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‘मेरा छोटा सा संसार प्रभु आ जाओ इक बार’
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। श्री आत्म मनोहर जैन आराधना मंदिर में महाप्रभावी श्री घंटाकर्ण महावीर देवता के विशेष कृपा दिवस पर मासिक श्रद्धालु संगम का आयोजन किया गया। शुक्रवार सुबह श्री घंटाकर्ण बीजमंत्र के सामूहिक जाप से दैवी शक्ति का आह्वान करते हुए विश्व मंगल, लोक कल्याण की कामना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। ‘देना है तो दीजिए जन्म-जन्म का साथ, ‘मेरे सर पर रख दो दादा अपने दोनों हाथ’, ‘जयकारा जयकारा बोलो सभी शुद्ध मन से भक्ति भाव से, मेरा छोटा सा संसार प्रभु आ जाओ इक बार’, ‘अब द्वार तुम्हारे मैं आया प्रभु दे दो मुझे अपना प्यार’। ‘जो वी दर तेरे आंदा, ओह निहाल हो जांदा’ आदि भजनों की स्वरलहरियों में श्रद्धालु झूमते रहे।
साध्वी प्रमिला महाराज ने कहा कि श्री घंटाकर्ण जी 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के शासनरक्षक देव, शैव परंपरा के अनुसार शिवजी के गण, बद्रीनाथ तीर्थधाम के क्षेत्रपाल देव और बौद्ध मान्यता के मुताबिक मंत्र तंत्र यंत्र की साधना में सफलता सुनिश्चित करने वाले प्रभावशाली देवता हैं। इन्हें बावन वीरों में तीसवां स्थान और वीरों की परिषद में सेनापति का गौरवशाली स्थान प्राप्त है। भक्ति अलौकिक दिव्य शक्तियों की कृपा से स्वयं को मालामाल करने का माध्यम है। भक्ति में सर्वस्व अपने आराध्य के चरणों में समर्पित कर दिया जाता है और समर्पित भक्तों की चिंता स्वयं प्रभु को होती है।
कलयुग में सभी दोष होने पर भी सिर्फ नाम-सुमिरण, भक्ति-कीर्तन से भवसागर को पार किया जा सकता है। प्रभु भजन करने तथा कराने वाले भाग्यवान और कृतार्थ हैं। भारतीय संस्कृति में भक्ति आत्मा को परमात्मा तक पहुंचाने का माध्यम है। भक्तिपूर्ण समर्पण से असंभव को भी संभव किया जा सकता है और पराशक्तियों की दैवी कृपा से अलौकिक सफलता पाई जा सकती है। इस अवसर पर बृहत घंटाकर्ण स्तोत्र सुनाया गया। आरती तथा भंडारे की व्यवस्था राजन जैन और मनोज जैन मालेरकोटला ने किया।
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करनाल। श्री आत्म मनोहर जैन आराधना मंदिर में महाप्रभावी श्री घंटाकर्ण महावीर देवता के विशेष कृपा दिवस पर मासिक श्रद्धालु संगम का आयोजन किया गया। शुक्रवार सुबह श्री घंटाकर्ण बीजमंत्र के सामूहिक जाप से दैवी शक्ति का आह्वान करते हुए विश्व मंगल, लोक कल्याण की कामना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। ‘देना है तो दीजिए जन्म-जन्म का साथ, ‘मेरे सर पर रख दो दादा अपने दोनों हाथ’, ‘जयकारा जयकारा बोलो सभी शुद्ध मन से भक्ति भाव से, मेरा छोटा सा संसार प्रभु आ जाओ इक बार’, ‘अब द्वार तुम्हारे मैं आया प्रभु दे दो मुझे अपना प्यार’। ‘जो वी दर तेरे आंदा, ओह निहाल हो जांदा’ आदि भजनों की स्वरलहरियों में श्रद्धालु झूमते रहे।
साध्वी प्रमिला महाराज ने कहा कि श्री घंटाकर्ण जी 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के शासनरक्षक देव, शैव परंपरा के अनुसार शिवजी के गण, बद्रीनाथ तीर्थधाम के क्षेत्रपाल देव और बौद्ध मान्यता के मुताबिक मंत्र तंत्र यंत्र की साधना में सफलता सुनिश्चित करने वाले प्रभावशाली देवता हैं। इन्हें बावन वीरों में तीसवां स्थान और वीरों की परिषद में सेनापति का गौरवशाली स्थान प्राप्त है। भक्ति अलौकिक दिव्य शक्तियों की कृपा से स्वयं को मालामाल करने का माध्यम है। भक्ति में सर्वस्व अपने आराध्य के चरणों में समर्पित कर दिया जाता है और समर्पित भक्तों की चिंता स्वयं प्रभु को होती है।
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कलयुग में सभी दोष होने पर भी सिर्फ नाम-सुमिरण, भक्ति-कीर्तन से भवसागर को पार किया जा सकता है। प्रभु भजन करने तथा कराने वाले भाग्यवान और कृतार्थ हैं। भारतीय संस्कृति में भक्ति आत्मा को परमात्मा तक पहुंचाने का माध्यम है। भक्तिपूर्ण समर्पण से असंभव को भी संभव किया जा सकता है और पराशक्तियों की दैवी कृपा से अलौकिक सफलता पाई जा सकती है। इस अवसर पर बृहत घंटाकर्ण स्तोत्र सुनाया गया। आरती तथा भंडारे की व्यवस्था राजन जैन और मनोज जैन मालेरकोटला ने किया।
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