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रहस्यमयी बीमारी से तीन भैंसों की मौत, 25 बीमार
करनाल
Updated Sun, 23 Mar 2014 11:45 PM IST
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गांव न्यू झींडा स्थित एक पशुपालक के पशु बाडे़ में रहस्यमयी बीमारी की
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चपेट में आने से दो दुधारू भैंसों व एक गर्भवती भैंस की मौत हो गई।
इस बीमारी से गांव में 25 से अधिक मवेशी बीमार हैं। लाख जतन के बावजूद बीमारी समझ में नहीं आ रही है।
पशुपालक सूरत सिंह ने बताया कि पांच दिन पहले उनके बाड़े में एकाएक सभी मवेशियों ने घास खाना बंद कर दिया था। सरसरी तौर देखने से सभी मवेशियों को बुखार के लक्षण थे व मवेशियों के शरीर का तापमान सामान्य से अधिक लग रहा था।
उन्होंने बताया कि उसी दिन उन्होंने पशु चिकित्सक तरसेम राणा से संपर्क किया, जिन्होंने आकर पशुओं का इलाज शुरू किया, लेकिन इलाज के दौरान ही तीन मवेशियों ने दम तोड़ दिया। उन्होंने बताया इस समय पशु बाड़े में दो दर्जन से अधिक मवेशियों को अब भी बुखार है। पशुपालक ने बताया कि इस समय बीमार दुधारू पशुओं के दूध का रंग नीला है व पीने लायक नहीं है।
दूध दूहने के बाद वे उपयोग में लाने के बजाय बहा देते हैं। उन्होंने बताया कि पशुओं की मौत से जहां एक ओर उन्हें लाखों रुपये आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, वहीं दूसरी ओर अब तक प्रति दिन हजारों रुपये दवाओं पर भी खर्च हो रहे हैं। इस घटना से पूरे गांव में भी पशुपालकों में दहशत का माहौल है। पशु चिकित्सक डॉ. तरसेम राणा ने बताया कि दो दिन पहले पशुपालक ने उन्हें सूचना दी थी।
सूचना पाकर वे गांव गए थे और लक्षणों के आधार पर बीमार मवेशियों का इलाज किया था। उन्होंने कहा कि फिलहाल शेष पशु खतरे से बाहर हैं। उन्होंने बताया कि यह निश्चित तौर पर कहना कठिन है कि वास्तव में पशु किस बीमारी से ग्रसित हैं। विभाग के डाक्टरों की टीम मवेशियों पर नजर रखे है। सोमवार को विशेषज्ञों का एक दल गांव का दौरा करेगा।
इस बीमारी से गांव में 25 से अधिक मवेशी बीमार हैं। लाख जतन के बावजूद बीमारी समझ में नहीं आ रही है।
पशुपालक सूरत सिंह ने बताया कि पांच दिन पहले उनके बाड़े में एकाएक सभी मवेशियों ने घास खाना बंद कर दिया था। सरसरी तौर देखने से सभी मवेशियों को बुखार के लक्षण थे व मवेशियों के शरीर का तापमान सामान्य से अधिक लग रहा था।
उन्होंने बताया कि उसी दिन उन्होंने पशु चिकित्सक तरसेम राणा से संपर्क किया, जिन्होंने आकर पशुओं का इलाज शुरू किया, लेकिन इलाज के दौरान ही तीन मवेशियों ने दम तोड़ दिया। उन्होंने बताया इस समय पशु बाड़े में दो दर्जन से अधिक मवेशियों को अब भी बुखार है। पशुपालक ने बताया कि इस समय बीमार दुधारू पशुओं के दूध का रंग नीला है व पीने लायक नहीं है।
दूध दूहने के बाद वे उपयोग में लाने के बजाय बहा देते हैं। उन्होंने बताया कि पशुओं की मौत से जहां एक ओर उन्हें लाखों रुपये आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, वहीं दूसरी ओर अब तक प्रति दिन हजारों रुपये दवाओं पर भी खर्च हो रहे हैं। इस घटना से पूरे गांव में भी पशुपालकों में दहशत का माहौल है। पशु चिकित्सक डॉ. तरसेम राणा ने बताया कि दो दिन पहले पशुपालक ने उन्हें सूचना दी थी।
सूचना पाकर वे गांव गए थे और लक्षणों के आधार पर बीमार मवेशियों का इलाज किया था। उन्होंने कहा कि फिलहाल शेष पशु खतरे से बाहर हैं। उन्होंने बताया कि यह निश्चित तौर पर कहना कठिन है कि वास्तव में पशु किस बीमारी से ग्रसित हैं। विभाग के डाक्टरों की टीम मवेशियों पर नजर रखे है। सोमवार को विशेषज्ञों का एक दल गांव का दौरा करेगा।