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Karnal News: ओलंपिक में दम दिखाएगा कर्णनगरी का नौकायन खिलाड़ी बलराज
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ओलंपिक में दम दिखाएगा कर्णनगरी का नौकायन खिलाड़ी बलराज
- दक्षिण कोरिया में आयोजित प्रतियोगिता में तीसरे स्थान पर रहकर पक्का किया टिक
- पिता के निधन के बाद चार बहनों की पालन पोषण की आ गई जिम्मेदारी, मां ने बढ़ाया हौसला
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। पिता का निधन हो गया। चार बहनों के पालन पोषण की जिम्मेदारी चुनौती बन गई। आय का साधन केवल खेती थी मगर मां ने हौसला बढ़ाया तो बलराज ने सभी चुनौतियों का सामना करते हुए नौकायन का अभ्यास जारी रखा। अब वह पेरिस ओलंपिक में दम दिखाएगा। यह कहानी है कैमला गांव निवासी बलराज की जिसने उत्तर कोरिया में आयोजित नौकायन की रोइंग प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल करते हुए ओलंपिक के लिए अपना टिकट पक्का कर लिया है।
बलराज ने बताया कि वह हरियाणा से रोइंग का सिर्फ एक खिलाड़ी है जिसका ओलंपिक में चयन हुआ है। उसने बताया कि वह 15 अप्रैल को दक्षिण कोरिया पहुंचा। यहां चुंगजु सिटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रथम कजाकिस्तान, द्वितीय इंडोनेशिया व बलराज ने तीसरे स्थान पर रहते हुए पेरिस ओलंपिक के लिए जगह बनाई। बलराज ने बताया कि ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना उसका मुख्य लक्ष्य है, इसके लिए वह जीतोड़ मेहनत करेगा। आर्थिक तंगी को भी मात देते हुए पहले अपनी काबिलियत के दम पर भारतीय सेना में भर्ती हुआ। वहां भी अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में परचम लहराया।
तीन साल से कर रहा था अभ्यास
बलराज के छोटे भाई संदीप ने बताया कि उसका भाई बलराज ओलंपिक में चयन के लिए तीन वर्ष से लगातार अभ्यास कर रहा था। वह नौकायन की एकल प्रतियोगिता जिसे रोइंग कहते हैं उसका खिलाड़ी है। उसका पांच वर्ष पहले भारतीय सेना में चयन हुआ था। भाई की शुरू से ही खेलों में रुचि रही है।
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- पिता के निधन के बाद चार बहनों की पालन पोषण की आ गई जिम्मेदारी, मां ने बढ़ाया हौसला
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। पिता का निधन हो गया। चार बहनों के पालन पोषण की जिम्मेदारी चुनौती बन गई। आय का साधन केवल खेती थी मगर मां ने हौसला बढ़ाया तो बलराज ने सभी चुनौतियों का सामना करते हुए नौकायन का अभ्यास जारी रखा। अब वह पेरिस ओलंपिक में दम दिखाएगा। यह कहानी है कैमला गांव निवासी बलराज की जिसने उत्तर कोरिया में आयोजित नौकायन की रोइंग प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल करते हुए ओलंपिक के लिए अपना टिकट पक्का कर लिया है।
बलराज ने बताया कि वह हरियाणा से रोइंग का सिर्फ एक खिलाड़ी है जिसका ओलंपिक में चयन हुआ है। उसने बताया कि वह 15 अप्रैल को दक्षिण कोरिया पहुंचा। यहां चुंगजु सिटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रथम कजाकिस्तान, द्वितीय इंडोनेशिया व बलराज ने तीसरे स्थान पर रहते हुए पेरिस ओलंपिक के लिए जगह बनाई। बलराज ने बताया कि ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना उसका मुख्य लक्ष्य है, इसके लिए वह जीतोड़ मेहनत करेगा। आर्थिक तंगी को भी मात देते हुए पहले अपनी काबिलियत के दम पर भारतीय सेना में भर्ती हुआ। वहां भी अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में परचम लहराया।
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तीन साल से कर रहा था अभ्यास
बलराज के छोटे भाई संदीप ने बताया कि उसका भाई बलराज ओलंपिक में चयन के लिए तीन वर्ष से लगातार अभ्यास कर रहा था। वह नौकायन की एकल प्रतियोगिता जिसे रोइंग कहते हैं उसका खिलाड़ी है। उसका पांच वर्ष पहले भारतीय सेना में चयन हुआ था। भाई की शुरू से ही खेलों में रुचि रही है।
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