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नवरात्र

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 26 Sep 2022 03:03 AM IST
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करनाल। शारदीय नवरात्र सोमवार से शुरू हो रहे हैं। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। इसके लिए शहर से लेकर गांव तक माता के मंदिरों को सजा दिया गया है। बाजार में भी रविवार को नवरात्र से पहले लोगों ने व्रत और पूजन से संबंधित सामग्री की जमकर खरीदारी की। सबसे खास बात ये है कि इस दिन माता भगवती हाथी पर सवार होकर आ रही हैं, जो देश और समाज के लिए बेहद सुखद और फलदायी है।
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ज्योतिषाचार्य पंडित भूदेव शंखधार एवं श्री दुर्गा भवानी (हेतु वाली) मंदिर के पुजारी पंडित शिव कुमार शुक्ला ने बताया कि इस बार शारदीय नवरात्र विशेष फलदायी है। क्योंकि इस बार माता रानी हाथी (गज) की सवारी पर आ रही हैं। शास्त्रों में वर्णित है कि जब भी माता हाथी की सवारी करती हैं तो सवत्र अच्छा होता है। इससे व्यापारियों, कारोबारियों, उद्यमियों के साथ साथ जन सामान्य तक सभी सुख प्राप्त करते हैं। जो लोग निष्ठा से माता का पूजन करते हैं, उनके बड़े बड़े कष्ट भी समाप्त हो जाते है। माता उनके पापों का माफ करते हुए उन पर आनंद और धन धान्य की बारिश करती हैं। नवरात्र पर व्रत रखें, पूर्ण निष्ठा और विश्वास से पूजन करें।
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माता की प्रतिमा के साथ हाथी प्रतीक का भी करें स्थापना
-ज्योतिषाचार्य भूदेव शंखधार ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए ये खास मौका है। इसलिए व्रतधारी पूजन करने वालों को चाहिए कि वह कलश स्थापना के साथ साथ माता के पास की धातु निर्मित हाथी के प्रतीक की भी स्थापना करें। हाथी का प्रतीक लोहे का नहीं होना चाहिए। पीतल, तांबा या चांदी का हो तो सबसे बेहतर है। नौ दिनों तक पूजा अर्चना के बाद इस धातु निर्मित हाथी के प्रतीक को अपने गल्ला, तिजोरी या वहां रखें, जहां धन, आभूषण आदि रखे जाते हैं, तो ऐसे परिवारों में धन के नए स्रोत खुलेंगे।
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दुर्गा सप्तशती का करें नियमित पाठ
-नवरात्र के दौरान यानी 26 सितंबर से चार अक्तूबर तक दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। जिसका नियम ये है कि या तो एक ही दिन में पूरी पुस्तक का पाठ करें, अन्यथा पहले कवच पाठ, फिर अर्गला स्त्रोत, फिर कीलक पाठ करें, शेष दिनों में हर रोज एक दो अध्याय का पाठ करें। अंत में सिद्धकुंज का स्त्रोत करें। नौ दिनों में पूरे 13 अध्यायों का पाठ आवश्यक है

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कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
-सुबह 6.11 बजे से 7.51 बजे तक अमृत मुहूर्त रहेगा। इसके बाद दोपहर को 11.48 बजे से 12.36 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना और देवी प्रतिमाओं की स्थापना बेहद शुभ रहेगी।
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