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इस बार दगा देगा मानसून
अमर उजाला/ब्यूरो, करनाल
Updated Sat, 21 Jun 2014 12:28 AM IST
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इस बार मानसून कई बार अपना रंग बदलेगा। हरियाणा में 28 जून को
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मानसून दस्तक देने जा रहा है। बारिशों का यह मौसम मिडल स्टेज पर आकर
हरियाणा को धोखा दे जाएगा। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस बार 15 से 20
प्रतिशत कम बारिश होगी। मानसून उस वक्त किसानों को दगा देगा, जब फसलों को
बारिश बहुत जरूरत होगी। एक हफ्ते में उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में मानसून
पहुंच जाएगा।
प्रदेश में मानसून में औसतन 600 एमएम बारिश होती है जो इस बार 450 से 500 एमएम तक रह सकती है। करनाल स्थित केंद्रीय मृदा लवणता शोध संस्थान के मौसम विभाग के डायरेक्टर डॉ. डीएस बुंदेला ने बताया कि मानसून के आगाज के साथ ही एक-दो बड़ी बारिश होंगी, लेकिन जैसे-जैसे धान को बारिश की जरूरत होगी बारिश बंद हो जाएंगी। मानसून दो दिन मे लखनऊ तक पहुंच जाएगा और अगले हफ्ते 28-29 जून को मानसून की पहली बारिश होने की प्रबल संभावनाएं बन रही हैं।
प्रदेश में हर साल औसतन 743 एमएम बारिश होती है, जिसमें मानसून की 600 से 650 एमएम बारिश शामिल है। इस साल रेनफॉल डेफिसिट पांच-छह प्रतिशत नहीं, बल्कि 15 से 20 तक प्रतिशत रहेगा। हालांकि मौसम वैज्ञानिक इसे बड़ा अंतर नहीं मानते हैं, लेकिन बारिशों का अंतराल ज्यादा होने की संभावना है, जो लोगों और फसलों के लिए चिंताजनक है।
दो माह की होगी अवधि
डॉ. बुंदेला ने बताया कि मूसलाधार शुरुआत के बाद मानसून अपनी बीच की अवधि में जाकर टूट जाएगा। चूंकि इस बार गर्मी देरी से शुरू हुई, इसलिए मानसून भी उसी अनुपात मेें आगे बढ़ा है। यह बिहार में प्रवेश कर चुका है और दो दिन में उत्तर-पश्चिमी भारत में आगे बढ़ जाएगा। सितंबर के पहले हफ्ते में यह लौटेगा। उन्होंने बताया कि मानसून हिमालय को क्रॉस नहीं करता है और यहीं से लौटता है। लौटते मानसून में भी अच्छी बारिश की गुंजाइश रहती है।
प्रदेश में मानसून में औसतन 600 एमएम बारिश होती है जो इस बार 450 से 500 एमएम तक रह सकती है। करनाल स्थित केंद्रीय मृदा लवणता शोध संस्थान के मौसम विभाग के डायरेक्टर डॉ. डीएस बुंदेला ने बताया कि मानसून के आगाज के साथ ही एक-दो बड़ी बारिश होंगी, लेकिन जैसे-जैसे धान को बारिश की जरूरत होगी बारिश बंद हो जाएंगी। मानसून दो दिन मे लखनऊ तक पहुंच जाएगा और अगले हफ्ते 28-29 जून को मानसून की पहली बारिश होने की प्रबल संभावनाएं बन रही हैं।
प्रदेश में हर साल औसतन 743 एमएम बारिश होती है, जिसमें मानसून की 600 से 650 एमएम बारिश शामिल है। इस साल रेनफॉल डेफिसिट पांच-छह प्रतिशत नहीं, बल्कि 15 से 20 तक प्रतिशत रहेगा। हालांकि मौसम वैज्ञानिक इसे बड़ा अंतर नहीं मानते हैं, लेकिन बारिशों का अंतराल ज्यादा होने की संभावना है, जो लोगों और फसलों के लिए चिंताजनक है।
दो माह की होगी अवधि
डॉ. बुंदेला ने बताया कि मूसलाधार शुरुआत के बाद मानसून अपनी बीच की अवधि में जाकर टूट जाएगा। चूंकि इस बार गर्मी देरी से शुरू हुई, इसलिए मानसून भी उसी अनुपात मेें आगे बढ़ा है। यह बिहार में प्रवेश कर चुका है और दो दिन में उत्तर-पश्चिमी भारत में आगे बढ़ जाएगा। सितंबर के पहले हफ्ते में यह लौटेगा। उन्होंने बताया कि मानसून हिमालय को क्रॉस नहीं करता है और यहीं से लौटता है। लौटते मानसून में भी अच्छी बारिश की गुंजाइश रहती है।