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Karnal News: वसूलते रहे किराया, स्वामित्व देने के बारी आई तो जमीन रेलवे की बताई

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 07 Apr 2023 01:53 AM IST
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Kept charging rent, when it came time to hand over the ownership, the land was told by the Railways
मीराबाई बाजार के 20 साल पुराने नगर निगम के किरायेदारों ने कलेक्टर रेट पर दुकानें खरीदने के लिए डेढ़ साल पहले आवेदन किया था पर अब दुकानों की रजिस्ट्रियों के वक्त निगम अफसरों ने जमीन रेलवे की बता दी। इससे पहले बाजार में फड़ी-दुकानें लगाने के एवज में नगर पालिका और निगम ने तहबाजारी और रेंट भी वसूले। नगर निगम की स्वामित्व योजना के बाद सामने आए जमीनी विवाद को देखते हुए अफसरों ने यह मामला मार्ग दर्शन के लिए मुख्यालय भेज दिया है। उधर, ऐन मौके पर जमीन रेलवे की बताए जाने से दुकानें खरीदने की तैयारी में बैठे किरायेदारों ने अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
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बता दें कि जून-2021 में सीएम मनोहर लाल ने मुख्यमंत्री शहरी निकाय स्वामित्व योजना शुरू की थी। इसके तहत नगर निगम की दुकानों के 20 या उससे अधिक वर्ष पुराने किरायेदारों को कलेक्टर रेट पर दुकानों का मालिकाना हक देने का प्रावधान है। इसमें 31 दिसंबर 2020 को 20 साल पूरे होने की अवधि निर्धारित की गई थी। इस हिसाब से नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी के अंतर्गत 1545 किरायेदार योजना के पात्र माने गए, पर लांच किए पोर्टल पर 674 ने ही आवेदन किए। इसमें करीब 60 मीराबाई बाजार से हैं, जिन्हें योजना का लाभ मिलने में जमीनी विवाद का पेंच फंस गया है।
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मीराबाई बाजार व्यापार एसोसिएशन के प्रेस प्रवक्ता राजकुमार शर्मा ने बताया कि मीराबाई बाजार में करीब 600 किरायेदार हैं, जिसमें करीब 60 ने स्वामित्व योजना में आवेदन किया है। इन्होंने कलेक्टर रेट पर दुकानें खरीदने के लिए डेढ़ साल पहले दस्तावेज से लेकर धन राशि जुटाने के लिए खूब एड़ियां घिसी। अब अन्य जगह के किरायेदारों की दुकानों की रजिस्ट्रियां हो रही हैं। इस दौरान मीराबाई बाजार से आवेदन करने वाले किरायेदारों को यहां की जमीन रेलवे की बताकर योजना लाभ से वंचित कर दिया गया है, जबकि किरायेदार सालभर से दुकानों की रजिस्ट्री अपने नाम कराने के लिए लोन व फाइनेंस पर पैसा उठाए बैठे हैं। पहले दस फीसदी बढ़े कलेक्टर रेट और अब बाजार की जमीन रेलवे की बताए जाने से किरायेदारों को बड़ा झटका लगा है। एसो. की मांग है कि जमीनी विवाद न सुलझने तक किरायेदारों से रेंट भी न लिया जाए।
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जो मीराबाई बाजार बसा हुआ है, किसी समय यहां रेलवे की छोटी लाइन थी। बाद में लोग यहां फड़ी लगाते रहे और धीरे-धीरे खोखे बनाने शुरू कर दिए। यह जमीन नगर निगम की नहीं है, इसलिए यहां स्वामित्व योजना के तहत दुकानों को मालिकाना हक देने की प्रक्रिया होल्ड पर रख विभाग से मार्गदर्शन मांगा गया है।
- अशोक कुमार, डीएमसी, नगर निगम।
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