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रिफाइनरी ठेकेदारों ने की सांकेतिक हड़ताल, काम बंद करके की नारेबाजी
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111-रिफाइनरी गेट पर एकत्रित ठेकेदार और श्रमिक ।
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मूनक। सभी कर्मचारियों के लिए आईएफआर सूट अनिवार्य करने और पुलिस सत्यापन प्रक्रिया के कारण गेटपास बनवाने में आ रही परेशानी को लेकर शनिवार को रिफाइनरी में काम करने वाले ठेकेदारों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने काम बंद करके सांकेतिक हड़ताल भी की। वहीं समस्याओं का समाधान न होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी भी दी। मामला बढ़ता देख और रिफाइनरी में काम सुचारु कराने के लिए ठेकेदारों को मनाने अधिकारी रिफाइनरी गेट पर पहुंचे। मांगों पर सहमति बनी तो दोपहर बाद ठेकेदारों के निर्देश पर श्रमिक काम पर लौटे।
हड़ताल के कारण रिफाइनरी, नेफ्ता, टाउनशिप व प्रोजेक्ट में काम करने के लिए कोई भी श्रमिक अंदर नहीं गया। ठेकेदारों का कहना है कि रिफाइनरी प्रशासन निराधार नियम बनाकर ठेकेदारों पर थोप रहा है। रिफाइनरी में कार्य करने वाले हर श्रमिक के लिए आईएफआर सूट अनिवार्य किया जा रहा है। आईएफआर सूट वह होता है जो आग से बचाने में सहायता करता है। ठेकेदारों ने बताया कि मेकेनिकल कार्य करने वालों जैसे वेल्डिंग, ग्राइंडिंग, कटिंग का काम करने वाले श्रमिकों के साथ-साथ यूनिट में कार्य करने वाले श्रमिकों तक आईएफआर सूट पहले से ही लागू है, उनके लिए सूट होना भी चाहिए। अब रिफाइनरी प्रशासन स्वीपर व सिविल का काम करने वाले या अन्य हर तरह का काम करने वाले प्रत्येक श्रमिक के लिए सूट की अनिवार्य कर दिया है, यह गलत है।
आईएफआर सूट लागू होने से होगा मोटा नुकसान
ठेकेदारों का कहना है कि एक आईएफआर सूट की कीमत लगभग छह हजार रुपये है और हजारों श्रमिक हैं। इतना बड़ा खर्च वे वहन नहीं कर सकते। दूसरा लेबर हर दिन बदलती रहती है, ऐसे में सभी को सूट दिलाना संभव नहीं है। उन्हें मोटा नुकसान झेलना पड़ेगा और वे ऐसा नहीं होने देंगे।
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लिखित में समझौते के बाद श्रमिक लौटे काम पर
ठेकेदारों ने बताया कि गेट पास बनवाने के लिए गांव के सरपंच या नंबरदार की तस्दीक करवाने और पुलिस सत्यापन की एक्नॉलिजमेंट स्लिप के साथ-साथ ठेकेदार की लिखित में जिम्मेदारी लेने के बाद तीन महीने का अस्थायी गेट पास बनाया जाएगा। उसके बाद उसकी वास्तविक पुलिस वेरिफिकेशन जमा करवानी होगी। दूसरी मांग में आईएफआर सूट के लिए रिफाइनरी के मुख्य कार्यालय से दिशा-निर्देश आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी तब तक पहले वाली स्थिति लागू रहेगी। यह समझौता होने के बाद श्रमिक दोपहर बाद अपने काम पर लौटे।
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हड़ताल के कारण रिफाइनरी, नेफ्ता, टाउनशिप व प्रोजेक्ट में काम करने के लिए कोई भी श्रमिक अंदर नहीं गया। ठेकेदारों का कहना है कि रिफाइनरी प्रशासन निराधार नियम बनाकर ठेकेदारों पर थोप रहा है। रिफाइनरी में कार्य करने वाले हर श्रमिक के लिए आईएफआर सूट अनिवार्य किया जा रहा है। आईएफआर सूट वह होता है जो आग से बचाने में सहायता करता है। ठेकेदारों ने बताया कि मेकेनिकल कार्य करने वालों जैसे वेल्डिंग, ग्राइंडिंग, कटिंग का काम करने वाले श्रमिकों के साथ-साथ यूनिट में कार्य करने वाले श्रमिकों तक आईएफआर सूट पहले से ही लागू है, उनके लिए सूट होना भी चाहिए। अब रिफाइनरी प्रशासन स्वीपर व सिविल का काम करने वाले या अन्य हर तरह का काम करने वाले प्रत्येक श्रमिक के लिए सूट की अनिवार्य कर दिया है, यह गलत है।
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आईएफआर सूट लागू होने से होगा मोटा नुकसान
ठेकेदारों का कहना है कि एक आईएफआर सूट की कीमत लगभग छह हजार रुपये है और हजारों श्रमिक हैं। इतना बड़ा खर्च वे वहन नहीं कर सकते। दूसरा लेबर हर दिन बदलती रहती है, ऐसे में सभी को सूट दिलाना संभव नहीं है। उन्हें मोटा नुकसान झेलना पड़ेगा और वे ऐसा नहीं होने देंगे।
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लिखित में समझौते के बाद श्रमिक लौटे काम पर
ठेकेदारों ने बताया कि गेट पास बनवाने के लिए गांव के सरपंच या नंबरदार की तस्दीक करवाने और पुलिस सत्यापन की एक्नॉलिजमेंट स्लिप के साथ-साथ ठेकेदार की लिखित में जिम्मेदारी लेने के बाद तीन महीने का अस्थायी गेट पास बनाया जाएगा। उसके बाद उसकी वास्तविक पुलिस वेरिफिकेशन जमा करवानी होगी। दूसरी मांग में आईएफआर सूट के लिए रिफाइनरी के मुख्य कार्यालय से दिशा-निर्देश आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी तब तक पहले वाली स्थिति लागू रहेगी। यह समझौता होने के बाद श्रमिक दोपहर बाद अपने काम पर लौटे।