फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   karnal news

18 में से आठ एंबुलेंस खराब

Wed, 28 Oct 2015 12:16 AM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, करनाल
ब्यूरो/अमरउजाला, करनाल Updated Wed, 28 Oct 2015 12:16 AM IST
विज्ञापन
बेशक करनाल सीएम और स्मार्ट सिटी बन गया है बावजूद इसके यहां स्वास्थ्य
विज्ञापन
सेवाओं की हालत बदतर है। मरीजों को घर से अस्पताल पहुंचाने में संजीवनी का रोल अदा करने वाली एंबुलेंस कंडम हो चुकी हैं। जो बची हैं, उनमें कुछ को वीआईपी ड्यूटी में लगा दिया जाता है।

अब बारी आती है आम जनता की, जिले की बात करें तो यहां पर 15 लाख जनसंख्या है, ऐसे में जिले की कुल 18 एंबुलेंस में से मरीजों के हिस्से केवल आठ एंबुलेंस ही आती हैं। ऐसे में मरीजों को निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है। जिले में एंबुलेंस सेवा ठप हो गई है। 25 एंबुलेंस की सख्त जरूरत है और आठ एंबुलेंस से काम चलाया जा रहा है। उनको भी वीआईपी ड्यूटी में लगाने पर मरीजों के लिए नाममात्र की एंबुलेंस बचती हैं। ये हालात तो तब हैं जब खुद सीएम व स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल का दौरा कर चुके हैं।

कहां कितनी एंबुलेंस
जिले में एक कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज, सिविल सर्जन व 15 पीएचसी, सीएचसी हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मेडिकल कॉलेज को चार एंबुलेंस, सिविल अस्पताल को छह एंबुलेंस व 15 पीएचसी व सीएचसी पर कम से कम एक-एक एंबुलेंस होनी जरूरी है। अब तक मेडिकल कॉलेज के पास कोई एंबुलेंस नहीं है। सिविल अस्पताल के पास चार एंबुलेंस और सभी पीएचसी व सीएचसी पर एंबुलेंस न होने के कारण आसपास की एंबुलेंस से इमरजेंसी में काम चलाया जा रहा है।  

वीआईपी मरीजों पर भारी
सीएम सिटी में रोजाना वीआईपी का आगमन होता रहता है। सीएम के आगमन पर पांच से छह एंबुलेंस लगाई जाती हैं। ऐसे में पीएचसी व सीएचसी खाली छोड़नी पड़ती है। हाईवे से वीआईपी को क्रॉसिंग के लिए भी एक दो एंबुलेंस सड़क पर खड़ी रहती है। इस बीच इमरजेंसी मरीज व दुर्घटना होती है तो उनको एंबुलेंस सेवा नहीं मिल पाती। असंध की एंबुलेंस ताले के अंदर खड़ी है, तरावड़ी की एंबुलेंस शॉकर खराब होने के कारण व बड़सत सहित अन्य जगह की एंबुलेंस में बत्ती व सायरन न होने के कारण उन्हें रास्ता नहीं मिल पाता। इस स्थिति में मरीज तड़प रहे हैं और दम तोड़ते हैं।
प्राइवेट एंबुलेंस का डबल किराया
102 एंबुलेंस सेवा के जिला प्रधान पवन बताते हैं कि सरकारी छोटी एंबुलेंस सात रुपये प्रति किलोमीटर व बड़ी एंबुलेंस का 14 रुपये प्रति किलोमीटर का किराया लिया जाता है। सरकारी एंबुलेंस नाममात्र रहने के कारण मरीज मजबूरी में प्राइवेट एंबुलेंसों का सहारा ले रहे हैं। प्राइवेट एंबुलेंस के 25 रुपये प्रति किलोमीटर किराया लिया जा रहा है।

बीच रास्ते में थमती हैं एंबुलेंस
एंबुलेंस चालक बताते हैं कि जिले में एंबुलेंस की हालात खस्ता है। सात से आठ हजार किलोमीटर पर एंबुलेंस की सर्विस होनी होती है, जबकि एंबुलेंस से 18 से 20 हजार किलोमीटर दौड़ चुकी है। अब तक एंबुलेंस की सर्विस नहीं हुई है। कमजोर टायरों में गाड़ी दौड़ रही है। मेंटेनेंस न होने के कारण एंबुलेंस का मौके पर पहुंचकर स्टार्ट न होना, पंचर हो जाना, बीच रास्ते खराब होना सहित अनेक खामी मिलने के कारण मरीज को समय पर उपचार नहीं दिला पाते।

कोट   
25 एंबुलेंस की जरूरत है। पांच छह एंबुलेंस खराब होने के कारण खड़ी हैं। जल्द ही उनको ठीक करवाकर चलाया जाएगा। नई एंबुलेंस की डिमांड भेजी हुई है। जो व्यवस्था है उसके मुताबिक बेहतर सेवा देने की कोशिश रहती है।
- गोपाल, मैनेजर, 102 एंबुलेंस करनाल।
कोट
कुछ एंबुलेंस खराब हैं, उनको ठीक कराने के लिए आदेश कर दिए गए हैं। इसके अलावा लोड को देखते हुए और एंबुलेंस की डिमांड भेजी गई है। हमारा प्रयास है कि मरीजों को बेहतर सुविधाएं प्रदान की जाएं, इस बारे में आला अधिकारियों से बात करके जल्द ही अन्य एंबुलेंस की व्यवस्था कराई जाएगी।
डॉ. एसएल वर्मा, सिविल सर्जन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed