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करनाल की बेटी प्रिया गुप्ता बनीं जज, बोलीं- मैं फैसला नहीं इंसाफ देने में विश्वास रखूंगी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 05 Feb 2020 02:09 AM IST
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karnal daughter priya gupta becomes judge
कोर्ट में मामला क्यों आता है..? जब समझौता नहीं हो पाता। अगर समझौता हो जाए तो कोर्ट तक बात पहुंचे ही क्यों..? बस फिर क्या, फिर तो इंसाफ ही उम्मीद होती है, लेकिन संतोष फैसलों में भी करना पड़ता है। परंतु मेरी कोर्ट में ऐसा नहीं होगा, मैं फैसला नहीं इंसाफ देने में विश्वास रखूंगी। ये बात उस 25 वर्षीय करनाल की बेटी ने कही, जिसने सोमवार शाम जारी हुए हरियाणा न्यायिक सेवा के परिणाम में तीसरा रैंक प्राप्त किया है। जज बनी करनाल के सेक्टर-8 में रहने वाली प्रिया गुप्ता नवंबर माह में राजस्थान न्यायिक सेवा में भी छठा रैंक प्राप्त कर चुकी हैं। बेटी की उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है।
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पिता-भाई वकील, दादा एक्साइज डिपार्टमेंट से रिटायर्ड
जज बनी प्रिया गुप्ता के पिता राजेंद्र गुप्ता और बड़ा भाई मेहुल गुप्ता करनाल में एडवोकेट हैं। जबकि दादा रतनलाल गुप्ता एक्साइज डिपार्टमेंट से रिटायर्ड हैं। हाउस वाइफ मां अनीता गुप्ता और बड़ी बहन प्रियंका गुप्ता ने बताया कि 20 साल पहले वे बड़ौता गांव से शहर में शिफ्ट हुए थे। शुरू से ही बेटी पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में आगे रही है। आज उसकी मेहनत का ही नतीजा है कि दो प्रदेशों की उसने न्यायिक सेवा परीक्षा पास की है और दिल्ली न्यायिक सेवा में अंतिम चरण इंटरव्यू पर है।
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यूनिवर्सिटी में भी थी टॉपर, सीजेआई ने दिया था गोल्ड मेडल
पढ़ाई में शुरू से आगे रहने वाली प्रिया गुप्ता ने पंजाब यूनिवर्सिटी से 2018 में एलएलबी की पढ़ाई पूरी की और अभी एलएलएम का परीक्षा परिणाम आना बाकी है। प्रिया शुरू से ही अपनी यूनिवर्सिटी में टॉपर रही। इस उपलब्धि के लिए सीजेआई टीएस ठाकुर से उन्हें गोल्ड मेडल भी मिल चुका है। वहीं स्कूल और कॉलेज में अब तक की पढ़ाई में उसने कई खिताब अपने नाम किए। प्रिया ने बताया कि पापा उसके रोल मॉडल हैं।
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मेरा संदेश बेटियों को.. हारे नहीं मेहनत करें मंजिल मिलेगी
प्रिया गुप्ता ने खासकर बेटियों को संदेश देते हुए कहा कि हमें पहले प्रयास में असफलता होने पर हार नहीं माननी चाहिए। बल्कि इसे मौका समझकर मेहनत कर आगे बढ़ना चाहिए। मंजिल जरूर मिलती है। हरियाणा न्यायिक सेवा और राजस्थान न्यायिक सेवा की परीक्षा उन्होंने पहली बार में पास की, जबकि दिल्ली न्यायिक सेवा की परीक्षा में उनका पहला प्रयास सिरे नहीं चढ़ पाया था।

प्लानिंग.. टारगेट लेकर सेल्फ स्टडी से पाई सफलता
प्रिया गुप्ता ने बताया कि एलएलएम की पढ़ाई के दौरान उन्हें कॉलेज कम जाना पढ़ता था। इस दौरान उन्होंने कुछ समय के लिए कोचिंग ली। इसके बाद टारगेट लेकर सेल्फ स्टडी कर आज सफलता पाई है। वे रोजाना आठ घंटे पढ़ाई करती थी। ये जरूरी नहीं कि लगातार पढ़े। थोड़ा-थोड़ा टाइम मन लगाकर वे दिन में आठ घंटे का समय अपनी पढ़ाई को देती थी।
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