{"_id":"681bc9bac9bc3e12b20e9f6f","slug":"mock-drill-emergency-work-started-as-soon-as-the-siren-sounded-trapped-people-were-evacuated-karnal-news-c-18-knl1008-641222-2025-05-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"मॉकड्रिल : सायरन बजते ही शुरू हुए आपात कार्य, फंसे लोगों को निकाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मॉकड्रिल : सायरन बजते ही शुरू हुए आपात कार्य, फंसे लोगों को निकाला
विज्ञापन
शहर में पांच स्थानों पर तय समय पर हुई मॉकड्रिल, इससे पहले डीसी ने की प्रेस कॉन्फेंस, भयभीत न होने की अपील
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जिस तरह वर्ष 1971 के युद्ध की स्थिति के दौरान सायरन बजाकर लोगों को सतर्क किया जाता था, हमले से बचने को ब्लैकआउट किया जाता था, इसी अंदाज में बुधवार को देशव्यापी नागरिक सुरक्षा अभ्यास करनाल में भी किया गया। इसमें शहर में पांच स्थानों पर शाम 4 बजे सायरन बजाकर आपात स्थिति की मॉकड्रिल की गई। वहीं रात को 7.50 बजे से 10 मिनट के लिए ब्लैक आउट किया गया। जिसके शहर में अंधेरा छा गया, जो देश के लिए था।
बुधवार दोपहर को उपायुक्त उत्तम सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके लोगों को सतर्क किया था कि शाम को चार बजे यदि कहीं सायरन की आवाज सुनाई दे तो भयभीत न हों। मॉकड्रिल समय पर शुरू हुई। ठीक शाम चार बजे लघु सचिवालय परिसर, पुराना बस अड्डा, यूएचबीवीएन भवन और राजकीय कॉलेज और पुरानी सब्जी मंडी के नजदीक पब्लिक हेल्थ के कार्यालय में सायरन बजा और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के चेयरमैन एवं डीसी उत्तम सिंह के नेतृत्व में जिला में योजनाबद्ध तरीके से नागरिक सुरक्षा अभ्यास किया गया। जिसमें आपदा की स्थिति में हुई जान माल की रक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई। नागरिक सुरक्षा तंत्र और आपातकालीन प्रतिक्रिया का परीक्षण के तहत जिन भवनों में प्रथम, द्वितीय व तृतीय तल पर लोग मौजूद थे वे तुरंत प्रभाव से भू तल पर आ गए और स्वयं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए। जहां कहीं भी आपदा की स्थिति के दौरान लोग ऊपरी तलों पर फंस गए थे उन्हें सुरक्षित तरीके से फायर ब्रिगेड कर्मियों, एसडीआरएफ, पुलिस व आपदा मित्रों द्वारा नीचे उतारा गया और इलाज के लिए निकटवर्ती अस्पताल में पहुंचाया गया।
छाया अंधेरा
जिला प्रशासन की ओर से निर्धारित समय 7.50 बजे लोगों ने अपने घरों, दुकानों की बिजली बंद कर दी। मुख्य रास्तों को छोड़कर अन्य सभी स्थानों पर अंधेरा छा गया। पूरा शहर अंधेरे में डूब गया। ठीक आठ बजे एक बार फिर शहर रोशन हो उठा। 10 मिनट का ब्लैकआउट रहा। जिसमें 1971 के युद्ध की याद को ताजा कर दिया। ब्लैकआउट को लेकर घरों से लेकर बाजारों तक दिनभर चर्चा रही। जब बिजली होते हुई भी घरों की बिजली बंद की गई तो बच्चों के सवालों पर बुजुर्गों ने उन्हें 1971 के बारत-पाक युद्ध के साथ ब्लैक आउट क्यों किया जाता था, इसके बारे में भी समझाया।
विज्ञापन
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जिस तरह वर्ष 1971 के युद्ध की स्थिति के दौरान सायरन बजाकर लोगों को सतर्क किया जाता था, हमले से बचने को ब्लैकआउट किया जाता था, इसी अंदाज में बुधवार को देशव्यापी नागरिक सुरक्षा अभ्यास करनाल में भी किया गया। इसमें शहर में पांच स्थानों पर शाम 4 बजे सायरन बजाकर आपात स्थिति की मॉकड्रिल की गई। वहीं रात को 7.50 बजे से 10 मिनट के लिए ब्लैक आउट किया गया। जिसके शहर में अंधेरा छा गया, जो देश के लिए था।
बुधवार दोपहर को उपायुक्त उत्तम सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके लोगों को सतर्क किया था कि शाम को चार बजे यदि कहीं सायरन की आवाज सुनाई दे तो भयभीत न हों। मॉकड्रिल समय पर शुरू हुई। ठीक शाम चार बजे लघु सचिवालय परिसर, पुराना बस अड्डा, यूएचबीवीएन भवन और राजकीय कॉलेज और पुरानी सब्जी मंडी के नजदीक पब्लिक हेल्थ के कार्यालय में सायरन बजा और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के चेयरमैन एवं डीसी उत्तम सिंह के नेतृत्व में जिला में योजनाबद्ध तरीके से नागरिक सुरक्षा अभ्यास किया गया। जिसमें आपदा की स्थिति में हुई जान माल की रक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई। नागरिक सुरक्षा तंत्र और आपातकालीन प्रतिक्रिया का परीक्षण के तहत जिन भवनों में प्रथम, द्वितीय व तृतीय तल पर लोग मौजूद थे वे तुरंत प्रभाव से भू तल पर आ गए और स्वयं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए। जहां कहीं भी आपदा की स्थिति के दौरान लोग ऊपरी तलों पर फंस गए थे उन्हें सुरक्षित तरीके से फायर ब्रिगेड कर्मियों, एसडीआरएफ, पुलिस व आपदा मित्रों द्वारा नीचे उतारा गया और इलाज के लिए निकटवर्ती अस्पताल में पहुंचाया गया।
विज्ञापन
छाया अंधेरा
जिला प्रशासन की ओर से निर्धारित समय 7.50 बजे लोगों ने अपने घरों, दुकानों की बिजली बंद कर दी। मुख्य रास्तों को छोड़कर अन्य सभी स्थानों पर अंधेरा छा गया। पूरा शहर अंधेरे में डूब गया। ठीक आठ बजे एक बार फिर शहर रोशन हो उठा। 10 मिनट का ब्लैकआउट रहा। जिसमें 1971 के युद्ध की याद को ताजा कर दिया। ब्लैकआउट को लेकर घरों से लेकर बाजारों तक दिनभर चर्चा रही। जब बिजली होते हुई भी घरों की बिजली बंद की गई तो बच्चों के सवालों पर बुजुर्गों ने उन्हें 1971 के बारत-पाक युद्ध के साथ ब्लैक आउट क्यों किया जाता था, इसके बारे में भी समझाया।
विज्ञापन