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मत्स्य पालन के मामले में करनाल का हरियाणा में पहला स्थान
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मुकेश राणा
मछली पालन की बात हो तो करनाल का जवाब नहीं। करनाल के गांव बुटाना के रहने वाले प्रगतिशील किसान सुलतान सिंह को भला कौन नहीं जानता। अभी हाल ही में उन्हें मछली पालन के क्षेत्र में पद्मश्री अवार्ड से नवाजा गया था। बहरहाल बात इसलिये हो रही क्योंकि 21 नवम्बर को अंतरराष्ट्रीय मत्स्य दिवस मनाया जाता है। पंजाब से एक नवंबर 1966 को अलग होने के बाद से ही हरियाणा में मछली पालन किया जा रहा है। जिले में इस समय 6 ब्लॉकों में 398 किसान मछली पालन का काम कर रहे हैं। जिले में 6 मत्स्य बीज हैचरी है जिनमें 1 सरकारी और 6 प्राइवेट हैं।
देश में मत्स्य उत्पादन की अगर बात करें तो पहले नबंर पर पश्चिम बंगाल आता है और दूसरे स्थान पर आंध्रा प्रदेश। वहीं पोंड कल्चर में (समुंद्र क्षेत्र को छोड़ दे) तो पंजाब पहले और हरियाणा दूसरे स्थान पर है। करनाल में लगभग 600 हेक्टेयर भूमि पर मछली पालन किया जाता है। जिसका उत्पादन 7.8 टन प्रति हेक्टेयर है। इस आंकड़े से करनाल हरियाणा में मत्स्य पालन में नंबर-1 है।
50 से 60 प्रतिशत दिया जाता है अनुदान-
विभाग की ओर से मत्स्य पालन करने वाले किसानों को तालाब निर्माण से लेकर उसकी खाद खुराक पर 50 से 60 प्रतिशत तक अनुदान देने का प्रावधान भी है। विभाग की और से समय समय पर ट्रेनिंग कैंप भी लगाए जाते हैं। यहीं नहीं प्रशिक्षण लेने वाले लोगों को प्रशिक्षण भत्ता भी दिया जाता है। समय समय पर किसानों के तालाबों का भी निरीक्षण किया जाता है।
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मत्स्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर आत्माराम ने बताया कि मत्स्य पालन एक अच्छा व्यवसाय है जोकि उत्तर भारत में बढ़ी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उनका कहना है कि ज्यादातर किसान जानकारी के अभाव में उचित लाभ प्राप्त नहीं कर पाते। विभाग उनकी हर संभव मदद करने के लिए तैयार है।
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मछली पालन की बात हो तो करनाल का जवाब नहीं। करनाल के गांव बुटाना के रहने वाले प्रगतिशील किसान सुलतान सिंह को भला कौन नहीं जानता। अभी हाल ही में उन्हें मछली पालन के क्षेत्र में पद्मश्री अवार्ड से नवाजा गया था। बहरहाल बात इसलिये हो रही क्योंकि 21 नवम्बर को अंतरराष्ट्रीय मत्स्य दिवस मनाया जाता है। पंजाब से एक नवंबर 1966 को अलग होने के बाद से ही हरियाणा में मछली पालन किया जा रहा है। जिले में इस समय 6 ब्लॉकों में 398 किसान मछली पालन का काम कर रहे हैं। जिले में 6 मत्स्य बीज हैचरी है जिनमें 1 सरकारी और 6 प्राइवेट हैं।
देश में मत्स्य उत्पादन की अगर बात करें तो पहले नबंर पर पश्चिम बंगाल आता है और दूसरे स्थान पर आंध्रा प्रदेश। वहीं पोंड कल्चर में (समुंद्र क्षेत्र को छोड़ दे) तो पंजाब पहले और हरियाणा दूसरे स्थान पर है। करनाल में लगभग 600 हेक्टेयर भूमि पर मछली पालन किया जाता है। जिसका उत्पादन 7.8 टन प्रति हेक्टेयर है। इस आंकड़े से करनाल हरियाणा में मत्स्य पालन में नंबर-1 है।
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50 से 60 प्रतिशत दिया जाता है अनुदान-
विभाग की ओर से मत्स्य पालन करने वाले किसानों को तालाब निर्माण से लेकर उसकी खाद खुराक पर 50 से 60 प्रतिशत तक अनुदान देने का प्रावधान भी है। विभाग की और से समय समय पर ट्रेनिंग कैंप भी लगाए जाते हैं। यहीं नहीं प्रशिक्षण लेने वाले लोगों को प्रशिक्षण भत्ता भी दिया जाता है। समय समय पर किसानों के तालाबों का भी निरीक्षण किया जाता है।
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मत्स्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर आत्माराम ने बताया कि मत्स्य पालन एक अच्छा व्यवसाय है जोकि उत्तर भारत में बढ़ी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उनका कहना है कि ज्यादातर किसान जानकारी के अभाव में उचित लाभ प्राप्त नहीं कर पाते। विभाग उनकी हर संभव मदद करने के लिए तैयार है।