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Karnal News: कुवैत में दो दिन से इमरजेंसी, घरों में कैद हैं लोग... प्रदेश के सैकड़ों युवा फंसे
Mon, 02 Mar 2026 02:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Mon, 02 Mar 2026 02:28 AM IST
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करनाल। मध्य-पूर्व में जारी इस्राइल-ईरान युद्ध का असर खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों पर भी पड़ रहा है। कुवैत में दो दिन से आपातकाल लागू है। बाजार बंद होने, उड़ानें रद्द होने और सुरक्षा अलर्ट के कारण प्रदेश के सैकड़ों युवक फंस गए हैं। वहां के लोग भी घरों में कैद हैं।
दो माह पहले वर्क वीजा पर कुवैत गए बसंत विहार निवासी 20 वर्षीय अंकुश ने बताया कि युद्ध के बाद वहां हालात अचानक बदल गए हैं। पिछले दो दिनों से बाजार बंद हैं और सरकार ने इमरजेंसी जैसी स्थिति लागू कर दी है। एयरपोर्ट पर मिसाइल गिरने की खबर के बाद सभी उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। टिकट भी निरस्त कर दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि अधिकांश कंपनियों ने अस्थायी रूप से काम बंद कर दिया है। लोग घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं। राशन का संकट भी बढ़ने लगा है। कई मजदूर बचे हुए सामान से गुजारा कर रहे हैं। सड़कों पर सेना की तैनाती बढ़ा दी गई है और सुरक्षा जांच कड़ी कर दी गई है। अंकुश ने बताया कि प्रदेश के कई जिलों से गए युवक उनके संपर्क में हैं। उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है।
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करनाल का चावल निर्यात बंद, बंदरगाहों पर 28 अरब का माल फंसा
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। इस्राइल-ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब हरियाणा के प्रमुख चावल निर्यात केंद्र करनाल पर भी दिखाई देने लगा है। युद्ध के कारण समुद्री परिवहन प्रभावित होने से देशभर से होने वाला चावल निर्यात अस्थायी तौर पर बंद हो गया है। बंदरगाहों पर भी 28 अरब रुपये से अधिक का माल फंस गया है।
ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्ट एसोसिएशन के प्रधान सतीश गोयल ने बताया कि अरब और खाड़ी देशों में पूरे भारत से हर वर्ष करीब 30 से 40 लाख टन चावल निर्यात किया जाता है। औसतन हर महीने तीन से चार लाख टन चावल भेजा जाता है। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी करनाल की है। यहां से देश के कुल निर्यात का लगभग आधा चावल विदेशों में भेजा जाता है।
उन्होंने बताया कि युद्ध के कारण सभी प्रमुख बंदरगाहों पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई है। कई जहाज खाली खड़े हैं और माल लोड करने से कंपनियां हिचक रही हैं। बीमा और सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण शिपिंग कंपनियां नए ऑर्डर लेने से भी बच रही हैं। इसका सीधा असर करनाल के चावल कारोबार पर पड़ा है।
निर्यातकों के अनुसार देशभर में करीब चार लाख टन यानी करीब 28 अरब रुपये का चावल बंदरगाहों पर अटका हुआ है। अगर जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो व्यापार में धान के दामों पर असर झेलना पड़ सकता है। व्यापारियों का कहना है कि मध्य-पूर्व के देशों में मांग बनी हुई है, लेकिन परिवहन बाधित होने से अनुबंध पूरे नहीं हो पा रहे हैं। सरकार से निर्यातकों ने मांग की है कि स्थिति को देखते हुए विशेष रणनीति बनाई जाए, बीमा और लॉजिस्टिक सहायता दी जाए तथा वैकल्पिक समुद्री मार्गों पर विचार किया जाए, ताकि किसानों और व्यापारियों को बड़े नुकसान से बचाया जा सके।
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दो माह पहले वर्क वीजा पर कुवैत गए बसंत विहार निवासी 20 वर्षीय अंकुश ने बताया कि युद्ध के बाद वहां हालात अचानक बदल गए हैं। पिछले दो दिनों से बाजार बंद हैं और सरकार ने इमरजेंसी जैसी स्थिति लागू कर दी है। एयरपोर्ट पर मिसाइल गिरने की खबर के बाद सभी उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। टिकट भी निरस्त कर दिए गए हैं।
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उन्होंने बताया कि अधिकांश कंपनियों ने अस्थायी रूप से काम बंद कर दिया है। लोग घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं। राशन का संकट भी बढ़ने लगा है। कई मजदूर बचे हुए सामान से गुजारा कर रहे हैं। सड़कों पर सेना की तैनाती बढ़ा दी गई है और सुरक्षा जांच कड़ी कर दी गई है। अंकुश ने बताया कि प्रदेश के कई जिलों से गए युवक उनके संपर्क में हैं। उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है।
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करनाल का चावल निर्यात बंद, बंदरगाहों पर 28 अरब का माल फंसा
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। इस्राइल-ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब हरियाणा के प्रमुख चावल निर्यात केंद्र करनाल पर भी दिखाई देने लगा है। युद्ध के कारण समुद्री परिवहन प्रभावित होने से देशभर से होने वाला चावल निर्यात अस्थायी तौर पर बंद हो गया है। बंदरगाहों पर भी 28 अरब रुपये से अधिक का माल फंस गया है।
ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्ट एसोसिएशन के प्रधान सतीश गोयल ने बताया कि अरब और खाड़ी देशों में पूरे भारत से हर वर्ष करीब 30 से 40 लाख टन चावल निर्यात किया जाता है। औसतन हर महीने तीन से चार लाख टन चावल भेजा जाता है। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी करनाल की है। यहां से देश के कुल निर्यात का लगभग आधा चावल विदेशों में भेजा जाता है।
उन्होंने बताया कि युद्ध के कारण सभी प्रमुख बंदरगाहों पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई है। कई जहाज खाली खड़े हैं और माल लोड करने से कंपनियां हिचक रही हैं। बीमा और सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण शिपिंग कंपनियां नए ऑर्डर लेने से भी बच रही हैं। इसका सीधा असर करनाल के चावल कारोबार पर पड़ा है।
निर्यातकों के अनुसार देशभर में करीब चार लाख टन यानी करीब 28 अरब रुपये का चावल बंदरगाहों पर अटका हुआ है। अगर जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो व्यापार में धान के दामों पर असर झेलना पड़ सकता है। व्यापारियों का कहना है कि मध्य-पूर्व के देशों में मांग बनी हुई है, लेकिन परिवहन बाधित होने से अनुबंध पूरे नहीं हो पा रहे हैं। सरकार से निर्यातकों ने मांग की है कि स्थिति को देखते हुए विशेष रणनीति बनाई जाए, बीमा और लॉजिस्टिक सहायता दी जाए तथा वैकल्पिक समुद्री मार्गों पर विचार किया जाए, ताकि किसानों और व्यापारियों को बड़े नुकसान से बचाया जा सके।