी सुविधाएं मुहैया करवाई जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed