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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने एनडीआरआई में लिया था पशुपालन का प्रशिक्षण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 30 Jan 2022 02:18 AM IST
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NDRI has saved memories related to Mahatma Gandhi even today
करनाल। अहिंसा परमो धर्म: के पुजारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को पशुओं से बेहद लगाव था। यही कारण है कि उन्होंने जून 1927 में राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) से पशुपालन का प्रशिक्षण लिया था। तब यह संस्थान बेंगलुरु में इंपीरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर एनिमल हसबेंडरी एंड डेयरिंग के नाम से था। 1936 में इसका नाम इंपीरियल डेयरी इंस्टीट्यूट पड़ा। इसके बाद 1955 में इसे करनाल स्थानांतरित किया गया और फिर इसका नाम राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान रखा गया। आज भी संस्थान में प्रशिक्षण के दौरान की गांधी जी से जुड़ी यादें सहेज कर रखी हुईं हैं।
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अहिंसा के बल पर देश के लिए स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने पशुओं में नस्ल सुधार के लिए भी उल्लेखनीय कार्य किया था। इससे पहले उन्होंने एनडीआरआई जो उस दौरान बेंगलुरु में इंपीरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर एनिमल हसबेंडरी एंड डेयरिंग के नाम से स्थित था, वहां से प्रशिक्षण लिया था। बताया जाता है कि गांधी जी को गाय की अपेक्षा बकरी का दूध अधिक पसंद था। शायद इसीलिए गांधी जी बकरी को गरीब का धन कहा करते थे। वैज्ञानिक भी बताते हैं कि बकरी के दूध में लैक्टोज तत्व कम होता है और यह आसानी से पचता है। जंगलों में विभिन्न औषधीय पौधों की पत्तियां खाने से इसका दूध गुणकारी होता है। एनडीआरआई के निदेशक डॉ. एमएस चौहान बताते हैं कि आज भी गांधी से जुड़ी तमाम यादें संस्थान में संजोकर रखी गईं हैं। इसमें ‘जिल’ नस्ल की गाय के साथ गांधी जी और पंडित मदन मोहन मालवीय की तस्वीर भी शामिल है। इसके अलावा भी गांधी जी से जुड़ी कई यादें संस्थान में मौजूद है।
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