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चालीस दिन के बाद खुला बाजार, चेहरे चमके, सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी धज्जियां
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चालीस दिन के लगातार लॉकडाउन के बाद सोमवार को सुबह आठ बजे से ही पूरा बाजार खुला तो लंबे समय से घरों में कैद लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग की मर्यादा को तार तार कर दिया। जिला प्रशासन ने जनता को इसकी मर्यादा बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी थी लेकिन ऐसा हो नहीं सका। हालांकि दूर दराज के लोग तो शहर में कम ही आए लेकिन शहर के चौपहिया और दुपहिया वाहन स्वामियों ने कई रास्तों पर जाम जैसी स्थिति उत्पन्न कर दी। यह भी खास बात रही कि लोगों का ध्यान आवश्यक सेवाओं की दुकानों की ओर अधिक रहा। जिससे बड़े कारोबार जैसे सर्राफा, टिंबर, सेनेटरी, लोहा आदि पर बाजार खुलने के बाद भी सन्नाटा ही पसरा रहा। बाजारों मे भारी भीड़भाड़ को देखकर पुलिस को यातायात व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा। यह अव्यवस्था देखकर तो अधिकांश व्यापारियों ने भी आशंका जाहिर की कि कहीं लॉकडाउन खोलना, पिछले चालीस दिनों की मेहनत पर पानी न फेर दे।
करनाल के आरेंज जोन में होने के कारण उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक व मुख्य चिकित्साधिकारी की साझा प्रेस कांफ्रेस में दिए गए निर्देशों के क्रम में सोमवार की सुबह जैसे ही आठ बजे, वैसे ही पिछले चालीस दिनों से घरों मे कैद लोगों के कदम घरों की दहलीज लांघने को उतावले हो गए। हाथों में गाड़ियों की चाभियां आ गईं। अभी दुकानदार दुकानों की सफाई ही करा रहे थे कि बाजार में भीड़ जुटने लगी। यहां तक तो गनीमत रही लेकिन नौ बजते बजते सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जिया उड़ने लगी। यह दीगर बात थी कि लोग मास्क लगाए थे या फिर गमछा चेहरे पर ढके थे लेकिन बारबर की दुकानों, करियाणा, दूध-पनीर, पान गुटखा तंबाकू, सिगरेट, रेडीमेड वस्त्र, मच्छरदानी, बिजली के उपकरण, सौंदर्य प्रसाधनों की दुकानों आदि दैनिक उपयोग की वस्दुतु वाली दुकानों पर भारी भीड़ जुट गई। सोशल डिस्टेंसिंग कहीं भी दिखाई नहीं दी। दुकानदारों ने भी सिर्फ अपने सामान की बिक्री से ही मतलब रखा। कई छोटी दुकानें तो बंद रही, क्योंकि उनके पास सामान ही नहीं था। जो था सो खराब हो गया। कुछ और समय बीता और दोपहर के बारह बजे तो कई बाजारों में वाहनों की संख्या इतनी अधिक हो गई कि कई स्थानों पर जाम की स्थिति बनने लगी। आखिरकार पुलिस को कई चौराहों व मुख्य मार्गो पर यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए उतरना पड़ा। जिसे देखकर कई दुकानदार व व्यापार मंडल के बड़े पदाधिकारी भी बोल उठे कि लॉकडाउन खोलना भले ही मजबूरी हो लेकिन कुल मिलाकर यह अच्छा निर्णय नहीं हुआ। इससे तो चालीस दिन की लॉकडाउन की मेहनत बर्बाद हो सकती है। पुलिस को दो बजते ही बाजार को बंद कराना पड़ा।
बाजार में भीड़ तो बढ़ी, लेकिन खरीदारों की जेब दिखी खाली
-साधन संपन्न लोग तो खरीदारी दिखे लेकिन अधिकांश खरीदार काफी छोटी खरीदारी करते ही नजर आए। क्योंकि चालीस दिन की बंदी में जिसके पास जो था, वह खर्च हो चुका है। श्रमिक वर्ग के हाथों को काम नहीं मिलने के कारण उसके हाथ खाली हैं। नौकरीपेशा लोगों को भी वेतन आदि नहीं मिलने या कम मिलने के कारण अपेक्षित खरीदारी नहीं कर सके। यही कारण है कि बाजार में जबरदस्त भीड़भाड़ के बावजूद अपेक्षानुरूप खरीदारी नहीं हो सकी थी।
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पान तो मिले नहीं, दोगुने रेट पर मिले तंबाकू उत्पाद
-पान तो बाहर से नहीं आ पाने के कारण किसी भी दुकान पर उपलब्ध नहीं थे लेकिन गुटखा, सिगरेट, तंबाकू, बीड़ी की बंपर बिक्री हुई। 90 रुपये की सिगरेट का पैकेट 120 रुपये, पांच रुपये की तंबाकू की पुड़िया दस रुपये में, दस रुपये का बीड़ी का बंडल 15 से 20 रुपये में बिका। फुटकर दुकानदारों का कहना था कि माल है ही नहीं, जिसके कारण थोक विक्रेता भी डेढ़गुना दामों पर माल बेच रहे हैं, जिसके कारण ग्राहकों को महंगा बेचना पड़ रहा है।
-सुबह चालीस दिनों के बाद दुकान खोलने पहुंचा तो साफ सफाई में ही काफी समय लग गया। भीड़ एकदम आ गई, जिससे व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गईं। लेकिन इतना तो समझ में आया कि अब कोरोना के भय के साथ कारोबार करना होगा। लॉकडाउन से पहले और बाद में कारोबार करने में काफी बदलाव है। डिस्टेंसिंग, सेनिटाइजेशन कारोबार का हिस्सा बनाना होगा।
-नंद किशोर, सर्राफा कारोबार, करनाल।
-सहालगों का सीजन तो बीत गया है, शादी ब्याह में जरूरत वाला सामान तो अब बिक नहीं रहा है। अब तो शादी ब्याह से जुड़े कारोबारियों को तो अगले साल का ही इंतजार करना होगा। बाजार तो खुल गया है लेकिन कारोबार नहीं है। लोगों के पास पैसा नहीं है, इसलिए जो जरूरी है, वहीं खरीदारी कर रहे हैं। मैरिज हाल, बैंकेट हाल बंद होने से प्रभाव पड़ रहा है।
-नितिन, शादी के सामान के कारोबारी करनाल।
-सुबह जैसे ही दुकान पर पहुंचा तो ग्राहकों की भीड़ लग गई। लेकिन मैने तो उन्हीं लोगों के बाल कटिंग की जो अपना तौलिया लेकर आए थे। सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रखा। क्योंकि जिला प्रशासन का भी बारबर की दुकानों पर अधिक ध्यान है। ग्राहक भी इसके प्रति जागरूक है। अधिकांश लोग अपना तौलिया साथ लाए थे।
-नफीस, हेयर ड्रेसर करनाल।
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करनाल के आरेंज जोन में होने के कारण उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक व मुख्य चिकित्साधिकारी की साझा प्रेस कांफ्रेस में दिए गए निर्देशों के क्रम में सोमवार की सुबह जैसे ही आठ बजे, वैसे ही पिछले चालीस दिनों से घरों मे कैद लोगों के कदम घरों की दहलीज लांघने को उतावले हो गए। हाथों में गाड़ियों की चाभियां आ गईं। अभी दुकानदार दुकानों की सफाई ही करा रहे थे कि बाजार में भीड़ जुटने लगी। यहां तक तो गनीमत रही लेकिन नौ बजते बजते सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जिया उड़ने लगी। यह दीगर बात थी कि लोग मास्क लगाए थे या फिर गमछा चेहरे पर ढके थे लेकिन बारबर की दुकानों, करियाणा, दूध-पनीर, पान गुटखा तंबाकू, सिगरेट, रेडीमेड वस्त्र, मच्छरदानी, बिजली के उपकरण, सौंदर्य प्रसाधनों की दुकानों आदि दैनिक उपयोग की वस्दुतु वाली दुकानों पर भारी भीड़ जुट गई। सोशल डिस्टेंसिंग कहीं भी दिखाई नहीं दी। दुकानदारों ने भी सिर्फ अपने सामान की बिक्री से ही मतलब रखा। कई छोटी दुकानें तो बंद रही, क्योंकि उनके पास सामान ही नहीं था। जो था सो खराब हो गया। कुछ और समय बीता और दोपहर के बारह बजे तो कई बाजारों में वाहनों की संख्या इतनी अधिक हो गई कि कई स्थानों पर जाम की स्थिति बनने लगी। आखिरकार पुलिस को कई चौराहों व मुख्य मार्गो पर यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए उतरना पड़ा। जिसे देखकर कई दुकानदार व व्यापार मंडल के बड़े पदाधिकारी भी बोल उठे कि लॉकडाउन खोलना भले ही मजबूरी हो लेकिन कुल मिलाकर यह अच्छा निर्णय नहीं हुआ। इससे तो चालीस दिन की लॉकडाउन की मेहनत बर्बाद हो सकती है। पुलिस को दो बजते ही बाजार को बंद कराना पड़ा।
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बाजार में भीड़ तो बढ़ी, लेकिन खरीदारों की जेब दिखी खाली
-साधन संपन्न लोग तो खरीदारी दिखे लेकिन अधिकांश खरीदार काफी छोटी खरीदारी करते ही नजर आए। क्योंकि चालीस दिन की बंदी में जिसके पास जो था, वह खर्च हो चुका है। श्रमिक वर्ग के हाथों को काम नहीं मिलने के कारण उसके हाथ खाली हैं। नौकरीपेशा लोगों को भी वेतन आदि नहीं मिलने या कम मिलने के कारण अपेक्षित खरीदारी नहीं कर सके। यही कारण है कि बाजार में जबरदस्त भीड़भाड़ के बावजूद अपेक्षानुरूप खरीदारी नहीं हो सकी थी।
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-पान तो बाहर से नहीं आ पाने के कारण किसी भी दुकान पर उपलब्ध नहीं थे लेकिन गुटखा, सिगरेट, तंबाकू, बीड़ी की बंपर बिक्री हुई। 90 रुपये की सिगरेट का पैकेट 120 रुपये, पांच रुपये की तंबाकू की पुड़िया दस रुपये में, दस रुपये का बीड़ी का बंडल 15 से 20 रुपये में बिका। फुटकर दुकानदारों का कहना था कि माल है ही नहीं, जिसके कारण थोक विक्रेता भी डेढ़गुना दामों पर माल बेच रहे हैं, जिसके कारण ग्राहकों को महंगा बेचना पड़ रहा है।
-सुबह चालीस दिनों के बाद दुकान खोलने पहुंचा तो साफ सफाई में ही काफी समय लग गया। भीड़ एकदम आ गई, जिससे व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गईं। लेकिन इतना तो समझ में आया कि अब कोरोना के भय के साथ कारोबार करना होगा। लॉकडाउन से पहले और बाद में कारोबार करने में काफी बदलाव है। डिस्टेंसिंग, सेनिटाइजेशन कारोबार का हिस्सा बनाना होगा।
-नंद किशोर, सर्राफा कारोबार, करनाल।
-सहालगों का सीजन तो बीत गया है, शादी ब्याह में जरूरत वाला सामान तो अब बिक नहीं रहा है। अब तो शादी ब्याह से जुड़े कारोबारियों को तो अगले साल का ही इंतजार करना होगा। बाजार तो खुल गया है लेकिन कारोबार नहीं है। लोगों के पास पैसा नहीं है, इसलिए जो जरूरी है, वहीं खरीदारी कर रहे हैं। मैरिज हाल, बैंकेट हाल बंद होने से प्रभाव पड़ रहा है।
-नितिन, शादी के सामान के कारोबारी करनाल।
-सुबह जैसे ही दुकान पर पहुंचा तो ग्राहकों की भीड़ लग गई। लेकिन मैने तो उन्हीं लोगों के बाल कटिंग की जो अपना तौलिया लेकर आए थे। सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रखा। क्योंकि जिला प्रशासन का भी बारबर की दुकानों पर अधिक ध्यान है। ग्राहक भी इसके प्रति जागरूक है। अधिकांश लोग अपना तौलिया साथ लाए थे।
-नफीस, हेयर ड्रेसर करनाल।