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मानव को धर्म और धर्मसंकट के बीच का अंतर समझाती है गीता

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 11 Dec 2021 02:21 AM IST
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Gita explains to man the difference between Dharma and Dharma Sankat
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। कर्म से संसार का निर्माण होता है। धर्म आसान है, लेकिन इसे कठिन बनाया जाता है। मनुष्य को धर्म व धर्म संकट के बीच का अंतर गीता से मिलता है। इसमें बताया गया कि श्रीकृष्ण ने धर्म की स्थापना की, लेकिन गांधारी से वंशहीन होने का श्राप भी मिला। वेद, पुराण, रामायण, महाभारत सहित सभी धार्मिक ग्रंथ जीवन यापन व जनकल्याण का संदेश देते है, लेकिन अहंकार से केवल एक स्थान तक सीमित रह जाते है। गीता की समझ के लिए कथा की समझ आवश्यक है। ये विचार लेखक देवदत्त पटनायक ने व्यक्त किए। वे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान की ओर से अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन गीता संगोष्ठी के तहत आयोजित प्लेनरी सेशन में बतौर मुख्य वक्ता के रूप में युवाओं को संबोधित कर रहे थे।
अमेरिका से वुडबरी विश्वविद्यालय के प्रो. सतींद्र धीमान ने कहा कि गीता ही आदि व गीता अंत है। गीता समत्व व अर्पण भाव के साथ जनकल्याण के लिए कार्य करने का संदेश देती है। गीता जीवन को जीने का तरीका सिखाती है। गीता गृहस्थ जीवन में पालन करने का ग्रंथ है। केवल सन्यासी जीवन तक सीमित नहीं है। प्रो. धीमान ने कहा कि ज्ञान के बगैर मुक्ति नहीं हो सकती। गीता ही ज्ञानयोग, कर्मयोग व भक्ति योग को अपनाने का संदेश देती है। आमतौर पर भाषणों में सही कार्य करने व सही मार्ग पर चलने का संदेश दिया जाता है, लेकिन सही व गलत क्या है इसकी पहचान श्रीमद्भगवद गीता का अनुसरण करने से होती है। इतना ही नहीं गीता किसी पर अपने विचार थोपने की अनुशंसा नहीं करती, बल्कि व्यक्ति को अपने अनुसार किसी मार्ग को चुनने की स्वतंत्रता प्रदान करती है। गीता कर्म या फल नहीं बल्कि पूरी प्रक्रिया पर केंद्रित धार्मिक ग्रंथ है।
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दूसरे सत्र में मुख्य वक्ता लेमार विश्वविद्यालय अमेरिका के प्रो. वीएस नटराजन ने कहा कि गीता लोक कल्याण के लिए धर्म, स्वधर्म व स्वकर्म का संदेश देती है। गीता सभी के लिए एक समान रूप से क्रियान्वित नहीं होती, बल्कि हर किसी को अपने अनुसार गीता के संदेश व उपदेशों को अपनाकर जनकल्याण के लिए कार्य करने को प्रेरित करती है। श्रीमद्भगवद गीता आहार ग्रहण करने से लेकर आम जीवन में व्यवहार करने तक के बेहतर तरीके से अवगत कराती है।
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संस्थान की निदेशिका प्रो. बिंदू शर्मा ने कहा कि यह कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है कि अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के प्लेनरी सत्र में इस बार महान एवं वरिष्ठ वक्ताओं का आना संभव हुआ है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इस मंच पर आने से विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ा है। इस अवसर पर संगोष्ठी के संयोजन सचिव प्रो. तेजेंद्र शर्मा, सत्र संचालक डॉ. अशोक कुमार, डीन एकेडमिक प्रो. मंजुला चौधरी, प्रो. डीके वर्मा, प्रो. एनके माटा, डॉ. मधुदीप, रोमा सिंह, डॉ. आबिद सहित सहित अन्य मौजूद रहे।
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