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बिस्किट के लिए उपयोगी व कुपोषण दूर करेगी नई किस्म डीबीडब्ल्यू-296
सार
गेहूं की दूसरी नई प्रजाति डीबीडब्ल्यू-327 किस्म उच्च उत्पादन क्षमता के साथ पीला रतुआ रोग रोधी है। इसकी प्रति हेक्टेयर औसत उपज 79.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
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207: डा ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह।
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विस्तार
कर्मबीर लाठर
करनाल। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान ने गेहूं की जो तीन नई किस्में ईजाद की हैं ये रोग रोधिता होने के साथ उच्च पैदावार की क्षमता वाले हैं। गेहूं की ये नई किस्म डीबीडब्ल्यू-296 बिस्किट बनाने के लिए उपयोगी रहेगी। चपाती भी अच्छी एवं स्वादिष्ट बनेंगी। प्रोटीन व लोहे की मात्रा से भरपूर यह किस्म कुपोषण दूर करने में सहायक रहेगी। यह कम पानी वाले इलाके में कम सिंचाई की स्थिति में भी अच्छी पैदावार देगी। इस किस्म का औसत उत्पादन 56.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। जबकि उपज क्षमता 83.3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। संवाद
किस्म बदलने का विकल्प बनेंगी दो नई प्रजातियां
गेहूं की दूसरी नई प्रजाति डीबीडब्ल्यू-327 किस्म उच्च उत्पादन क्षमता के साथ पीला रतुआ रोग रोधी है। इसकी प्रति हेक्टेयर औसत उपज 79.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। उपज क्षमता 87.7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इस प्रजाति में लोहा 39.4 पीपीएम (पार्ट पर मिलियन) व जिंक की मात्रा 40.6 पीपीएम है। तीसरी नई किस्म डीबीडब्ल्यू-332 किस्म की औसत उपज 78.3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। उपज क्षमता 83 क्विंटल तक प्रति हेक्टेयर है। इस किस्म में लोहे की मात्रा 39.2 पीपीएम व प्रोटीन 12.2 प्रतिशत है।
संस्थान ने देश के किसानों के लिए तीन नई प्रजातियां विकसित की हैं। केंद्रीय प्रजाति विमोचन समिति की बैठक में मंगलवार को इन किस्मों को चिन्हित कर लिया गया है। अब इन किस्मों के नाम समिति के पास भेजे जाएंगे। जल्द ये किस्में रिलीज होंगी। डीबीडब्ल्यू-327 व डीबीडब्ल्यू-332 किसानों के पास किस्म बदलने के बेहतर विकल्प के रूप में सामने आएंगी। देश में बफर स्टॉक में गेहूं 30 मिलियन टन सरप्लस है। अब केवल गुणवत्ता पर जोर दिया जा रहा है।
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-डा. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, निदेशक, भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल
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करनाल। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान ने गेहूं की जो तीन नई किस्में ईजाद की हैं ये रोग रोधिता होने के साथ उच्च पैदावार की क्षमता वाले हैं। गेहूं की ये नई किस्म डीबीडब्ल्यू-296 बिस्किट बनाने के लिए उपयोगी रहेगी। चपाती भी अच्छी एवं स्वादिष्ट बनेंगी। प्रोटीन व लोहे की मात्रा से भरपूर यह किस्म कुपोषण दूर करने में सहायक रहेगी। यह कम पानी वाले इलाके में कम सिंचाई की स्थिति में भी अच्छी पैदावार देगी। इस किस्म का औसत उत्पादन 56.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। जबकि उपज क्षमता 83.3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। संवाद
किस्म बदलने का विकल्प बनेंगी दो नई प्रजातियां
गेहूं की दूसरी नई प्रजाति डीबीडब्ल्यू-327 किस्म उच्च उत्पादन क्षमता के साथ पीला रतुआ रोग रोधी है। इसकी प्रति हेक्टेयर औसत उपज 79.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। उपज क्षमता 87.7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इस प्रजाति में लोहा 39.4 पीपीएम (पार्ट पर मिलियन) व जिंक की मात्रा 40.6 पीपीएम है। तीसरी नई किस्म डीबीडब्ल्यू-332 किस्म की औसत उपज 78.3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। उपज क्षमता 83 क्विंटल तक प्रति हेक्टेयर है। इस किस्म में लोहे की मात्रा 39.2 पीपीएम व प्रोटीन 12.2 प्रतिशत है।
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संस्थान ने देश के किसानों के लिए तीन नई प्रजातियां विकसित की हैं। केंद्रीय प्रजाति विमोचन समिति की बैठक में मंगलवार को इन किस्मों को चिन्हित कर लिया गया है। अब इन किस्मों के नाम समिति के पास भेजे जाएंगे। जल्द ये किस्में रिलीज होंगी। डीबीडब्ल्यू-327 व डीबीडब्ल्यू-332 किसानों के पास किस्म बदलने के बेहतर विकल्प के रूप में सामने आएंगी। देश में बफर स्टॉक में गेहूं 30 मिलियन टन सरप्लस है। अब केवल गुणवत्ता पर जोर दिया जा रहा है।
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-डा. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, निदेशक, भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल