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Karnal News: सुरक्षित नहीं अधिकतर स्कूल वाहन
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। महेंद्रगढ़ हादसे के बाद जांच हुई तो यह पता चला कि जिले में चार साल तक कई स्कूलों के विद्यार्थी घर से स्कूल तक का सफर खतरनाक वाहनों में कर रहे हैं। इन वाहनों के न तो दस्तावेज और सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के नियम पूरे थे और न ही इनके पास फिटनेस प्रमाणपत्र था। अब सख्ती बढ़ी है तो कुछ वाहनों के हालात सुधरने लगे हैं।
स्थिति यह है कि 15 अप्रैल से लेकर अब तक हुई पासिंग व जांच प्रक्रिया में जिले में 123 स्कूल बसें ऐसी पकड़ी जा चुकी हैं, जिनके पास फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं था। कुछ बसें तो ऐसी थी जिनकी पासिंग 2020 के बाद हुई ही नहीं। अब ये बसें सख्ती बढ़ने के बाद पासिंग मैदान में पहुंची तो इनमें से करीब 16 बसें ऐसी मिली, जिनकी विभाग को मजबूरन फाइल रोकनी पड़ी।
क्योंकि पासिंग कराने के लिए मैदान में पहुंचने से पहले संचालकों ने बसों को दुरुस्त करना जरूरी नहीं समझा। किसी बस में अग्निशमन संयंत्र एक्सपायर मिले तो किसी के टायर पूरी तरह से घीसे हुए थे। इसके अलावा कुछ बसों के फर्श बिना मैट के थे, ऐसे में ये घिसी हालत में थे। खिड़कियों के कवर हटे थे। सीटें भी फटी मिली।
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इसके अलावा चालक भी वर्दी नहीं था। जिले में करीब 450 स्कूलों की 1200 के करीब छोटी-बड़ी गाड़ियां बच्चों को लाने-लेजाने के लिए पंजीकृत हैं। इनमें कई वाहनों में बड़ी खामियां हैं। अब अधिकारी महेंद्रगढ़ हादसे के बाद सतर्क हुए तो सख्ती से जांच होने लगी है।
डीटीओ ने रास्ते में रोककर जांची 13 बसें
पासिंग के साथ ही जांच का मोर्चा जिला परिवहन अधिकारी (डीटीओ) विजय देसवाल ने खुद संभाल लिया है। शनिवार को सेक्टर-32 के मैदान में पासिंग के लिए लगे विशेष शिविर में वे स्वयं पहुंचे और बसों की स्थिति देखी। इसके अलावा बीच रास्ते सड़कों पर 13 बसों को रोककर जांचा। पासिंग मैदान में कुल 14 स्कूल बसें पहुंची थी, इनमें से 11 पास हुई। जबकि शीशा टूटने, सीट फटी होने और एचएसआरपी के न होने के कारण तीन बसों की फाइल रोकी गई।
स्कूल बसों की जांच हर माह होती है। ग्रामीण क्षेत्र की कुछ बसें अब जांच में पकड़ी गई हैं, जिनके पास फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं था। अब तक की जांच में 123 बसें आई हैं, जिनकी पासिंग की गई है। 26 अप्रैल के बाद सख्ती से जांच करेंगे। उस दौरान लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी। - विजय देसवाल, डीटीओ।
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करनाल। महेंद्रगढ़ हादसे के बाद जांच हुई तो यह पता चला कि जिले में चार साल तक कई स्कूलों के विद्यार्थी घर से स्कूल तक का सफर खतरनाक वाहनों में कर रहे हैं। इन वाहनों के न तो दस्तावेज और सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के नियम पूरे थे और न ही इनके पास फिटनेस प्रमाणपत्र था। अब सख्ती बढ़ी है तो कुछ वाहनों के हालात सुधरने लगे हैं।
स्थिति यह है कि 15 अप्रैल से लेकर अब तक हुई पासिंग व जांच प्रक्रिया में जिले में 123 स्कूल बसें ऐसी पकड़ी जा चुकी हैं, जिनके पास फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं था। कुछ बसें तो ऐसी थी जिनकी पासिंग 2020 के बाद हुई ही नहीं। अब ये बसें सख्ती बढ़ने के बाद पासिंग मैदान में पहुंची तो इनमें से करीब 16 बसें ऐसी मिली, जिनकी विभाग को मजबूरन फाइल रोकनी पड़ी।
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क्योंकि पासिंग कराने के लिए मैदान में पहुंचने से पहले संचालकों ने बसों को दुरुस्त करना जरूरी नहीं समझा। किसी बस में अग्निशमन संयंत्र एक्सपायर मिले तो किसी के टायर पूरी तरह से घीसे हुए थे। इसके अलावा कुछ बसों के फर्श बिना मैट के थे, ऐसे में ये घिसी हालत में थे। खिड़कियों के कवर हटे थे। सीटें भी फटी मिली।
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इसके अलावा चालक भी वर्दी नहीं था। जिले में करीब 450 स्कूलों की 1200 के करीब छोटी-बड़ी गाड़ियां बच्चों को लाने-लेजाने के लिए पंजीकृत हैं। इनमें कई वाहनों में बड़ी खामियां हैं। अब अधिकारी महेंद्रगढ़ हादसे के बाद सतर्क हुए तो सख्ती से जांच होने लगी है।
डीटीओ ने रास्ते में रोककर जांची 13 बसें
पासिंग के साथ ही जांच का मोर्चा जिला परिवहन अधिकारी (डीटीओ) विजय देसवाल ने खुद संभाल लिया है। शनिवार को सेक्टर-32 के मैदान में पासिंग के लिए लगे विशेष शिविर में वे स्वयं पहुंचे और बसों की स्थिति देखी। इसके अलावा बीच रास्ते सड़कों पर 13 बसों को रोककर जांचा। पासिंग मैदान में कुल 14 स्कूल बसें पहुंची थी, इनमें से 11 पास हुई। जबकि शीशा टूटने, सीट फटी होने और एचएसआरपी के न होने के कारण तीन बसों की फाइल रोकी गई।
स्कूल बसों की जांच हर माह होती है। ग्रामीण क्षेत्र की कुछ बसें अब जांच में पकड़ी गई हैं, जिनके पास फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं था। अब तक की जांच में 123 बसें आई हैं, जिनकी पासिंग की गई है। 26 अप्रैल के बाद सख्ती से जांच करेंगे। उस दौरान लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी। - विजय देसवाल, डीटीओ।