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‘कल्पना चावला’ देख लगे सपनों का पंख

Sun, 27 Oct 2013 11:40 PM IST
करनाल
करनाल Updated Sun, 27 Oct 2013 11:40 PM IST
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'Kalpana Chawla' began to see the Wings of Dreams
अंतरिक्ष परी डॉ. कल्पना चावला के जीवन पर आधारित नाटक ‘कल्पना चावला’ का सितारों के साथ मंचन किया गया।
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रंगमंच की जानीमानी हस्ती सुषमा सेठ के इस नाटक के जरिए रंगमंच के 40 बाल कलाकारों ने करनाल के सेंट थेरेसा कान्वेंट स्कूल में पहली बार बेहतर प्रस्तुति देकर न केवल तालियां और सराहना बटोरी, बल्कि लोगों की कल्पना चावला की यादें ताजा कराने के साथ उन्हें भी उन्नति के क्षेत्र में अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया।

सामाजिक सेवा के क्षेत्र में कई अवार्डों से नवाजी जा चुकी अपर्णा की ओर से दिल्ली के स्लम एरिया से गोद लिए गए 1400 बच्चों में से 40 बाल कलाकारों ने महत्वपूर्ण किरदार निभाया। पूरे विश्व में भारत के नाम का परचम फहराने वाली कल्पना चावला ने टैगोर बाल निकेतन स्कूल जाने के पहले दिन ही अंतरिक्ष में उड़ाने भरने का सुंदर संपना संजोया था। यहीं से नाटक की शुरुआत की गई।
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कल्पना को स्कूली दिनों में आलू, टिक्की और चॉकलेट भाती थी। वे जिद्द करके पापा बीएल चावला के साथ करनाल का एविएशन क्लब देखने पहुंची थी। कल्पना ने पहले दिन ही जहाज का कॉकपिट तक देखने के साथ पायलट से तकनीकी जानकारी भी पूछी थी।
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पंजाब विश्वविद्यालय की पहली महिला एरोनॉटिकल इंजीनियर बनी
कल्पना ने लड़की होने के साथ स्वयं को कभी अबला नहीं माना। इसके चलते उसका पहली लड़की के तौर पर चंडीगढ़ पंजाब तकनीकी विश्वविद्यालय में एरोनॉटिकल इंजीनियर के तौर पर दाखिला हुआ था। कल्पना ने इसके बाद अमेरिका की टेक्सस यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया।

इससे पूर्व कल्पना ने चंडीगढ़ में अपनी एक सहपाठी को अपनी जेब खर्च से शिक्षा दिलाई और उसे कुछ मालूम भी नहीं होने दिया। कल्पना की मदद भर से उसकी सहपाठी भी गोल्ड मेडलिस्ट रही। अमेरिका में कल्पना ने ने न केवल फ्लाइंग सीखी, बल्कि उसने फ्लाइंग की दुनिया में लाइसेंस भी प्राप्त किया।

कल्पना ने आसमान से धरती का अद्भुत नजारा बताने के साथ कहा कि यान में मात्र दो मिनट में उन्होंने हिमालय को पार कर लिया था। मात्र डेढ़ घंटे में पूरी धरती की परिक्रमा कर ली थी।  

कोलंबिया शटल की उड़ान ने दी खुशी और गम
कोलंबिया शटल से कल्पना की उड़ान भरने पर दुनिया भर के लोगों ने कल्पना को बधाई दी। धरती पर लौटते समय कल्पना का शटल 070 क्रैश हो गया और इसके साथ देशभर में मायूसी छा गई।

बाल कलाकारों ने पहले दिन रोल प्ले कर यह साबित कर कल्पना की तरह स्वयं का संवार कर धरती, पर्यावरण, व देश दुनिया के हित में काम करने का संदेश दिया।  

निफा ने सुषमा सेठ का कल्पना चावला कलाकार रत्न से नवाजा
कल्पना चावला के नाम पर मेडिकल कॉलेज बनवाने के लिए विशेष प्रयास करने वाली संस्था निफा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह पन्नू ने नाटक की लेखक सुषमा सेठ को कल्पना चावला कलाकार रत्न से सम्मानित किया। मौके पर पदाधिकारी एडवोकेट नरेश बराना, कल्पना चावला के माता-पिता भी साथ रहे।

डीसी ने कहा, लें प्रेरणा
डीसी विकास यादव ने बतौर मुख्य अतिथि कल्पना चावला के संदर्भ में उसके बचपन से लेकर कल्पना चावला के सितारों की दुनिया तक पहुंचने का पूरा हाल ब्यां करने के साथ देश भर के युवाओं से आह्वान किया कि उन्हें कल्पना चावला का प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का संकल्प लें।


निर्देशक सुषमा सेठ ने कहा कि उनका प्रयास है देश की युवा पीढ़ी को कुछ अच्छा परोसा जाए। इससे न केवल देश की उन्नति होगी, बल्कि भारत का नाम विश्व के मानचित्र पर सबसे ऊपर भी दिखेगा।
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