{"_id":"8b3ecbc95569ca0e9ffc173b91334f68","slug":"gita-library-could-not-look-at-the-image-of-the-macrocosm-of-god","type":"story","status":"publish","title_hn":"गीता स्थली पर नहीं लग सकी भगवान के विराट रूप की प्रतिमा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गीता स्थली पर नहीं लग सकी भगवान के विराट रूप की प्रतिमा
कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 28 Dec 2013 12:26 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गीता जन्मस्थली ज्योतिसर तीर्थ पर भगवान श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप की प्रतिमा लगाने पर केडीबी ने रोक लगा दी है। केडीबी के अधिकारी शुक्रवार को मौके पर पहुंचे और विराट स्वरूप की प्रतिमा लगाने का कार्य रुकवा दिया।
इस पर ज्योतिसर गांव के श्रद्धालुओं और महंत ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वह अपने अधिकारों का दुरुपयोग करके श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत कर रहे हैं।
वहीं केडीबी के संपदा अधिकारी राजीव शर्मा का कहना है कि ज्योतिसर तीर्थ के स्वामित्व का मामला अदालत में विचाराधीन है और इस पर यथास्थित बहाल करने के आदेश हैं।
विज्ञापन
गौरतलब है कि ज्योतिसर तीर्थ के स्वामित्व का मामला लंबे समय से अदालत में विचाराधीन है। तीर्थ के स्वामित्व की लड़ाई महंत हरानंद और केडीबी के बीच लंबे समय से चल रही है।
उल्लेखनीय है कि ब्रह्मसरोवर पर दो करोड़ रुपये की लागत से स्थापित महाभारत युद्ध का प्रतीक चिह्न विशालकाय श्रीकृष्ण-अर्जुन का रथ ज्योतिसर में ही स्थापित किया जाना था, लेकिन तब महंत हरानंद के ऐतराज के चलते इस धातु रथ को ब्रह्मसरोवर पर स्थापित किया गया।
आज ऐसा ही प्रयास महंत हरानंद की मृत्यु उपरांत उनकी शिष्या महंत चंद्रादेवी और उनके समर्थक शिष्यों ने किया। इनके द्वारा ज्योतिसर में मंदिर के पीछे भगवान श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप वाली 22 फुट ऊंची प्रतिमा लगाने का काम शुरू कराया गया था, लेकिन इस प्रतिमा के स्थापित किए जाने से पहले भनक केडीबी के अधिकारियों को लगी और उन्होंने मौके पर पहुंच कर यह कार्य तुरंत प्रभाव से रुकवा दिया।
वहीं मामला तनावपूर्ण बनते देख ज्योतिसर पुलिस चौकी प्रभारी जगदीश सिंह भी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। महंत चंद्रादेवी और श्रद्धालुओं ने केडीबी अधिकारी और पुलिस को बताया कि तीर्थ उनका है और वे इस कोई गलत कार्य नहीं, बल्कि विकास कार्य करा रहे हैं।
मामले को सुझलाने के लिए चौकी प्रभारी ने शनिवार को महंत से वे दस्तावेज दिखाने को कहा है, जिसके आधार पर महंत चंद्रादेवी ज्योतिसर तीर्थ पर स्वामित्व का अधिकार जता रही हैं। वहीं केडीबी के संपदाधिकारी शर्मा ने कहा तीर्थ पर हाईकोर्ट का स्टे लगा हुआ है और यथास्थित बहाल रखने के आदेश हैं।
उधर ईश्वर सिंह, प्रवीण शर्मा, मोहित, ओमप्रकाश एवं अन्य ग्रामीणों ने केडीबी की कार्रवाई को गलत करार दिया है।
विज्ञापन
इस पर ज्योतिसर गांव के श्रद्धालुओं और महंत ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वह अपने अधिकारों का दुरुपयोग करके श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत कर रहे हैं।
विज्ञापन
वहीं केडीबी के संपदा अधिकारी राजीव शर्मा का कहना है कि ज्योतिसर तीर्थ के स्वामित्व का मामला अदालत में विचाराधीन है और इस पर यथास्थित बहाल करने के आदेश हैं।
विज्ञापन
गौरतलब है कि ज्योतिसर तीर्थ के स्वामित्व का मामला लंबे समय से अदालत में विचाराधीन है। तीर्थ के स्वामित्व की लड़ाई महंत हरानंद और केडीबी के बीच लंबे समय से चल रही है।
उल्लेखनीय है कि ब्रह्मसरोवर पर दो करोड़ रुपये की लागत से स्थापित महाभारत युद्ध का प्रतीक चिह्न विशालकाय श्रीकृष्ण-अर्जुन का रथ ज्योतिसर में ही स्थापित किया जाना था, लेकिन तब महंत हरानंद के ऐतराज के चलते इस धातु रथ को ब्रह्मसरोवर पर स्थापित किया गया।
आज ऐसा ही प्रयास महंत हरानंद की मृत्यु उपरांत उनकी शिष्या महंत चंद्रादेवी और उनके समर्थक शिष्यों ने किया। इनके द्वारा ज्योतिसर में मंदिर के पीछे भगवान श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप वाली 22 फुट ऊंची प्रतिमा लगाने का काम शुरू कराया गया था, लेकिन इस प्रतिमा के स्थापित किए जाने से पहले भनक केडीबी के अधिकारियों को लगी और उन्होंने मौके पर पहुंच कर यह कार्य तुरंत प्रभाव से रुकवा दिया।
वहीं मामला तनावपूर्ण बनते देख ज्योतिसर पुलिस चौकी प्रभारी जगदीश सिंह भी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। महंत चंद्रादेवी और श्रद्धालुओं ने केडीबी अधिकारी और पुलिस को बताया कि तीर्थ उनका है और वे इस कोई गलत कार्य नहीं, बल्कि विकास कार्य करा रहे हैं।
मामले को सुझलाने के लिए चौकी प्रभारी ने शनिवार को महंत से वे दस्तावेज दिखाने को कहा है, जिसके आधार पर महंत चंद्रादेवी ज्योतिसर तीर्थ पर स्वामित्व का अधिकार जता रही हैं। वहीं केडीबी के संपदाधिकारी शर्मा ने कहा तीर्थ पर हाईकोर्ट का स्टे लगा हुआ है और यथास्थित बहाल रखने के आदेश हैं।
उधर ईश्वर सिंह, प्रवीण शर्मा, मोहित, ओमप्रकाश एवं अन्य ग्रामीणों ने केडीबी की कार्रवाई को गलत करार दिया है।