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करनाल: कल्पना के पिता बनारसीलाल चावला ने 2014 में भरा था देहदान का फार्म, बेटी को भी बनाना चाहते थे डॉक्टर

Wed, 04 Oct 2023 08:05 AM IST
नवीन दलाल गगन तलवार, करनाल (हरियाणा)
गगन तलवार, करनाल (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Wed, 04 Oct 2023 08:05 AM IST
सार

कल्पना चावला को डॉक्टर बनाने की इच्छा रखने वाले बनारसीलाल चावला ने 27 मई 2014 को देहदान के लिए चंडीगढ़ पीजीआई में वसीयत कराई थी। ताकि मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी मानव शरीर की संरचना को समझकर बेहतर डॉक्टर तैयार होंगे।

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Kalpana father Banarsidas Chawla filled body donation form in 2014 In Karnal
देहदान का कार्ड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दानवीर राजा कर्ण और कल्पना चावला के नाम से करनाल की पहचान है। पहली महिला अंतरिक्ष यात्री बनकर जिस बेटी ने करनाल को पहचान दिलाई, अब उसके पिता बनारसी दास ने देह दान से दानवीर राजा कर्ण की परंपरा को आगे बढ़ाया है। वहीं, यह संयोग है कि बेटी के जाने के 20 साल बाद पिता ने अंतिम सांस ली है और बेटी के नाम से करनाल में चल रहे मेडिकल कॉलेज में 20वीं देह भी पिता की दान हुई है।

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विद्यार्थी मानव शरीर की संरचना को समझकर बेहतर डॉक्टर तैयार होंगे
बेटी को डॉक्टर बनाने की इच्छा रखने वाले बनारसीलाल चावला ने 27 मई 2014 को देहदान के लिए चंडीगढ़ पीजीआई में वसीयत कराई थी। उस समय करनाल का कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज शुरू नहीं हुआ था। हालांकि उन्होंने बाद में मेडिकल कॉलेज में ही देहदान की इच्छा व्यक्त की थी, उसी के आधार पर अब उनके परिवार के सदस्यों ने मेडिकल कॉलेज में देहदान कराया है।
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विदित हो कि एक फरवरी 2003 को अमेरीकी अंतरिक्ष यान कोलंबिया के दुर्घटनाग्रस्त होने पर कल्पना चावला का निधन हुआ था। जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज में अब तक करीब 140 लोगों ने देहदान के लिए फार्म भरा है। जिनमें से बनारसीलाल चावला से पहले 19 देह संस्थान को दान में मिली। जिनसे मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी मानव शरीर की संरचना को समझकर बेहतर डॉक्टर तैयार होंगे।
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जब बेटी के आगे कमजोर पड़ गई पिता की इच्छा
कल्पना चावला के पिता उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे, लेकिन कल्पना को बचपन से ही हवाई जहाज और उड़ान की दुनिया में रुचि थी। ऐसे में बेटी की जिद के आगे पिता की इच्छा कमजोर पड़ गई थी। बाद में मां संजयोती देवी ने भी कल्पना के सपने को सराहा तो पिता ने भी साथ दिया। इसके बाद कल्पना ने अपने सपने को पूरा करने के लिए कदम बढ़ाए।


हालांकि कल्पना के निधन के बाद सरकार की ओर से उनके नाम से यहां मेडिकल कॉलेज बनाया गया। निफा अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह पन्नू ने बताया कि मेडिकल संस्थान को देखकर पिता बनारसीलाल कहते थे कि बेटी स्वयं भले डॉक्टर नहीं बन पाई, लेकिन उसके नाम से बना संस्थान लोगों को जीवनदान देगा, यह भी उन्हें सुकून देता है।

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