{"_id":"68f3f050a5bfe4cd1b041786","slug":"hormones-are-responsible-for-liking-sparklers-and-loud-firecrackers-karnal-news-c-18-knl1008-762260-2025-10-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: फुलझड़ी और तेज आवाज के पटाखे पसंद होने के लिए हार्मोन जिम्मेदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: फुलझड़ी और तेज आवाज के पटाखे पसंद होने के लिए हार्मोन जिम्मेदार
Sun, 19 Oct 2025 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sun, 19 Oct 2025 01:23 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। पटाखे दिवाली उत्सव का महत्वपूर्ण भाग हैं। इनमें भी लड़कियों और लड़कों की पसंद में साफ फर्क होता है। लड़कियां सॉफ्ट, कम आवाज के बम और रंगीन फुलझड़ी पसंद करती हैं। जबकि अधिकांश लड़कों की पसंद अधिक आवाज वाले बम और रॉकेट होते हैं। जिला नागरिक अस्पताल से मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य कौशिक का कहना है कि पसंद में इस फर्क के पीछे हार्मोन जिम्मेदार हैं।
डॉ. सौभाग्य के अनुसार लड़कों में टेस्टोस्टेरोन और एड्रेनालिन का स्तर ऊंचा होने से उनमें रोमांच और जोश अधिक होता है। लड़कों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर औसतन लड़कियों से 7 से 10 गुना अधिक होता है, जो प्रतिस्पर्धा, जोश और जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ाता है। एड्रेनालिन शरीर में उत्साह और उत्तेजना बढ़ाता है इसलिए धमाका, तेज आवाज या स्पीड से जुड़ी गतिविधियां उन्हें रोमांचित करती हैं। वहीं लड़कियों में ऑक्सीटोसिन और सेरोटोनिन का स्तर अधिक होने से उनका शांति, संवेदनशीलता और सामाजिक जुड़ाव अधिक होता है। वे सॉफ्ट, सुंदर और सौंदर्यपूर्ण चीजों की ओर झुकती हैं।
डॉ. सौभाग्य का कहना है कि एक अन्य हार्मोन डोपामिन दोनों में आनंद और इनाम की भावना पैदा करता है, पर इसका असर व्यक्ति के स्वभाव और अनुभव पर निर्भर करता है। जो लोग रोमांच में खुशी ढूंढते हैं, उनमें इसका स्तर तेज गतिविधियों के दौरान बढ़ता है। जैसे लड़कों में तेज धमाके वाले पटाखे चलाते समय। शांत दृश्य या सुंदरता देखने पर भी डोपामिन का स्राव होता है, जो लड़कियों को रंगीन रोशनी में आनंद देता है।
विज्ञापन
तेज धमाके वाले पटाखों से लगता है डर
सेक्टर 6 की निवासी अंजली ने बताया कि हमेशा से तेज धमाके वाले पटाखों से डर लगता है। बचपन से फुलझड़ी ही जलाती आ रही हूं, तब से वो पहली पसंद बन गई। जब रंगीन रोशनी आसमान में फैलती है तो लगता है जैसे पूरा माहौल सुकून से भर गया हो। तेज आवाज वाले पटाखे देखकर लगता है त्योहार की खूबसूरती कम हो जाती है। उसने कहा कि दीवाली का मतलब शांति और रोशनी है, शोर नहीं।
- सॉफ्ट पटाखे खूबसूरती से दिखाते हैं त्योहार के भाव
घरौंडा से खुशी ने बताया कि उसके लिए त्योहार का मतलब सबके साथ आनंद लिया जाना है जिसमें बच्चे, बुजुर्ग, पालतू जानवर, सब खुश रहें। बड़े धमाके वाले पटाखों से अक्सर डर और प्रदूषण दोनों बढ़ते हैं। अनार या फुलझड़ी चलाने में रंग, लाइट और कला का मेल होता है। ये दिवाली की असली पहचान लगती है। मुझे लगता है सॉफ्ट पटाखे त्योहार के भाव को ज्यादा खूबसूरती से दिखाते हैं।
- बम की आवाज गूंजने से रोमांच होता है महसूस
निसिंग निवासी मोहित ने बताया कि हमारे लिए दिवाली का मतलब ही धमाका है। जब रॉकेट आसमान में जाता है या बम की आवाज़ गूंजती है तो एक रोमांच सा महसूस होता है। दोस्तों के साथ मिलकर रॉकेट चलाना, किसका पटाखा ऊंचा गया यही तो मजा है। वो पल ही त्योहार की असली रौनक हैं। धमाके से लगता है कि दिवाली सच में आई है।
- बड़े पटाखे चलाने में थ्रिल
दिवाली साल में एक बार आती है, तो थोड़ा जोश तो बनता है। बड़े पटाखे चलाने में जो थ्रिल है, वो छोटे पटाखों में नहीं मिलता। बचपन से ही हमें जोश और एडवेंचर की चीजें आकर्षित करती हैं। जब आवाज गूंजती है, तो दिल की धड़कन तेज होती है, वही असली दिवाली का एहसास है।
विज्ञापन
करनाल। पटाखे दिवाली उत्सव का महत्वपूर्ण भाग हैं। इनमें भी लड़कियों और लड़कों की पसंद में साफ फर्क होता है। लड़कियां सॉफ्ट, कम आवाज के बम और रंगीन फुलझड़ी पसंद करती हैं। जबकि अधिकांश लड़कों की पसंद अधिक आवाज वाले बम और रॉकेट होते हैं। जिला नागरिक अस्पताल से मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य कौशिक का कहना है कि पसंद में इस फर्क के पीछे हार्मोन जिम्मेदार हैं।
डॉ. सौभाग्य के अनुसार लड़कों में टेस्टोस्टेरोन और एड्रेनालिन का स्तर ऊंचा होने से उनमें रोमांच और जोश अधिक होता है। लड़कों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर औसतन लड़कियों से 7 से 10 गुना अधिक होता है, जो प्रतिस्पर्धा, जोश और जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ाता है। एड्रेनालिन शरीर में उत्साह और उत्तेजना बढ़ाता है इसलिए धमाका, तेज आवाज या स्पीड से जुड़ी गतिविधियां उन्हें रोमांचित करती हैं। वहीं लड़कियों में ऑक्सीटोसिन और सेरोटोनिन का स्तर अधिक होने से उनका शांति, संवेदनशीलता और सामाजिक जुड़ाव अधिक होता है। वे सॉफ्ट, सुंदर और सौंदर्यपूर्ण चीजों की ओर झुकती हैं।
विज्ञापन
डॉ. सौभाग्य का कहना है कि एक अन्य हार्मोन डोपामिन दोनों में आनंद और इनाम की भावना पैदा करता है, पर इसका असर व्यक्ति के स्वभाव और अनुभव पर निर्भर करता है। जो लोग रोमांच में खुशी ढूंढते हैं, उनमें इसका स्तर तेज गतिविधियों के दौरान बढ़ता है। जैसे लड़कों में तेज धमाके वाले पटाखे चलाते समय। शांत दृश्य या सुंदरता देखने पर भी डोपामिन का स्राव होता है, जो लड़कियों को रंगीन रोशनी में आनंद देता है।
विज्ञापन
तेज धमाके वाले पटाखों से लगता है डर
सेक्टर 6 की निवासी अंजली ने बताया कि हमेशा से तेज धमाके वाले पटाखों से डर लगता है। बचपन से फुलझड़ी ही जलाती आ रही हूं, तब से वो पहली पसंद बन गई। जब रंगीन रोशनी आसमान में फैलती है तो लगता है जैसे पूरा माहौल सुकून से भर गया हो। तेज आवाज वाले पटाखे देखकर लगता है त्योहार की खूबसूरती कम हो जाती है। उसने कहा कि दीवाली का मतलब शांति और रोशनी है, शोर नहीं।
- सॉफ्ट पटाखे खूबसूरती से दिखाते हैं त्योहार के भाव
घरौंडा से खुशी ने बताया कि उसके लिए त्योहार का मतलब सबके साथ आनंद लिया जाना है जिसमें बच्चे, बुजुर्ग, पालतू जानवर, सब खुश रहें। बड़े धमाके वाले पटाखों से अक्सर डर और प्रदूषण दोनों बढ़ते हैं। अनार या फुलझड़ी चलाने में रंग, लाइट और कला का मेल होता है। ये दिवाली की असली पहचान लगती है। मुझे लगता है सॉफ्ट पटाखे त्योहार के भाव को ज्यादा खूबसूरती से दिखाते हैं।
- बम की आवाज गूंजने से रोमांच होता है महसूस
निसिंग निवासी मोहित ने बताया कि हमारे लिए दिवाली का मतलब ही धमाका है। जब रॉकेट आसमान में जाता है या बम की आवाज़ गूंजती है तो एक रोमांच सा महसूस होता है। दोस्तों के साथ मिलकर रॉकेट चलाना, किसका पटाखा ऊंचा गया यही तो मजा है। वो पल ही त्योहार की असली रौनक हैं। धमाके से लगता है कि दिवाली सच में आई है।
- बड़े पटाखे चलाने में थ्रिल
दिवाली साल में एक बार आती है, तो थोड़ा जोश तो बनता है। बड़े पटाखे चलाने में जो थ्रिल है, वो छोटे पटाखों में नहीं मिलता। बचपन से ही हमें जोश और एडवेंचर की चीजें आकर्षित करती हैं। जब आवाज गूंजती है, तो दिल की धड़कन तेज होती है, वही असली दिवाली का एहसास है।