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शिकंजा : फीडर से लेकर मीटर तक करेंट होगा ऑनलाइन
अमर उजाला, करनाल
Updated Sat, 10 May 2014 08:55 PM IST
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बिजली निगम ने बिजली चोरी रोकने के लिए ऑनलाइन सिस्टम पर काम करने का प्लान बनाया है। इसके तहत फीडर से लेकर मीटर तक जाने वाला करेंट निगम की निगरानी में रहेगा। फीडर पर जितनी यूनिट छोड़ी जाएगी और आगे मीटरों में यूनिट कम निकाली तो सॉफ्टवेयर दर्शा देगा कि उक्त नंबर मीटर से बिजली बर्बाद हुई है।
इस प्लान पर सर्वे चल रहा है और आगामी जून महीने में सिस्टम को ऑनलाइन कर दिया जाएगा। फिलहाल इस सिस्टम का टेंडर एचसीएल (हारट्रान कारपोरेशन लिमिटेड) को दिया है। जिसको बिजली निगम ने करनाल शहरी एरिया का डाटा उपलब्ध करा दिया है। शहरी एरिया में ही इसके परिणाम देखे जाएंगे। यदि सकारात्मक परिणाम आए तो ग्रामीण एरिया में भी इसी सिस्टम को लागू किया जाएगा।
जिले में करीब 470 फीडरों से लगभग तीन लाख 17 हजार 467 मीटरों पर बिजली सप्लाई होती है। कुल छोड़ी गई बिजली से बिल बहुत कम आता है। बिल न भरने वाले 55 हजार उपभोक्ता भी चोरी करते हुए पकड़े जाने जुर्माना न भर सके। जिससे बिल भी पेंडिंग करते रहे। अब इनको निगम का करीब 81 करोड़ रुपये देना है। करोड़ों रुपये की रकम न निकलने पर निगम घाटे में है और बिजली चोरी को रोकने के लिए अनेक प्रकार के स्कीमें लांच कर रहा है।
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सिंगल प्वाइंट कनेक्शन पर अमल
बिजली चोरी रोकने के लिए सिंगल प्वाइंट कनेक्शन पर अमल कर दिया है। जो सरकारी संस्थानों और रियल एस्टेट पर लागू होता है। यहां पर निगम एक मीटर देगा और उस मीटर से सब मीटरों से घर तक बिजली जाएगी। इससे निगम ने सब मीटरों से कोई लेना देना नहीं है। एक मीटर का कुल बिल संबंधित महकमे व कंपनी ने ही देना होगा। सिंगल प्वाइंट कनेक्शन चहारदीवारी के अंदर बने कम से कम 20 प्वाइंट होने अनिवार्य है। मधुबन कांप्लेक्स में 920 मीटरों की जगह एक सिंगल मीटर चालू कर दिया है। इसी तरह जेल व अन्य सरकारी विभागों में सिंगल मीटर दिए जा रहे हैं।
बिजली चोरी करने वाले भी चालाक
बिजली निगम के अफसर जिस स्कीम को लांच करते हैं। लोग भी उसका तोड़ निकाल लेते हैं। पहले मीटर से तार हटाकर बिजली चोरी करते थे। मीटर घर से बाहर लगवाए तो लोगों ने मीटर से पहले ही कट करके बिजली चोरी करने लगे। उपभोक्ता कहते हैं कि बिजली का बिल बहुत महंगा है। जिसको इस महंगाई में पूरा नहीं भरा जा सकता। यदि शहर में 500 से 700 रुपये बिल फिक्स कर दें और ग्रामीण एरिया में 300 से 400 रुपये प्रति दो माह बिल कर दें तो बिजली निगम को बचत होगी। क्योंकि इस स्लैब में सभी लोग बिल भरेंगे और चोरी भी नहीं करेंगे।
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इस प्लान पर सर्वे चल रहा है और आगामी जून महीने में सिस्टम को ऑनलाइन कर दिया जाएगा। फिलहाल इस सिस्टम का टेंडर एचसीएल (हारट्रान कारपोरेशन लिमिटेड) को दिया है। जिसको बिजली निगम ने करनाल शहरी एरिया का डाटा उपलब्ध करा दिया है। शहरी एरिया में ही इसके परिणाम देखे जाएंगे। यदि सकारात्मक परिणाम आए तो ग्रामीण एरिया में भी इसी सिस्टम को लागू किया जाएगा।
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जिले में करीब 470 फीडरों से लगभग तीन लाख 17 हजार 467 मीटरों पर बिजली सप्लाई होती है। कुल छोड़ी गई बिजली से बिल बहुत कम आता है। बिल न भरने वाले 55 हजार उपभोक्ता भी चोरी करते हुए पकड़े जाने जुर्माना न भर सके। जिससे बिल भी पेंडिंग करते रहे। अब इनको निगम का करीब 81 करोड़ रुपये देना है। करोड़ों रुपये की रकम न निकलने पर निगम घाटे में है और बिजली चोरी को रोकने के लिए अनेक प्रकार के स्कीमें लांच कर रहा है।
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सिंगल प्वाइंट कनेक्शन पर अमल
बिजली चोरी रोकने के लिए सिंगल प्वाइंट कनेक्शन पर अमल कर दिया है। जो सरकारी संस्थानों और रियल एस्टेट पर लागू होता है। यहां पर निगम एक मीटर देगा और उस मीटर से सब मीटरों से घर तक बिजली जाएगी। इससे निगम ने सब मीटरों से कोई लेना देना नहीं है। एक मीटर का कुल बिल संबंधित महकमे व कंपनी ने ही देना होगा। सिंगल प्वाइंट कनेक्शन चहारदीवारी के अंदर बने कम से कम 20 प्वाइंट होने अनिवार्य है। मधुबन कांप्लेक्स में 920 मीटरों की जगह एक सिंगल मीटर चालू कर दिया है। इसी तरह जेल व अन्य सरकारी विभागों में सिंगल मीटर दिए जा रहे हैं।
बिजली चोरी करने वाले भी चालाक
बिजली निगम के अफसर जिस स्कीम को लांच करते हैं। लोग भी उसका तोड़ निकाल लेते हैं। पहले मीटर से तार हटाकर बिजली चोरी करते थे। मीटर घर से बाहर लगवाए तो लोगों ने मीटर से पहले ही कट करके बिजली चोरी करने लगे। उपभोक्ता कहते हैं कि बिजली का बिल बहुत महंगा है। जिसको इस महंगाई में पूरा नहीं भरा जा सकता। यदि शहर में 500 से 700 रुपये बिल फिक्स कर दें और ग्रामीण एरिया में 300 से 400 रुपये प्रति दो माह बिल कर दें तो बिजली निगम को बचत होगी। क्योंकि इस स्लैब में सभी लोग बिल भरेंगे और चोरी भी नहीं करेंगे।
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