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Karnal News: विदेशों में पशुओं का सीमेन विक्रय करने की तैयारी में एनडीआरआई

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 21 Mar 2023 02:09 AM IST
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NDRI in preparation to sell animal semen abroad
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) करनाल जहां दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ अच्छी नस्लों को संरक्षित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। वहीं, तकनीक को विदेशों तक पहुंचाने और सीमेन विक्रय करने की तैयारी में जुटा है। इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने संस्थान को 10 करोड़ रुपये का फंड भी दिया है।
एनडीआरआई के निदेशक डॉ.धीर सिंह ने बताया कि संस्थान बुल (सांड़) सीमेन की क्लोनिंग पर अनुसंधान कर रहा है, यदि ये सफल रहता है तो अच्छी नस्लों के सांड़ों की कमी दूर हो जाएगी। उन्होंने बताया कि 1951 में देश में दुग्ध उत्पादन 17 मिलियन टन था, जो अब 1200 प्रतिशत वृद्धि के साथ 210 मिलियन टन हो गया है। इसमें 6.28 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हैं, जबकि पशुओं की पैदावार में एक प्रतिशत की वृद्धि है। देसी नस्लों के पशु अधिक तापसहनशील होते हैं, इसलिए अधिक दूध वाले देसी पशुओं को क्षेत्रवार पहचान कर उनके संरक्षण पर कार्य किया जा रहा है। अभी उत्पादन बेहतर है लेकिन उत्पादकता पर कार्य की जरूरत है।
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उन्होंने बताया कि एनडीआरआई की पशु क्लोनिंग तकनीक को अब सभी 19 संस्थानों व पूरे देश में साझा की जा रही है। अब दूध का क्लीनिकल टेस्ट किया जा रहा है, जिससे उसके चिकित्सीय गुणों को वैज्ञानिक तरीके से प्रमाणित किया जा सके। जैसे हल्दी वाला दूध लोग सदियों से पीते आ रहे हैं, लेकिन ये प्रमाणित नहीं है कि दूध के साथ मिलकर हल्दी का कौन सा तत्व क्या लाभ या हानि पहुंचाता है, इस पर शोध चल रहा है, शीघ्र ही प्रमाणित किया जाएगा। थनेला रोग दुग्ध उत्पादन को प्रभावित करता है, इसके लिए शोध किए हैं, तकनीक तैयार की गई है। गोमूत्र और घी का भी क्लीनिकल टेस्ट किया जा रहा है। साथ ही दूध में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने पर भी अनुसंधान किया जा रहा है।
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अच्छी नस्लों के सांड़ों की कमी होगी दूर
डॉ.धीर सिंह ने सरकार बताया कि अब डीम्ड यूनिवर्सिटी को खत्म कर विश्वविद्यालय बनाना चाहती है, इसलिए नई शिक्षा नीति आईसीएआर के सभी 19 संस्थानों पर लागू की जा रही है। सीमेन स्टाॅकिंग के लिए सरकार ने 10 करोड़ का फंड दिया है, अच्छा सीमेन तैयार कर विदेशों को निर्यात करेंगे। बुल सीमेन क्लोनिंग पर शोध चल रहा है, सफल हुआ तो अधिक दुग्ध उत्पादन वाले अच्छी नस्लों के सांड़ों की कमी दूर हो जाएगी। जो एक क्रांति होगी। इसके लिए सिर्फ बछिया (कटड़ी) ही पैदा करने के लिए सेक्स सीमेन तकनीक अभी विदेशों की है, इस तकनीक का सीमेन आयात करना होता है, जो किसान को 800 से 1200 रुपये में पड़ता है लेकिन इस पर शोध चल रहा है, शीघ्र स्वदेशी तकनीक मिल जाएगी। अभी तक शोध में आशाजनक सफलता मिलती दिख रही है। शीघ्र ही संस्थान बाजरे की लस्सी भी लॉन्च करेगा। इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं। मौके पर पशु शरीर क्रिया विज्ञान विभाग के प्रधान वैज्ञानिक एवं पीआरओ डॉ.अजय कुमार डांग भी मौजूद रहे। एनडीआरआई में 24 मार्च को डॉ. डी.सुंदरेशन व्याख्यान आयोजित किया जाएगा। जिसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ.हिमांशु पाठक बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे।
राष्ट्रीय पशु मेला आठ अप्रैल से
करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने बताया कि संस्थान के सौ साल पूरे होने पर आठ से 10 अप्रैल तक राष्ट्रीय पशु मेला आयोजित किया जाएगा। जिसमें एनडीआरआई की ओर से विकसित विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन होगा। वहीं, देशभर से करीब एक लाख किसानों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। किसान अपने पशु लेकर आएंगे। इसमें केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर के पहुंचने की अनुमति मिल चुकी है। राष्ट्रपति को भी आमंत्रित किया गया है।

निदेशक डॉ. धीर सिंह ने बताया कि संस्थान का ये 100वां वर्ष है। इसलिए सभी में विशेष उत्साह भी है। एनडीआरआई ने पिछले वर्षों में जो भी तकनीक विकसित की है, उन सभी का इस मेले में विशेष प्रदर्शन किया जाएगा। नस्ल सुधार, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, क्नोलिंग आदि तकनीक विशेष है। शीघ्र मेले का पोस्टर भी जारी किया जाएगा। इसकी तिथि आठ, नौ व 10 अप्रैल होगी। जो किसान पशु लेकर आएंगे, उनके लिए भी विशेष तैयारियां की जा रही हैं।
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