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एनडीआरआई में दो और पशुओं की मौत
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राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में संदिग्ध बीमारी की ग्रस्त में आए दो और पशुओं की मौत हो गई है। पशुओं की मौत की सिलसिला नहीं रुकना गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर रहा है। वहीं, संस्थान इस बाबत कुछ भी बताने से गुरेज कर रहा है। संस्थान ने चार मुर्राह कटड़ियों सहित 43 भैंसों की मौत की पुष्टि की थी। उसके बाद संस्थान में इतनी चौकसी बरती जा रही है कि कोई बात उजागर नहीं हो। सोमवार को इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट बरेली से दो विशेषज्ञों की टीम एनडीआरआई में पहुंची। पैथलॉजिस्ट की टीम पोस्टमार्टम की कार्रवाई करती है। इससे जाहिर है कि पशुओं की मौत हुई तभी उसे बुलाया गया। आईवीआरआई की ओर से तीन विशेषज्ञों की टीम तैयार है जो मंगलवार को करनाल पहुंचेगी।
11 सितंबर को दो मुर्राह भैंसों की मौत होने से संस्थान में हड़कंप मच गया था। पशुधन अनुसंधान केंद्र में मुर्राह भैंसों की लगातार मौतें होती गई। कई दिन तक गुपचुप मृत भैंसों को दबाया जाता रहा। भनक लगते ही यह मामला सुर्खियों में आ गया। जिससे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में भी हड़कंप मचा हुआ है। एनडीआरआई, लाला लाजपत राय वेटरनरी यूनिवर्सिटी हिसार, आईएआरआई-बरेली व पशुपालन विभाग हरियाणा के चिकित्सक बीमार भैंसों के उपचार में जुटे। सघन चिकित्सा के बाद भी भैंसों की मौत का मामला सामने आया है। हालांकि बीमार भैंसों को अलग रखा गया और उनका उपचार किया जा रहा है। कैटल यार्ड में संक्रमण के भय से सफाई पर पूरा जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने तमाम प्रयास किए। गजब की बात है कि तीन बड़े संस्थानों ने अभी जांच रिपोर्ट का खुलासा तक नहीं किया। 13 दिन बीत चुके हैं। अभी तक पशुओं की मौत के कारणों का पता नहीं चल सका।
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11 सितंबर को दो मुर्राह भैंसों की मौत होने से संस्थान में हड़कंप मच गया था। पशुधन अनुसंधान केंद्र में मुर्राह भैंसों की लगातार मौतें होती गई। कई दिन तक गुपचुप मृत भैंसों को दबाया जाता रहा। भनक लगते ही यह मामला सुर्खियों में आ गया। जिससे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में भी हड़कंप मचा हुआ है। एनडीआरआई, लाला लाजपत राय वेटरनरी यूनिवर्सिटी हिसार, आईएआरआई-बरेली व पशुपालन विभाग हरियाणा के चिकित्सक बीमार भैंसों के उपचार में जुटे। सघन चिकित्सा के बाद भी भैंसों की मौत का मामला सामने आया है। हालांकि बीमार भैंसों को अलग रखा गया और उनका उपचार किया जा रहा है। कैटल यार्ड में संक्रमण के भय से सफाई पर पूरा जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने तमाम प्रयास किए। गजब की बात है कि तीन बड़े संस्थानों ने अभी जांच रिपोर्ट का खुलासा तक नहीं किया। 13 दिन बीत चुके हैं। अभी तक पशुओं की मौत के कारणों का पता नहीं चल सका।
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